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Saturday, 23 November 2013

beejakshara mantra Manas Siddha Mantras (RancharitManas Ke Mantras)

Mantras to accomplishment of many purpose 

These are called as siddha mantras and you can use these for complete all the wishes.

श्री रामचरितमानस के  " मानस सिद्धि मंत्र "

गोस्वामी तुलसीदास जी कृत रामचरितमानस के अति प्रभावशाली मंत्र:-



**पालनीय नियम**

मानस के दोहे-चौपाईयों को सिद्ध करने का विधान यह है कि किसी भी शुभ दिन की रात्रि को दस बजे के बाद अष्टांग हवन के द्वारा मन्त्र सिद्ध करना चाहिये। फिर जिस कार्य के लिये मन्त्र-जप की आवश्यकता हो, उसके लिये नित्य जप करना चाहिये। वाराणसी में भगवान् शंकरजी ने मानस की चौपाइयों को मन्त्र-शक्ति प्रदान की है-इसलिये वाराणसी की ओर मुख करके शंकरजी को साक्षी बनाकर श्रद्धा से जप करना चाहिये।

**अष्टांग हवन सामग्री**

चन्दन का बुरादा, तिल, शुद्ध घी, चीनी, अगर, तगर, कपूर, शुद्ध केसर, नागरमोथा, पञ्चमेवा, जौ और चावल।

**विधान**

जिस उद्देश्य के लिये जो चौपाई, दोहा या सोरठा जप करना बताया गया है, उसको सिद्ध करने के लिये एक दिन हवन की सामग्री से उसके द्वारा (चौपाई, दोहा या सोरठा) 108 बार हवन करना चाहिये। यह हवन केवल एक दिन करना है। मामूली शुद्ध मिट्टी की वेदी बनाकर उस पर अग्नि रखकर उसमें आहुति दे देनी चाहिये। प्रत्येक आहुति में चौपाई आदि के अन्त में ‘स्वाहा’ बोल देना चाहिये।

प्रत्येक आहुति लगभग पौन तोले की (सब चीजें मिलाकर) होनी चाहिये। इस हिसाब से 108 आहुति के लिये एक सेर (80 तोला) सामग्री बना लेनी चाहिये। कोई चीज कम-ज्यादा हो तो कोई आपत्ति नहीं। पञ्चमेवा में पिश्ता, बादाम, किशमिश (द्राक्षा), अखरोट और काजू ले सकते हैं। इनमें से कोई चीज न मिले तो उसके बदले नौजा या मिश्री मिला सकते हैं। केसर शुद्ध 4 आने भर ही डालने से काम चल जायेगा।
हवन करते समय माला रखने की आवश्यकता 108 की संख्या गिनने के लिये है। बैठने के लिये आसन ऊन का या कुश का होना चाहिये। सूती कपड़े का हो तो वह धोया हुआ पवित्र होना चाहिये।

मन्त्र सिद्ध करने के लिये यदि लंकाकाण्ड की चौपाई या दोहा हो तो उसे शनिवार को हवन करके करना चाहिये। दूसरे काण्डों के चौपाई-दोहे किसी भी दिन हवन करके सिद्ध किये जा सकते हैं।
सिद्ध की हुई रक्षा-रेखा की चौपाई एक बार बोलकर जहाँ बैठे हों, वहाँ अपने आसन के चारों ओर चौकोर रेखा जल या कोयले से खींच लेनी चाहिये। फिर उस चौपाई को भी ऊपर लिखे अनुसार 108 आहुतियाँ देकर सिद्ध करना चाहिये। रक्षा-रेखा न भी खींची जाये तो भी आपत्ति नहीं है। दूसरे काम के लिये दूसरा मन्त्र सिद्ध करना हो तो उसके लिये अलग हवन करके करना होगा।

एक दिन हवन करने से वह मन्त्र सिद्ध हो गया। इसके बाद जब तक कार्य सफल न हो, तब तक उस मन्त्र (चौपाई, दोहा) आदि का प्रतिदिन कम-से-कम 108 बार प्रातःकाल या रात्रि को, जब सुविधा हो, जप करते रहना चाहिये।
कोई दो-तीन कार्यों के लिये दो-तीन चौपाइयों का अनुष्ठान एक साथ करना चाहें तो कर सकते हैं। पर उन चौपाइयों को पहले अलग-अलग हवन करके सिद्ध कर लेना चाहिये।

1. विपत्ति-नाश के लिये

“राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।।”

2॰ संकट-नाश के लिये

“जौं प्रभु दीन दयालु कहावा। आरति हरन बेद जसु गावा।।
जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।।
दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।”

3॰ कठिन क्लेश नाश के लिये

“हरन कठिन कलि कलुष कलेसू। महामोह निसि दलन दिनेसू॥”

4॰ विघ्न शांति के लिये

“सकल विघ्न व्यापहिं नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही॥”

5॰ खेद नाश के लिये

“जब तें राम ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए॥”

6॰ चिन्ता की समाप्ति के लिये

“जय रघुवंश बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृशानू॥”

7॰ विविध रोगों तथा उपद्रवों की शान्ति के लिये

“दैहिक दैविक भौतिक तापा।राम राज काहूहिं नहि ब्यापा॥”

8॰ मस्तिष्क की पीड़ा दूर करने के लिये

“हनूमान अंगद रन गाजे। हाँक सुनत रजनीचर भाजे।।”

9॰ विष नाश के लिये

“नाम प्रभाउ जान सिव नीको। कालकूट फलु दीन्ह अमी को।।”

10॰ अकाल मृत्यु निवारण के लिये

“नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।
लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट।।”

11. सभी तरह की आपत्ति के विनाश के लिये / भूत भगाने के लिये

“प्रनवउँ पवन कुमार,खल बन पावक ग्यान घन।
जासु ह्रदयँ आगार, बसहिं राम सर चाप धर॥”

12. नजर झाड़ने के लिये

“स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।”

13॰ खोयी हुई वस्तु पुनः प्राप्त करने के लिए

“गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।।”

14॰ जीविका प्राप्ति केलिये

“बिस्व भरण पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत जस होई।।”

15॰ दरिद्रता मिटाने के लिये

“अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद धन दारिद दवारि के।।”

16॰ लक्ष्मी प्राप्ति के लिये

“जिमि सरिता सागर महुँ जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।
तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।।”

17॰ पुत्र प्राप्ति के लिये

“प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।’

18॰ सम्पत्ति की प्राप्ति के लिये

“जे सकाम नर सुनहि जे गावहि।सुख संपत्ति नाना विधि पावहि।।”

19॰ ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त करने के लिये

“साधक नाम जपहिं लय लाएँ। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएँ।।”

20॰ सर्व-सुख-प्राप्ति के लिये

सुनहिं बिमुक्त बिरत अरु बिषई। लहहिं भगति गति संपति नई।।

21॰ मनोरथ-सिद्धि के लिये

“भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि।
तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि।।”

22॰ कुशल-क्षेम के लिये

“भुवन चारिदस भरा उछाहू। जनकसुता रघुबीर बिआहू।।”

23॰ मुकदमा जीतने के लिये

“पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।”

24॰ शत्रु के सामने जाने के लिये

“कर सारंग साजि कटि भाथा। अरिदल दलन चले रघुनाथा॥”

25॰ शत्रु को मित्र बनाने के लिये

“गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई।।”

26॰ शत्रुतानाश के लिये

“बयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप विषमता खोई॥”

27॰ वार्तालाप में सफ़लता के लिये

“तेहि अवसर सुनि सिव धनु भंगा। आयउ भृगुकुल कमल पतंगा॥”

28॰ विवाह के लिये

“तब जनक पाइ वशिष्ठ आयसु ब्याह साजि सँवारि कै।
मांडवी श्रुतकीरति उरमिला, कुँअरि लई हँकारि कै॥”

29॰ यात्रा सफ़ल होने के लिये

“प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। ह्रदयँ राखि कोसलपुर राजा॥”

30॰ परीक्षा / शिक्षा की सफ़लता के लिये

“जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी॥
मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥”

31॰ आकर्षण के लिये

“जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू॥”

32॰ स्नान से पुण्य-लाभ के लिये

“सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग।
लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग।।”

33॰ निन्दा की निवृत्ति के लिये

“राम कृपाँ अवरेब सुधारी। बिबुध धारि भइ गुनद गोहारी।।

34॰ विद्या प्राप्ति के लिये

गुरु गृहँ गए पढ़न रघुराई। अलप काल विद्या सब आई॥

35॰ उत्सव होने के लिये

“सिय रघुबीर बिबाहु जे सप्रेम गावहिं सुनहिं।
तिन्ह कहुँ सदा उछाहु मंगलायतन राम जसु।।”

36॰ यज्ञोपवीत धारण करके उसे सुरक्षित रखने के लिये

“जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर ताग।
पहिरहिं सज्जन बिमल उर सोभा अति अनुराग।।”

37॰ प्रेम बढाने के लिये

सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥

38॰ कातर की रक्षा के लिये

“मोरें हित हरि सम नहिं कोऊ। एहिं अवसर सहाय सोइ होऊ।।”

39॰ भगवत्स्मरण करते हुए आराम से मरने के लिये

रामचरन दृढ प्रीति करि बालि कीन्ह तनु त्याग ।
सुमन माल जिमि कंठ तें गिरत न जानइ नाग ॥

40॰ विचार शुद्ध करने के लिये

“ताके जुग पद कमल मनाउँ। जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ।।”

41॰ संशय-निवृत्ति के लिये

“राम कथा सुंदर करतारी। संसय बिहग उड़ावनिहारी।।”

42॰ ईश्वर से अपराध क्षमा कराने के लिये

” अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता। छमहु छमा मंदिर दोउ भ्राता।।”

43॰ विरक्ति के लिये

“भरत चरित करि नेमु तुलसी जे सादर सुनहिं।
सीय राम पद प्रेमु अवसि होइ भव रस बिरति।।”

44॰ ज्ञान-प्राप्ति के लिये

“छिति जल पावक गगन समीरा। पंच रचित अति अधम सरीरा।।”

45॰ भक्ति की प्राप्ति के लिये

“भगत कल्पतरु प्रनत हित कृपासिंधु सुखधाम।
सोइ निज भगति मोहि प्रभु देहु दया करि राम।।”

46॰ श्रीहनुमान् जी को प्रसन्न करने के लिये

“सुमिरि पवनसुत पावन नामू। अपनें बस करि राखे रामू।।”

47॰ मोक्ष-प्राप्ति के लिये

“सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। काल सर्प जनु चले सपच्छा।।”

48॰ श्री सीताराम के दर्शन के लिये

“नील सरोरुह नील मनि नील नीलधर श्याम ।
लाजहि तन सोभा निरखि कोटि कोटि सत काम ॥”

49॰ श्रीजानकीजी के दर्शन के लिये

“जनकसुता जगजननि जानकी। अतिसय प्रिय करुनानिधान की।।”

50॰ श्रीरामचन्द्रजी को वश में करने के लिये

“केहरि कटि पट पीतधर सुषमा सील निधान।
देखि भानुकुल भूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान।।”

51॰ सहज स्वरुप दर्शन के लिये

“भगत बछल प्रभु कृपा निधाना। बिस्वबास प्रगटे भगवाना।।”

(आभार:- कल्याण )

beejakshara mantra Mantra for Destroying Enemies

Mantra to destroy the enemy


Ram and Laxman Fight With Ravan
This is the mantra of Ramcharitmanas and by using this you can destroying the enemies and it is also used for escape evils sight. 

This is considered as most powerful mantras to destroying enemies. You should be recited 108 times in a day to get effects of this mantra.

While chanting you should keep attention on mind and don't divert your focus.

यह मंत्र रामचरितमानस से उदृत है और महाकवि तुलसीदास जी ने रामचरित-मानस में मर्यादा पुरषोत्तम श्री राम का जो वास्तविक चित्रांगन किया है, उसका उल्लेख कर पाना संभव नहीं है | अर्थात वाल्मीकि चरित रामायण का हिंदी में अनुवाद इतनी स्पष्टता से कर पाना और रामायण के गूढ़ रहस्यों और मंत्रो को शालीनता से स्पष्ट करना, वास्तविकता में एक अद्भुत कार्य था |

रामचरितमानस में श्री राम के यश, शौर्य और प्रताप को बताते हुए तुलसीदास जी कहते है कि "जो श्री राम के चरणों में रहते है अर्थात जिनको श्री राम का आश्रय प्राप्त है और जो भक्त उनकी शरण में रहते है उनसे बैर अर्थात शत्रुता करना करना खुद की विषमता को खोना है" |


कहने का तात्पर्य यह है कि जो भी कोई भी प्रभु श्री राम और उनके भक्तों से शत्रुता करता है वह अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारता है, क्योकि कि प्रभु के प्रताप से वह विषमता खो देता है | शत्रुता नाश करने और संकट के निवारण के लिए नीचे लिखे इस मंत्र का प्रयोग करे:-  

Mantra:-

बयरु न कर कहू सन कोई |
राम प्रताप विषमता खोई ||

Bayru Na Kar Kahu San Koi |
Ram Partap Vishamata Khoi ||


मंत्र जाप विधि:- रामचरितमानस के इस मंत्र का जाप करने के लिए श्री रामदरबार के सामने पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करने के पश्चात श्री राम का ध्यान करते हुए मंत्र जाप आरम्भ करे | प्रत्येक दिन संध्याकाल में मंत्र का जाप करना श्रेष्ठ रहता है, और कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए | ऐसा करने से प्रभु श्री रामचंद्र की कृपा से आपके सभी शत्रुओं का नाश होगा तथा शत्रुओं से छुटकारा मिलता है |

यह मंत्र गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महाग्रंथ रामचरितमानस से लिया गया है | और यह मंत्र अनिष्ट करने या चाहने वाले शत्रुओं का नाश करने के लिए दिया गया है | पर साधारणतया मंत्र का प्रभाव तब तक शुरू नहीं होता जब तक की मंत्र को सिद्ध नहीं कर लिया जावे, इसलिए मंत्र को सिद्ध कर लेना ही श्रेष्ठ रहता है | और जब मंत्र सिद्ध हो जावे तब इस मंत्र का प्रतिदिन कम से कम 21 बार जाप करना चाहिए, जिससे की मंत्र शक्ति बढती है और मंत्र त्वरित फलदायी हो जाता है |

और  यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि जब तक कार्य सफल नहीं होता तब तक मंत्र का जाप करते रहना ही श्रेष्ठ रहता है |

Mantra To Accomplish all Wishes and Destroy Enemy

Friday, 22 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Success in Court Case

मुक़दमा जीतने के लिए


श्री रामभक्त हनुमान जी के लिए इस संसार में कोई भी कार्य दुष्कर नहीं है | भक्तशिरोमणि हनुमान जी की कृपा होने पर उनके भक्तों के भी सभी कार्य उतनी ही सुगमता से हो  जाते हैं जैसे हनुमान जी प्रभु श्री राम के कार्य को करते हैं |


तुलसीदास जी ने हनुमान जी का बड़ा सुन्दर वर्णन किया है :-

विद्यावान गुणी अति चातुर, 
राम काज करिबे को आतुर |

तथा 

दुर्गम काज जगत के जेते,
 सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते |

Hanuman Ji
अतएव जो कोई भी भक्त श्रृद्धा सहित श्री राम और हनुमान जी की वंदना करता है और नीचे दिए गए मंत्र का विधिपूर्वक जप करता है तो सभी प्रकार के मुकदमो और प्रतिष्टा पतन करने वाले जूठे दावों का तुरंत ही निराकरण होता है | 
मंत्र इस प्रकार है:-

In Hindi:-

 पवन तनय बल पवन समाना |
बुधि बिबेक बिग्यान निधाना || 

 In English:-

 Pavan Tanay Bal Pavan Samana |
Budhi Bibek Bigyan Nidhana ||


मंत्र जाप विधि :- इस मंत्र को मंगलवार या शनिवार को पूर्व या उत्तर में मुख करके जाप करना चाहिए या मंत्र सिद्ध कर लेना चाहिए | और भगवान राम में पूर्ण आस्था रखते हुए अगर कोई भक्त इस मंत्र का जाप करता है तो इससे वह सभी प्रकार कि आपदाओं से मुक्त हो जाता है | और सभी प्रकार के मुकदमों में विजयश्री हासिल करता है | तभी तो प्रभु के लिए कहा जाता है :-

कवन सो काज कठिन जग माही, 
जो नहीं होई तात तुम्ह पाई |

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beejakshara mantra Significance Of God Worship & Satsang

सत्संग और प्रार्थना की महिमा तथा महत्व 

In Hindi:-
बिनु सत्संग विवेक न होई |
राम कृपा बिनु सुलभ न सोई ||

In English:-
Binu Satsang Vivek Na Hoi |
Rama Kripa Binu Sulabh Na Soi ||

इस मंत्र में श्री राम की महिमा का गुणगान किया गया है, और तुलसीदास जी ने श्री राम प्रभु के सत्संग का चित्रण किया है कि बिना सतसंग किये विवेक अर्थात ज्ञान नहीं होता है और सत्संग नहीं करने से राम कृपा भी नहीं होगी जिससे आप सुलभता अर्थात सरलता से सो नहीं सकते, यहाँ तुलसीदास जी ने सोने का तात्पर्य मोक्ष प्राप्ति से लिया है तथा सुलभ न सोई अर्थात आप सुलभता से नहीं मर सकते और अगर राम का नाम नहीं लिया तो जीवन में बहुत कष्ट उठाने पड़ते है और जीवन मृत्यु के सामान हो जाता है |

अत: प्रत्येक मनुष्य को भगवान का भजन और कीर्तन करना चाहिए जिससे उसका प्रारब्ध सुधरे और जीवन में सुख और शांति बनी रहे |

beejakshara mantra Mantra to Fulfill Desires and Wishes

मनोकामना पूर्ण करने हेतु मंत्र

आज इस धर्म और अधर्म के कल्पित संसार में कई लोग अभी भी भगवान को ही सर्वशक्तिमान मानते है और मानना भी चाहिए क्योकि इस बात में किंचितमात्र भी संदेह नहीं है कि भगवान ही सर्वशक्तिमान है | तथा जो यह मानते है और कहते है कि भगवान नहीं है तो ऐसे मूर्ख और नाराधामी लोगों का जीवन पशु सामान है जो देख और महसूस तो कर पा रहे है पर उस शक्ति-स्वरूप परमात्मा का गुणगान नहीं कर पाते है, तथा इस कलियुग के मायाजाल में बुरी तरह से फंसकर अपना यह जीवन तो नष्ट कर ही रहे है साथ ही साथ परलोक को भी कष्टमय बना रहे है |



अत: मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि मानव जीवन कई भागों में विभजित है जहाँ मनुष्य को भोग-योग तथा धर्म-कर्म आदि पर विचारकर ही आगे कदम बढ़ाना चाहिए| यद्यपि हमें इस गृहस्थ जीवन से मोह तो होता ही है, परन्तु गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी निष्टावान और प्रभु उपासक बना जा सकता है |

हमें मनोकामना और वर प्राप्ति तथा मनवांछित फल पाने के लिए परमात्मा से अनुरोध करना चाहिए कि :- हे परमपिता परमेश्वर मुझ तुच्छ भक्त पर कृपा करे तथा मेरी मनोकामनाओं को पूर्ण करे |

रामचरितमानस में इस प्रकार कि भक्ति का बड़ा ही सुन्दर वर्णन देखने को मिलता है, जहाँ पर माता सीता कि भक्ति और समर्पणभाव से माता गौरी और देवर्षि नारद जी प्रसन्न हो जाते है और उनकी मनोकामना कि पूर्ति का आश्वाशन देते है | रामचरितमानस में दिए गए इस मंत्र को सिद्ध मंत्रो की श्रेणी में रखा जाता है | यह मंत्र वर प्राप्ति हेतु भी अग्रणी माना जाता है | रामचरितमानस में दिए दृष्टान्त के अनुसार आतिथ्य सत्कार करने से प्रसन्न हो नारद जी ने सीता माता को इसी प्रकार से आशीवाद दिया था तथा माता सीता द्वारा दुर्गा (माँ गौरी) की पूजा करने पर माता गौरी ने उन्हें इस प्रकार आशीर्वाद दिया |


In Hindi:-
सुनुसिय सत्य असीस हमारी |
पूजहिं मनोकामना तुम्हारी ||

In English:-
Sunu Siya Satya Ashisa Hamari |
Pujahin Mano Kamana Tumhari ||

भावार्थ:- यह मंत्र रामचरितमानस के बालकाण्ड से उदृत है तथा इसमें माता पार्वती जी की पूजा करने पर माँ गौरी अर्थात माता पार्वती प्रसन्न होकर माता सीता से कहती है कि, हे सीता तुम्हारी भक्ति और सेवा निष्काम है तथा तुम्हारे विचार अति उत्तम है अत: हे जनकनंदिनी तुम्हारी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी और जो तुम्हे श्रृद्धा भाव से पूजेगा, उसकी मनोकामना भी निसंदेह पूर्ण होगी |

मंत्र जाप विधि:- यह मंत्र रामचरितमानस के सिद्ध मन्त्रों में से एक है और गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीराम शलाका में भी मनोरथ सिद्धि के लिए इस मंत्र का उल्लेख किया है |
इस मंत्र का जाप करने से पूर्व दस मिनट तक एकाग्रचित्त होकर भगवान श्रीराम और माता सीता का ध्यान करना चाहिए तथा उसके बाद ही इस मंत्र का जप आरंभ करें | मंत्र को प्रतिदिन संध्याकाल में कम से कम 108 बार जपना चाहिए | या हवन कर मंत्र की सिद्धि कर लेनी चाहिए | ऐसा करने से आपकी मनोकामना अवश्य ही सफल होती है |

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Video of Shree Morari Bapu During Ram Katha or Manas Katha

Tuesday, 19 November 2013

beejakshara mantra Mantras to Get Rid from Trouble and Embarrassment

दुःख और शोक निवारण के लिए 

In Hindi:-
सुनहि बिनय मम बिटप असोका |
सत्य नाम करु हरु मम सोका ||

In English:-
Sunahi Binay Mam Bitap Ashoka |
Satya Nam Karu Haru Mam Soka ||

यह मंत्र (चौपाई) रामचरितमानस मैं सुन्दर कांड से ली गई है | इसमें माता सीता अशोक वाटिका में अशोक के वृक्ष को कहती है कि – हे अशोक (अर्थात जो शोक का नाश करता है) आप मेरी प्रार्थना को सुनकर, मेरे शोक अर्थात दुखों को हर लीजिए और अपने नाम कि महिमा को सत्य करिये |

अत: जिन भक्तों को किसी भी प्रकार का दुख, पीड़ा या संताप हो तो उन्हें इस मन्त्र का प्रतिदिन संध्या समय में कम से कम २१ बार जप करना चाहिए | ऐसा कने से आपके समस्त दुखों का निवारण होगा |

beejakshara mantra The True Fact of Universe

कर्मों के आधार पर परिणाम 

Universe
इस चराचर जगत का अटल सत्य यह है कि यहाँ पर प्राणीमात्र को जो कुछ भी मिलता है, यथा करने, रहने और खाने आदि का बंटवारा कर्मों के आधार पर होता है | प्राणी जैसा कर्म करते है वैसा ही उनको फल प्राप्त हो जाता है, इसमें कोई संदेह नहीं है |

अत: कर्मों का परिणाम कैसे प्राप्त होते है और कर्म किस तरह से प्राणी का हित और अहित कर सकते है, रामचरितमानस में इस सन्दर्भ में एक चौपाई इस प्रकार है :-


In Hindi:-

जहाँ सुमति तहँ संपति नाना |
जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना ||

In English :-

Janhan Sumati Tanha Sanpati Nana |
Janhan Kumati Tahan Bipati Nidana ||

यह मंत्र (चौपाई) रामचरितमानस मैं सुन्दर कांड से उदृत है | इसमें सुमति अर्थात अच्छाई और कुमति अर्थात बुराई से क्या फल मिलता है, यह दर्शाया गया है |

यह प्रसंग सुन्दर कांड में विभीषण द्वारा रावन को समझाने के सन्दर्भ में आता है, कई तरह से समझाने के बाद भी जब रावण नहीं मानता है और उसे मारने के लिए आतुर हो जाता है | तब विभीषण जी माल्यवंत के घर जाकर कहते है कि जो भी होता है, या होने वाला है वह तो विधाता कि लीला है परन्तु – जहाँ सुमति है वहाँ संपत्ति का वास होता है और जहाँ कुमति है वहाँ पर विपत्ति आना निश्चित है |

अर्थात इससे यह स्पष्ट होता है कि जो कुमति अर्थात बुराई के मार्ग पर चलता है उसको इन कर्मों का फल तो भोगना ही पडता है |

beejakshara mantra Mantra to Getting True Devotion of God

भगवान की भक्ति प्राप्त करने हेतु मंत्र

This mantra’s from kishkindha kand of Ramcharitmanas and by chanting this mantra, you will getting success everywhere in life.

In Hindi:-

अब प्रभु कृपा करहूँ एहिं भांती |
सब तजि भजन करहूँ दिन राती ||

In English:-

Ab Prabhu Kripa Karahun Eahin Bhanti |
Sab Taji Bhajan Karahu Din Raati ||

यह मंत्र (चौपाई) गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के किष्किंधाकांड से ली गई है, इसमें भगवान से भक्त ने कहा है कि- हे प्रभु अगर कृपा करनी है तो ऐसी कीजिये कि मैं सब कुछ छोडकर दिन-रात केवल आपका ही भजन (स्मरण) करता रहूँ |

अत: इस मंत्र का जाप करने से आपको प्रभु कि भक्ति प्राप्त होगी और इस मंत्र का प्रतिदिन स्मरण करने से प्रभु श्रीरामचंद्र कि कृपा होती है, तथा सुख व समृद्धि कि वृद्धि होती है |

Friday, 15 November 2013

beejakshara mantra Universal Truth & What's Karma ?

Karma and effects of karma

Reactions of Karma
हमारे शास्त्रों और पुरानों में कर्म का बड़ा महत्व है, यथा मनुष्य और सभी जीवों के लिए कर्म का एक सामान महत्व है | इसके अनुसार प्राणी अपने जीवनकाल में जो कुछ भी करते है वह कर्म के अंतर्गत आता है, चाहे वह अच्छा कार्य और या बुरा सभी को कर्म में सम्मिलित किया जाता है | तथा इसी कर्म के अनुसार प्राणियों को सुख और दुखों का भोग कारण पडता है |

कर्म की महिमा आदि से लेकर अनंत तक एक समान ही देखने को मिलती है, इसमें प्राणीमात्र के जीवन से लेकर मृत्यु तक के कर्मों का उल्लेख होता है | भगवद्गीता में भगवान कृष्ण ने कर्म को महान बतलाते हुए कहा है कि मनुष्यों को कर्म करने से पहले चिंतन अवश्य करना चाहिए कि जो कर्म करने जा रहे है वो उचित है या नहीं, क्योंकि जैसा कर्म हम करते है, वैसा ही फल हमें भोगना पडता है |

और यह भी सच्चाई है कि मनुष्य का पुनर्जन्म भी कर्मों के आधार पर ही होता है | अत: मनुष्य को चाहिए कि जो हुआ उसे भूलकर अच्छे कर्मों को कारण आरम्भ करें, और मन को प्रभु परम में लगाये और अपने जीवन को धन्य बनायें |

रामचरितमानस और भगवद्गीता में कर्म को इस प्रकार परिभाषित किया गया है :-


(1)चौपाई:-

काहु न कोउ सुख दुःख कर दाता |
                     निज कृत करम भोग सबु भ्राता ||

भावार्थ:- महाकवि तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरित मानस के अयोध्या कांड में श्री लक्ष्मणजी निषादराज से कहते है कि - हे भाई ! कोई किसी को सुख दुःख देने वाला नहीं है, सभी लोग अपने किये हुए कर्मों का फल भोगते है ! अर्थात जैसी करनी वैसी भरनी !

(2)चौपाई :-

कर्म  प्रधान   विश्व  करि  राखा |
                         जो जस करहि सो तस फलु चाखा ||

भावार्थ:- अर्थात इस संसार में कर्म ही प्रधान है, जो जैसा करता है वैसा ही फल पाता है |
               "जैसी करनी वैसा फल, आज नहीं तो निश्चय कल !"

भगवद्गीता श्लोक :-
           
          यादृशं  कुरुते कर्म,  तादृशं फलमश्नुते |
      और 
             अवश्यमेव भोक्तव्यं कृतं कर्म शुभाशुभं |

भावार्थ:- गीता में भगवान कृष्ण कहते है कि मनुष्य जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल पाता है !और मनुष्य  को उसके अच्छे और बुरे कर्मो के फल अवश्य ही भोगने पड़ते है |

इसलिए कहावत है कि "बोया पेड़ बबूल का, आम कहा ते खाय " |

अत: मनुष्य को चाहिए कि वह अपने जीवन में उचित कर्म करें, क्योकि सभी जीवों में मनुष्य ही एकमात्र प्राणी है जो सोचने और समझाने की क्षमता रखता है |

beejakshara mantra How to Get Success In Life

Success of Human Life

मानव जीवन की सफलता के संदर्भ में महाकवि तुलसीदास जी ने  श्री रामचरितमानस में लिखा है कि:-

चौपाई(1):-
बड़े   भाग्य  मानस  तनु  पावा !
 सुर  दुर्लभ  सद  ग्रन्थन गावा !!

चौपाई(2):-
साधन  धाम  मोक्षकर  द्वारा !
 पायन जो  परलोक संवारा !!
चौपाई(3):-

नर तनु पाय विषय मन देही !
 पलटी सुधा ते नर विष लेही !!

चौपाई(4):- 
                        
जो न तरहि भाव सागर, नर समाज अस पाय !
      सो कृत निंदक मंद मति, आतम हनि गति जाय !!


भावार्थ:- अर्थात जीव को बड़े भाग्य से, कितने ही जन्मों के पुन्यकर्मो के फलस्वरूप मनुष्य जीवन मिलता है! अत: इसको व्यर्थ ही गवाना नही चाहिए,  इस जीवन को प्रभु के चरणों में अर्पित करना चाहिए ! और जो भगवत्कृपा से ऐसे मनुष्य शरीर को पाकर संसार  सागर से  पार होने का प्रयास नहीं करता है, वह घोर निंदक मंदमति आत्म हत्यारों कि गति प्राप्त करता है ! जिसके लिए उपनिषदों में कहा गया है:-

 असूर्या: नामते लोका: अन्धेन तमसा  बृता: !
             तान्स्ते  प्रेत्याभिगच्छन्ति ये के चात्म हनो जना: !!

beejakshara mantra Mantra To Destroy Crisis & Difficulties

संकट की स्थिति में निवारण हेतु

Lord Hanuman
हनुमान जी को संकट या विपदा में सर्वप्रथम याद किया जाता है, क्योकि इन्हीं कि कृपा से संकट पल भर में दूर हो सकता है, ऐसा तुलसीदास जी ने कहा था कि :-

संकट ते हनुमान छुडावे |
मन क्रम वचन ध्यान जो लावे | |

और 

संकट कटे मिटे सब पीरा |
जो सुमिरे हनुमत बलबीरा ||

अत: संकट के समय हनुमान जी का श्रृद्धा सहित ध्यान कर इन मन्त्रों का जाप करने से सभी प्रकार कि बाधाओं का निराकरण होता है |

मंत्र इस प्रकार से है :-



In Hindi:-

दीन दयाल बिरद संभारी | हरहु नाथ मम संकट भारी ||

In English:-

Deen Dayal Birad Sanbhari | Harhu nath Mam Sankat Bhari ||


अर्थात :- यह मंत्र गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महाग्रंथ रामचरितमानस से उदृत है और यह मंत्र माता सीता से हनुमान भेंट प्रसंग में आता है |

जिस समय हनुमान जी माता सीता से वापस जाने की आज्ञा लेते है तब माता सीता उनसे कहती है कि – हे ! रामदूत हनुमान, आप जाकर अपने प्रभु श्रीराम से कहना कि, हे दीन दुखियों के पीड़ा को हरने वाले, आप तो सारे संसार की पीड़ा को हर कर उनका कल्याण करते हो, तो हे नाथ आज मुझ पर बहुत बड़ा कष्ट आन पड़ा है और मेरी इस पीड़ा को भी हर लो और मेरा भी कल्याण करो |

अत: यह मंत्र संकट की दशा में रामबाण का काम करता है | साधक को चाहिए की इस मंत्र को हनुमान और सीताराम (रामदरबार) की छवि का समरण करते हुए जप करे | ऐसा करने से आपके सभी संकटों का निवारण होगा |

beejakshara mantra Mantras For Good Wishes & happiness

मंगल कामना हेतु मंत्र

In Hindi:-

मंगल भवन अमंगल हारी | द्रवउँ सो दशरथ अजिर बिहारी ||1||

मंगल भवन अमंगल हारी | उमा सहित जय जपत पुरारी ||2||

In English:-

Mangal bhavan Amangal haari | Dravaun So Dasharath Ajir Bihari ||1||

Mangal bhavan Amangal haari | Uma Sahit Jai Japat Purari ||2||

इन रामचरितमानस की दोनों चौपाईयों का स्मरण किसी भी कार्य को प्रारंभ करने से पहले अवश्य ही करना चाहिए और रामायण के पाठ के दौरान मंगल कामना हेतु इन चौपाईयों का सम्पुट लगाना कल्याणकारी होता है | और रामायण प्रेमी और भक्तों को इन मन्त्रों का जाप सदैव करते रहना चाहिए, जिससे भगवान श्री राम की कृपा से उनका सदैव मंगल होगा |

beejakshara mantra Mantra to Get Again Your Lost Things

खोई हुयी वस्तु पुनः प्राप्त करने के लिए मंत्र

Lord Ram
रामचरितमानस के इस मंत्र से खोई हुयी चीज या प्रिय वस्तु श्री राम प्रभु की कृपा से शीघ्र ही मिल जाती है अत: जिन व्यक्तियों के किसी भी वस्तु या प्रियजनों का पता नहीं लग पा रहा हो उन्हें इस मंत्र का प्रयोग अवश्य कारण चाहिए | तथा श्री राम में श्रृद्धा और भक्तिभाव रखते हुए इस परम सिद्ध मंत्र का कम से कम 108 बार जाप अवश्य करे | जिससे कि श्री राम जी कि कृपा हो तथा आपकी खोई हुयी वस्तु आपको प्राप्त हो | इस मंत्र जाप प्रात: और संध्याकाल में तब तक करे जब तक आपकी खोई हुयी वस्तु मिल नहीं जाती |


मंत्र इस प्रकार से है :-

In Hindi:-

गई बहोर गरीब नेवाजू |
सरल सबल साहिब रघुराजू ||

In English:-

Gai Bahor Garib Nevaju |
Saral Sabal Sahib Raghuraju ||

This mantra’s from the Ramcharitmanas. You can use this mantra when you want to get back your lost things or item, but before it you have to jaap this mantra daily at least 21 times. And jaap this mantra regularly to get peaceful life.

खोई हुयी वस्तु प्राप्त करने का मंत्र (2):-


Raja Kartviryaarjuna
हैहयवंशी राजा कार्तवीर्यार्जुन जो भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्रावतार माने जाते है | किसी भी वस्तु या प्रिय चीज के खो जाने पर, इनकी पूजा करनी चाहिए तथा राजा कार्तवीर्यार्जुन को साधना द्वारा प्रसन्न करना चाहिए जिससे कि इस प्रकार की आपदा का तुरंत ही समाधान होता है | क्योकि वे सुदर्शनावतार होने के कारण उनकी पहुँच सम्पूर्ण लोकों तक है अत: शास्त्रों के अनुसार वह सभी लोकों में जाकर खोई हुयी वस्तु या व्यक्ति सभी को ढूंढकर लाने में समर्थ है |

पूजा विधान:- प्रात: काल और संध्याकाल में स्नानादि से निवृत होकर शुद्ध आसन पर विराजमान होकर पूर्व या उत्तर दिशा में मुंह करके, घी का दीपक जलाकर पूर्ण श्रृद्धा से भगवान विष्णु के सुदर्शनावतार या सुदर्शन चक्र का ध्यान करते हुए निम्नलिखित मंत्र का 108 (एक माला) बार जाप करे | साधक कितनी भी माला का जाप कर सकता है, यह साधक पर निर्भर करता है |

मंत्र इस प्रकार से है :-

In Hindi:-


ऊँ ह्रीं कार्तवीर्यार्जुनोनाम राजा बाहू सहस्त्रवान् |
तस्य नाम स्मरणमात्रेण गतं नष्टं च लभ्यते ||

In English:-


Ohm Hrim Kartviryaarjunonam Raja Bahu Sahastravan |
Tasya Naam Smranmatren Gatam Nashtam Cha Labhyate ||

beejakshara mantra Mantra to Get Rid of All Problems

विविध रोगों तथा बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए

In Hindi:-

दैहिक दैविक भौतिक तापा |
राम राज नहिं काहुहि ब्यापा ||

In English:-

Daihik Daivik Bhoutik Tapa |
Ram Raj Nahi Kahuhi Byaapa ||

यह मंत्र रामचरितमानस से लिया गया है | और इसके जाप से याचक को समस्त व्याधियों और मानसिक तथा शारीरिक रोगों से छुटकारा मिलता है | इस मंत्र को सिद्ध कर लेने से यह त्वरित फलदायी होता है | अथवा याचक को इस मंत्र को रोज कम से कम 108 बार जप करना आवश्यक है |

Thursday, 14 November 2013

beejakshara mantra Mantra to Visitation Of God

भगवान के दर्शन प्राप्त करने के लिए

In Hindi:-

भक्त बछल प्रभु कृपानिधाना |
बिस्वबास प्रकटे भगवाना ||

In English:-

Bhakat Bachhal Prabhu Kripanidhana | 
Bisvabas Prakate Bhagawana ||

यह मंत्र रामचरितमानस से उद्धृत है, रामचरितमानस में कहा गया है कि भगवान भक्त वत्सल है और कृपानिधान है, तथा भगवान अपने भक्तों के प्रेम के सागर में खो जाते है, और जो भक्तजन विश्वास और श्रृद्धा से उनको भजते है, तो भगवन ऐसे भक्त के विश्वास को कभी भी हानि नहीं पहुंचाते है |

इसीलिए भगवद्गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण, अर्जुन से कहते है कि हे पार्थ – जो भक्तजन सभी तरफ मुझ परमात्मा को देखता है, और मुझ में स्थित होकर मेरे परायण होकर मुझ सच्चिदानंदघन सवरूप का ध्यान करता है | ऐसे प्रेमिभक्त मुझे अत्यंत प्रिय है, और वो भक्त मुझ परमेश्वर को प्राप्त होकर मोक्ष प्राप्त करते है | 
                                                                                                                                                 (भगवद्गीता)

इसलिए कहा गया है कि :-
हरि व्यापक सर्वत्र समाना | प्रेम ते प्रकट होई मैं जाना ||
                                                                                          (रामचरितमानस)

Saturday, 9 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Success in Business

!! सम्पति (व्यापार) की प्राप्ति के लिए  !!
                         
                                           

In Hindi:-
         
         जे सकाम नर सुनहि जे गावहीं | सुख सम्पति नाना बिधि पावहिं ||

In English:-

       Je Sakam Nar Sunahi Je Gavanhi | Sukh Sampati Nana Bidhi Pavanhi ||


This mantra From Ramcharitmanas and very useful for getting success in the business. Everyone use this mantra for getting  wealthy and become famous in business or any field, you can try rhe power of this mantra and belief in mantra and god.

यह चौपाई (मंत्र) रामचरितमानस से ली गयी है, और इसमें तुलसीदास जी ने कहा है कि जो कोई भी सकाम भक्त भगवन नाम का स्मरण करता है या श्रवण करता है | और अपने आप को भगवान को अर्पित करके सदैव उन्ही प्रभु के सचिदानंद सवरूप का ध्यान करता रहता है, और श्री प्रभु को भजता रहता है या जो सच्चे मन से श्री राम की शरण में रहते हुए, उन्ही मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम का ध्यान करेगा उस सकाम भक्त को सब प्रकार की सिद्धि व सुख 
सम्पति प्राप्त होती है |

मंत्र का उपयोग:- इस मंत्र को मंगलवार या शनिवार को पूर्व या उत्तर में मुख करके जाप करना चाहिए या सिद्ध कर लेना चाहिए | और भगवान राम में पूर्ण आस्था रखते हुए अगर कोई भक्त इस मंत्र का जाप करता है तो इससे वह प्रसिद्धि पाता है और वह सुखी होने के साथ साथ अपार धन सम्पदा का मालिक बन जाता है, ऐसा तुलसीदास जी ने कहा है की जो कोई भी प्रभु को पूर्ण श्रद्धा के साथ स्मरण करते है, वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त होकर परम आनंद की प्राप्ति करता है |

Thursday, 7 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Getting Marriage

Powerful Mantra For Marriage
                                   
Mantra:-
Tab Janak Pay Vasishth Aaysu Byah Saj Sanvary Ke |
Mandavi Shrutkirti Urmila Kunary layi hunkari ke ||
                                

तब जनक पाई वसिष्ठ आयसु ब्याह साज सँवारी के |
मांडवी श्रुतकीर्ति उर्मिला कुंअरी लई हंकारी के ||


तथा 

जब  ते  राम  ब्याह  घर  आये  |
नित  नव  मंगल  मोद  बधाये  || 

यह चौपाइयां गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस से अनुग्रहित है और आप विवाह के लिए दिए  गए दोनों मंत्रो में से किसी भी मंत्र का जप करेंगे तो भी फल वही मिलेगा और इन मंत्रों का प्रत्येक रोज कम से कम 21 बार जाप अवश्य करें अर्थात आपकी मनोकामना अवश्य ही पूर्ण होगी |

तथापि आप इसका  निरंतर श्री राम का ध्यान करते हुए जप करते रहे जब तक की आपका मनोरथ सिद्ध न हो जावे | और अगर विवाह होने में कोई बाधा या व्यवधान आता है तो भी इस मंत्र के जाप से उसका समाधान हो जाता है |
 ( शेष प्रभुकृपा ) 

beejakshara mantra Navadha Bhakti In RamcharitManas

श्री रामचरितमानस में नवधा-भक्ति 

प्रथम भक्ति संतन सत्संगा | 
दूसर मम रति कथा प्रसंगा ||

गुरु पद पंकज सेवा, तीसरी भक्ति अमान |
चौथी भक्ति मम गुन गन, करहीं कपट तजि गान ||

मंत्र जाप मम दृढ विश्वासा |
पंचम भजन सो वेद प्रकाश ||
छठ दम शील विरति बहु करमा |
निरत निरंतर सज्जन धरमा ||

सातवँ सम मोहिमय जग देखा |
मोते संत अधिक करि लेखा ||

आठवं यथा लाभ संतोषा |
सपनेहुँ नहीं देखई पर दोषा ||

नवम सरल सब सन छल हीना |
मम भरोस हियँ हरष न दीना ||

नवम हूँ एकउ जिनके होई |
नारी पुरुष सचराचर कोई ||

सोई अतिसय प्रिय भामिनी मोरे |
सकल प्रकार भगति दृढ तोरे ||
                            
                                                                  (रामचरितमानस, अरण्यकाण्ड)

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस में भी नवधा भक्ति का उल्लेख हुआ है | इसमें अरण्यकाण्ड में प्रभु श्री राम ने शबरी के प्रति भक्ति के इन नौ अंगों अर्थात नवधा भक्ति का उल्लेख किया है | इस प्रकार दी गई नवधा भक्ति का विधिपूर्वक अनुष्ठान और हवन करने से मनुष्य को परमपद की प्राप्ति होती है, और सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है |

Wednesday, 6 November 2013

beejakshara mantra Mantra For Getting Job Soon

जीविका (रोजगार) प्राप्ति के लिए मंत्र

तुलसीदासजी कृत रामचरितमानस में जो दोहों और चौपाइयों का संगम है वह अद्वितीय है, इसमें कोई संशय नहीं है तथा रामचरितमानस की प्रत्येक चौपाई और दोहा अपने आप में एक पूर्ण मंत्र है और प्रयोगात्मक है | परन्तु हम जीविका या रोजगार की प्राप्ति कि बात करते है तो रामचरित मानस में यह निचे लिखा मंत्र (चौपाई) अति उत्तम है और इसके श्रृद्धा पूर्वक श्रीराम दरबार के सम्मुख जाप करने से मंत्र जाप करने से मर्यादा पुरषोत्तम श्री रामचंद्र प्रभु कि कृपा होती है और निसंदेह रोजगार की प्राप्ति होती है |

यह मंत्र इस प्रकार है:-



In Hindi:-                 

विश्व भरण पोषण कर जोई |  ताकर नाम भरत अस होई ||
In English:-

                                  Vishwa Bharan Poshan Kar Joi | Takar Naam Bharat As Hoi ||


This mantra is from Ramcharit-Manas and is very useful for getting job earlier as possible. but you have to jaap this mantra regularly at-least 21 days or you can continue till you have to success in your wish and will feeling the power of this mantra..

मंत्र जाप विधि :- मंत्र जाप करने से पूर्व आपको शुद्ध आसन पर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुह करके बैठना चाहिए और मंत्र का अर्थपूर्ण संकल्प करना चाहिए तथा भगवान श्री राम के समक्ष अपनी सकाम मनोकामना को प्रकट करे तथा उन्हें नमन करते हुए श्रृद्धा-पूर्वक मंत्र जाप आरम्भ करे | मंत्र जाप पूर्ण ध्यान और एकाग्रता से करना चहिये क्योकि मंत्र में उच्चारण की त्रुटि होने पर मंत्र का पूर्ण प्रभाव नहीं होता है इसलिए मंत्र को आराम से धीरे-धीरे जाप करना श्रेयकर है | जापक को चाहिए की वह एक माला अर्थात 108 बार इस मंत्र का संध्याकाल (प्रात: और सांय) में जाप करे अथवा इस मंत्र का रोज कम से कम 21 बार जप करना चाहिए या इस मंत्र को सिद्ध कर लेना चाहिए जिससे की आपको इस सात्विक मंत्र का त्वरित और प्रभावकारी फल मिले | और मंत्र का स्मरण तथा जप करते समय भगवान राम का ध्यान करते रहने से आपकी मनोकामना जल्दी ही पूरी होती है |

Click Here To Play or Watch the Video of This Mantra


Monday, 4 November 2013

beejakshara mantra How to Make Enemies Friends

Mantra to makes enemies as good friend 

रामचरितमानस में दिए गए इस मंत्र से बड़ा से बड़ा दुश्मन भी दोस्त की तरह व्यव्हार करने लगता है | मंत्र की चर्चा करने से पहले हम मित्र और शत्रु में जो भेद है उस पर चर्चा करेंगे | मित्र और शत्रु में जो असमानताएं होती है वह ये है कि मित्र हमेशा भला चाहता है, जबकि शत्रु यह चाहता है कि उसका शत्रु का नाश हो जाये |

और अधिकतर लोग इसे पढ़ने के बाद यही सोचेंगे की शत्रु को मित्र बनाने का क्या प्रयोजन? या शत्रु  को मित्र बनाने से क्या लाभ होगा? परन्तु मैं आपको बताता हूँ कि इसका क्या प्रयोजन है और यह क्यों आवश्यक है |

Shree Ram
कई बार हमारे जीवन काल में ऐसी परिस्थितियाँ आ जाती है जिससे हमें लगता है कि फलां पुरुष या आदमी मेरा शत्रु है और हमें इसके संपर्क में नहीं रहना चाहिए, पर हो सकता है कि वह आपकी दिमागी धारणाएं हो ! कहने का तात्पर्य यह है कि मनुष्य स्वयं विधाता तो नहीं है, और इसका क्या प्रमाण है कि जो वो सोच रहा हो वह शत प्रतिशत सही हो | अर्थात जो मनुष्य आपको शत्रु नजर आ रहा हो, वास्तव में वह आपका शत्रु न होकर किसी ओर के मायाजाल से प्रकट किया हुआ जाल हो ताकि आप बहकावे में आकार उस सज्जन और भले आदमी का संग छोड़ दे जिससे कि आपका अनर्थ चाहने वाले लोगो को मौके मिल जाये | 

मैं यह नहीं कहता कि आप जो सोचते है वह गलत है या बुद्धिहीनता है और मनुष्य की सोच सही या गलत में पहचान नहीं कर सकती, मेरा यह मत बिलकुल भी नहीं है | पर किसी को आरोपित करने से पहले अपने निर्णय पर गहनता से चिंतन अवश्य करना चाहिए और किसी कि भी बातों मैं आकार अपना निर्णय लेना बुद्धिमानी नहीं है, अत: सर्वदा अपना निर्णय स्वयं लेवें तथा सोच समझकर निर्णय लेने से ही पहचान होती है कि कौन अपना है और कौन पराया |

रामचरितमानस के इस मंत्र का उपयोग शत्रु को मित्र बनाने के लिए किया जाता है | यह मंत्र किसी भी प्रकार के शत्रु को मित्र बनाने का सामर्थ्य रखता है | यहाँ किसी भी प्रकार के शत्रु से तात्पर्य है कि, चाहे समक्ष रहने वाला शत्रु हो या छद्मवेश में रहने वाला शत्रु, सभी शत्रुओं को आपका मित्र बना देता है | यह मंत्र इस प्रकार से है:-

Mantra:-
             
Garal Sudha Ripu Karhi Mitayi |
Gopad Sindhu Anal Sitlayi ||

 गरल  सुधा रिपु करहिं मिताई | 
गौपद  सिन्धु  अनल सितलाई ||

भावार्थ:- यह मंत्र रामचरित मानस में सुन्दरकाण्ड से लिया गया है जिसमे हनुमान जी श्री राम प्रभु का नाम लेकर लंका नगरी में प्रवेश कर रहे है और मन ही मन में प्रभु श्री राम का बारम्बार स्मरण कर रहे है | तथा   इस शुभ अवसर पर भगवान शिव माता पार्वती से कहते है कि श्री राम के नाम से संसार के सारे कार्य सुगम हो जाते है और ऐसा कोई कार्य नहीं है जो प्रभु की कृपा से नहीं हो पावे | और कहते है कि "गरल सुधा रिपु करही मिताई" अर्थात जहर और अमृत आपस में बैरी होने पर भी प्रभु के प्रताप से मित्र बन सकते है, सागर भी गाय के पैर जितना हो सकता है, तथा अग्नि शीतल हो जाती है | यह सब सिर्फ श्री राम जी की कृपा से ही हो सकता है |

मंत्र जाप विधि:- जिन भक्तो को शत्रु सम्बंधित समस्याए है उनको प्रत्येक दिन इस 108 बार मंत्र का जाप करना चाहिए तथा तुलसीदास जी की इस चौपाई (मंत्र ) का निरंतर जप व् ध्यान करने से आपके शत्रु (Enemy) भी आपके मित्र बन जाते है | और रामचरितमानस के अनुसार अगर सच्ची श्रृद्धा व् विश्वास के साथ श्री राम व हनुमान का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जप किया जाये तो आपके जीवन में कभी किसी प्रकार की बाधा नही आ सकती है ! इस मंत्र को रोज कम से कम 15 से 20 बार तो अवश्य ही जपना चाहिए | मंत्र का फल त्वरित प्रभाव से पाने के लिए मंत्र को सिद्ध करना श्रेष्ठ माना गया है, मंत्र को हवन काके सिद्ध करने से मंत्र का प्रभाव शीघ्रता से होता है |

मंत्र को सिद्ध करने का विधान

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