Showing posts with label Hanuman Mantras. Show all posts
Showing posts with label Hanuman Mantras. Show all posts

Saturday, 30 November 2013

beejakshara mantra How to Make Happy Lord Hanuman

हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए

इस कलियुग के अग्रणी देवों में हनुमान जी का नाम सर्वप्रथम आता है, तथा इन्हें कौन नहीं जानता | श्री रामभक्त के रूप में तीनों लोकों में विख्यात हनुमान जी अद्भुत बुद्धि, शक्ति और दया के धनी है | हनुमान जी के बारे में धारणा यह है कि जहाँ भी उनके प्रभु श्री राम का कीर्तन या नाम का गुणगान होता है, वहाँ ये रामदूत अवश्य उपस्थित होते है | इनको राम नाम अत्यंत प्रिय है | अतएव इनके भक्तों को चाहिए कि वें हनुमान जी को प्रसन्न करने हेतु श्री राम नाम का सहारा लेकर पवनपुत्र कि स्तुति करें |



स्तुति मंत्र इस प्रकार है :-

In Hindi:-
सुमिरि पवनसुत पावन नामू |
 अपने बस करि राखे रामू ||

In English:-
Sumiri Pavansut Pavan Naamu |
 Apne Bas Kari Rakhe Raamu || 

इस चौपाई का ध्यान करते हुए हनुमान जी का स्मरण करना चाहिए, हनुमान जी श्री राम के परम भक्त थे, इसलिए कहा गया है कि हे ! मारुति जो पवनसुत के इस पावन नाम से भी जाने जाते हो, और श्री राम को आपने अपने प्रेम और अगाध भक्ति से अपने वश में कर रखा है,
तथा इस मंत्र को भी स्मरण करें |

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं 
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ||

श्री रामचरितमानस में भगवान राम ने अपने अनुज भरत से यह कहा था कि " भरत भाई, कपि से उऋण हम नाहीं " अर्थात श्री भगवान ने भी हनुमान जी कि स्वामी भक्ति देखकर कहा कि हम हनुमान का ऋण कभी भी नहीं चुका सकते है, और यह दी गई चौपाई भी रामचरितमानस से है, और इसका ध्यान व चिंतन करने से हनुमानजी प्रसन्न होते है |                                                

Tuesday, 26 November 2013

beejakshara mantra Hanuman Gayatri Mantra

हनुमान गायत्री मंत्र

Bajarang Bali Hanuman
हनुमान गायत्री महिमा

गायत्री मंत्र को जाप करने वाले और सात्विक मन्त्रों में श्रेष्ठ माना गया है | और माता भगवती कि कृपानुसार गायत्री मंत्र को विभिन्न वर्गों में भिभाजित किया गया है तथा यज्ञ और हवन में इन मंत्रो की आहुति को अत्यधिक महत्व दिया जाता है और शुभ माना जाता है | 

किसी भी यज्ञ या हवन के शुरुआत में सभी गायत्री मंत्रो की आहुति को अति उत्तम माना जाता है |

गायत्री के मंत्रो को कई देवताओं के श्रेणी में रखते हुए हर देव का गायत्री मंत्र और मूल मंत्र बनाया गया है जो अति प्रभावशाली है |
नीचे दिया हुआ मंत्र हनुमान गायत्री मंत्र कहलाता है,  इस मंत्र के जाप से हनुमान जी प्रसन्न होते है और भक्तों की उन पर कृपा होती है | मंत्र निम्न प्रकार से है:- 

In Hindi:-


ओम् आंजनेयाय विद्मिहे वायुपुत्राय धीमहि |
तन्नो: हनुमान: प्रचोदयात ||1||

ओम् रामदूताय विद्मिहे कपिराजाय धीमहि |
तन्नो: मारुति: प्रचोदयात ||2||

ओम् अन्जनिसुताय विद्मिहे महाबलाय धीमहि |
तन्नो: मारुति: प्रचोदयात ||3||

ओम् ह्रीं ह्रीं हूँ हौं हृ: 
इति मूल मंत्र |

In English:-


Ohm Aanjeyay Vidmahe Vayuputray Dhimahi |
Tanno: Hanuman: Prachodayat ||1||

Ohm Ramdutay Vidmahe Kapirajay Dhimahi |
Tanno: Maruti: Prachodayat ||2|| 

Ohm Anjanisutay Vidmahe Mahabalaay Dhimahi |
Tanno: Maruti: Prachodayat ||3|| 

Ohm Hrim Hrim  Hum Houm Hri:
Iti Mul Mantra |

हनुमानजी के भक्तों को इस हनुमत गायत्री मंत्र का जाप अवश्य कारण चाहिए तथा साथ में हनुमत मूल मंत्र का जाप भी श्रेष्ठ होता है | इस मंत्र का ध्यान व स्मरण करने मात्र से ही हनुमानजी प्रसन्न होते है व भक्तों के संकट और पीड़ा को हर लेते है |

जाप विधि:- प्रत्येक मंत्र को जपने और स्मरण करने का विधान होता है, और भक्तो को चाहिए कि वे विधि पूर्वक ही प्रत्येक मंत्र का जाप करे | इस हनुमान गायत्री मंत्र को मंगलवार या शनिवार के दिन प्रातकाल शुद्ध होकर आसन पर पूर्वदिशाभिमुख होकर विराजमान होकर मंत्र का जाप आरम्भ करना चहिये | इस प्रकार हनुमान जी का स्मरण करते हुए कम से कम 108 बार मंत्र जाप करे | भक्त चाहे तो मंत्र को हवन या यज्ञ विधि से सिद्ध भी कर सकते है |

Click To Watch the video of "Hanuman Gayatri"

Friday, 22 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Success in Court Case

मुक़दमा जीतने के लिए


श्री रामभक्त हनुमान जी के लिए इस संसार में कोई भी कार्य दुष्कर नहीं है | भक्तशिरोमणि हनुमान जी की कृपा होने पर उनके भक्तों के भी सभी कार्य उतनी ही सुगमता से हो  जाते हैं जैसे हनुमान जी प्रभु श्री राम के कार्य को करते हैं |


तुलसीदास जी ने हनुमान जी का बड़ा सुन्दर वर्णन किया है :-

विद्यावान गुणी अति चातुर, 
राम काज करिबे को आतुर |

तथा 

दुर्गम काज जगत के जेते,
 सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते |

Hanuman Ji
अतएव जो कोई भी भक्त श्रृद्धा सहित श्री राम और हनुमान जी की वंदना करता है और नीचे दिए गए मंत्र का विधिपूर्वक जप करता है तो सभी प्रकार के मुकदमो और प्रतिष्टा पतन करने वाले जूठे दावों का तुरंत ही निराकरण होता है | 
मंत्र इस प्रकार है:-

In Hindi:-

 पवन तनय बल पवन समाना |
बुधि बिबेक बिग्यान निधाना || 

 In English:-

 Pavan Tanay Bal Pavan Samana |
Budhi Bibek Bigyan Nidhana ||


मंत्र जाप विधि :- इस मंत्र को मंगलवार या शनिवार को पूर्व या उत्तर में मुख करके जाप करना चाहिए या मंत्र सिद्ध कर लेना चाहिए | और भगवान राम में पूर्ण आस्था रखते हुए अगर कोई भक्त इस मंत्र का जाप करता है तो इससे वह सभी प्रकार कि आपदाओं से मुक्त हो जाता है | और सभी प्रकार के मुकदमों में विजयश्री हासिल करता है | तभी तो प्रभु के लिए कहा जाता है :-

कवन सो काज कठिन जग माही, 
जो नहीं होई तात तुम्ह पाई |

Click Play To Watch The Video of This Mantra

Thursday, 21 November 2013

beejakshara mantra Mantra For Successful Visit

यात्रा की सफलता के लिए

अगर आप कहीं यात्रा पर जा रहे हो, तो यात्रा कि सफलता हेतु आपको नीचे दिए गए इस मंत्र का जाप कर यात्रा आरम्भ करनी चाहिए, आप निश्चित रूप से मनवांछित कार्य में सफल होंगे |

इस मंत्र का जाप करते समय श्री रामदरबार का ध्यान करते हुए श्रृद्धा भाव से परिपूर्ण होकर एकाग्र भाव से ध्यान करें |

In Hindi:-

 प्रबिसि नगर कीजै सब काजा |
ह्रदय राखी कोसलपुर राजा ||

 In English:-

 Prabisi Nagar Kijai Sab Kaja |
Hriday Rakhi Kosalpur Raja || 

 भावार्थ:- यह मंत्र रामचरितमानस से लिया गया है, और इस मंत्र को मानस के सिद्ध मन्त्रों की श्रेणी में रखा गया है | यह मंत्र सुन्दरकांड के हनुमान जी के लंका में प्रवेश करने के सन्दर्भ में आता है, उस समय हनुमानजी ने भगवान श्रीराम का स्मरण करते हुए कहा कि " हे कोसलाधीस रघुवर में आपके निमित्त होकर नगर में प्रवेश कर रहा हूँ, मेरे सारे काज(कार्य) सिद्ध करना " अर्थात जो कोई भक्त प्रभु श्रीराम का स्मरण कर इस मंत्र को जपता हुआ यात्रा प्रारभ करता है, वह अवश्य ही उस यात्रा में सफल होता है |

 ( जय श्रीराम )

Tuesday, 19 November 2013

beejakshara mantra Hanuman Vandana (Hanuman Stuti)

  !! हनुमान वंदना !!

Lord Hanuman
मनोजवं मारुततुल्यवेगं, 
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् |
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं, 
श्री रामदूतं शरणं प्रपद्ये ||1||

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं,
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् |
सकलगुणनिधानंवानरणामधीशं, 
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि: ||2||

यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं,
तत्र तत्र कृतमस्तकांजलिम् |
वाष्पवारिपरिपूर्णलोचनं,
मारुतिम् नमत राक्षसान्तकम ||3||


भावार्थ:-मन के समान वेग वाले, मारुत(पवन) के समान गति वाले, जितेन्द्रियं अर्थात जिसने अपनी इन्द्रियों को जीता हुआ हो (इन्द्रियों को वश में कर लिया हो), बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, वायुदेव के पुत्र, वानरों के दलनायक, और श्रीराम के दूत हनुमानजी को मैं प्रणाम करता हूँ | और उनकी शरण में जाता हूँ ||१||

अतुल्य अर्थात अतुलित बल के धनी, हिम की चट्टान के जैसी देह (शरीर) वाले, दानवों को नष्ट करने वाले, ज्ञानियों में अग्रणी, सकल गुणों से युक्त वानरों के शिरोमणि, रघुपति श्री रामचंद्र के प्रिय भक्त श्री हनुमानजी को मैं प्रणाम (नमन) करता हूँ ||२||

जहाँ जहाँ श्रीरघुनाथ (श्री राम) का कीर्तन या कथा होती है वहाँ वहाँ आप का निवास होता है, और राक्षसों का अंत करने वाले भगवन मारुतिनंदन को मै बारम्बार प्रणाम करता हूँ ||३||

Click Here to watch the video of "Hanuman-Vandana" 

Friday, 15 November 2013

beejakshara mantra Mantra To Destroy Crisis & Difficulties

संकट की स्थिति में निवारण हेतु

Lord Hanuman
हनुमान जी को संकट या विपदा में सर्वप्रथम याद किया जाता है, क्योकि इन्हीं कि कृपा से संकट पल भर में दूर हो सकता है, ऐसा तुलसीदास जी ने कहा था कि :-

संकट ते हनुमान छुडावे |
मन क्रम वचन ध्यान जो लावे | |

और 

संकट कटे मिटे सब पीरा |
जो सुमिरे हनुमत बलबीरा ||

अत: संकट के समय हनुमान जी का श्रृद्धा सहित ध्यान कर इन मन्त्रों का जाप करने से सभी प्रकार कि बाधाओं का निराकरण होता है |

मंत्र इस प्रकार से है :-



In Hindi:-

दीन दयाल बिरद संभारी | हरहु नाथ मम संकट भारी ||

In English:-

Deen Dayal Birad Sanbhari | Harhu nath Mam Sankat Bhari ||


अर्थात :- यह मंत्र गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महाग्रंथ रामचरितमानस से उदृत है और यह मंत्र माता सीता से हनुमान भेंट प्रसंग में आता है |

जिस समय हनुमान जी माता सीता से वापस जाने की आज्ञा लेते है तब माता सीता उनसे कहती है कि – हे ! रामदूत हनुमान, आप जाकर अपने प्रभु श्रीराम से कहना कि, हे दीन दुखियों के पीड़ा को हरने वाले, आप तो सारे संसार की पीड़ा को हर कर उनका कल्याण करते हो, तो हे नाथ आज मुझ पर बहुत बड़ा कष्ट आन पड़ा है और मेरी इस पीड़ा को भी हर लो और मेरा भी कल्याण करो |

अत: यह मंत्र संकट की दशा में रामबाण का काम करता है | साधक को चाहिए की इस मंत्र को हनुमान और सीताराम (रामदरबार) की छवि का समरण करते हुए जप करे | ऐसा करने से आपके सभी संकटों का निवारण होगा |

Thursday, 14 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Freedom From Phantom Spirits and Peace

गृह शांति और मृत अथवा प्रेत आत्माओं से मुक्ति के लिए 

गृह शांति और प्रेतात्माओं से मुक्ति केवल प्रभु (परमात्मा) कि कृपा से ही संभव है, क्योकि वह परमपिता परमेश्वर है और सब कुछ जो भी घटित हो रहा होता है या होने वाला होता है वह प्रभु कि ही लीला है | अत: इस परेशानी का हल भी प्रभु के पास ही होता है | 


साधारणतया: कलियुग में हनुमान जी को अग्रणी देवता के रूप में पूजा जाता है और इस युग में प्रभु के वे एकमात्र भक्त है जो हमें कलियुग के मायाजाल से बचाते है, इसलिए अगर किसी को प्रेतात्माओं का भय सता रहा हो या प्रेत आत्माओं कि मुक्ति का उपाय करना हो तो हनुमान जी का स्मरण करना चाहिए |

अथवा हनुमान जी कि प्रतिमा को प्रतिष्ठित कर, आसान पर विराजित होकर पूर्वाभिमुख हो इस मंत्र का जाप करना चाहिए :-

Mantra in Hindi:-

भूत प्रेत निकट नहीं आवे | महावीर जब नाम सुनावे ||
संकट कटे मिटे सब पीरा | जो सुमिरे हनुमत बलबीरा ||
संकट ते हनुमान छुडावे | मन क्रम वचन ध्यान जो लावे || 
Mantra in English:-

Bhut Pret Nikat Nahi Aave | Mahaveer Jab Naam Sunave |
Sankat Kate Mite Sab Peera | Jo Sumire Hanumat Balbeera || 
Sankat Te Hanuman Chudave | Man Kram Vachan Dhyan Jo Laave ||

और हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करने वाले भक्त के कभी भी किसी भी प्रकार का संकट नहीं हो सकता है | 

तथा ग्रहशांति और मृतात्माओं से छुटकारा या मुक्ति का उपाय श्रीमद्भगवद्गीता भी है अत: साधकों को गीता का पाठ करना चाहिए जिनसे उनके संकटों का निवारण हो तथा उनका कल्याण हो | और गीता का एक मंत्र भी इस दृष्टि से अति प्रभाकारी माना गया है |  श्री कृष्ण भगवान ने गीता के एक श्लोक में दिया है, इसमें अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से संकट से मुक्ति का उपाय पूछा था तब भगवान ने कहा कि:-

In Hindi:-

कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः
पृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः |
यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे
शिष्येस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम् ||

In English:-

KarpanyaDoshopahat Svabhav:
Prichchhami Tvam DharmaSammoodacheta: |
Yachchhreya: Syannishchitam Bruhi Tanme
Shishyesteaham Shadhi Mam Tvam Prapannam ||

इस प्रकार इस मंत्र का जाप करने से भक्तों के सभी प्रकार के संकट दूर हो जाते है व गीता के पाठ करने के साथ साथ अगर इस मंत्र का जाप किया जाये तो उस मनुष्य का कल्याण हो जाता है |

Wednesday, 13 November 2013

beejakshara mantra Hanuman Mantra & Hanuman Stuti

हनुमान जी की स्तुति व आराधना करने के लिए

In Hindi:-

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरि सुधार |
बरनऊ रघुवर बिमल जसु, जो दायक फलि चार ||1||

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवनकुमार |
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु क्लेश विकार ||2||

प्रनवऊ पवन कुमार खल बल पावन ग्यानघन |
जासु ह्रदय आगार बसहिं राम सर चाप धर ||3||

महावीर विनवऊ हनुमाना | राम जासु जस आप बखाना ||4|| 

In English:-

Shri Guru Charan Saroj Raj, Nij Man Mukuri Sudhari |
Baranau Raghuvar Bimal Jasu, Jo Dayak Falu Chari ||1||

Biddhiheen Tanu Janike, Sumirou Pavankumar |
Bal Buddhi Vidya Dehu Mohi, Harahu Klesh Vikar ||2||

Pranau Pavankumar Khal Bal Paavan Gyanghan |
Jasu Hriday Aagar Basahin Ram Sar Chap Dhar ||3||

Mahaveer Vinavau Hanumana | Ram Jasu Jas Aap Bakhana ||4||

हनुमान जी की स्तुति और पाठ करने के लिए इन मन्त्रों का उपयोग करना चाहिए | ये सभी मंत्र रामचरित मानस से लिए गए है और इनमे गोस्मामी तुलसीदास जी ने हनुमान जी की महिमा और शक्ति का गुणगान किया है |

For any query or related information about mantras, you can comment from the comment box.

Friday, 8 November 2013

beejakshara mantra Hanuman Mantra for Strength & Power

मानसिक तथा आध्यात्मिक शक्तिदायक हनुमान मंत्र 

Lord Hanuman
सर्वप्रथम स्नानादि से निवृत होकर मंगलवार या शनिवार के दिन शुद्ध आसन पर विराजमान होकर श्री राम दरबार को सामने स्थापित कर श्री हनुमान जी का ध्यान करना चाहिए, ध्यान करने हेतु मंत्र दिया गया है:-

श्री हनुमान ध्यान मंत्र:-

उद्यन्मार्तण्ड कोटि प्रकटरूचियुतं चारूवीरासनस्थं।
मौंजीयज्ञोपवीतारूण रूचिर शिखा शोभितं कुंडलांकम्‌
भक्तानामिष्टदं तं प्रणतमुनिजनं वेदनाद प्रमोदं।
ध्यायेद्नित्यं विधेयं प्लवगकुलपति गोष्पदी भूतवारिम॥

भावार्थ:-उदय होते हुए करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी, मनोरम  वीर तथा आसन में स्थित मुंज की मेखला और यज्ञोपवीत धारण किए हुए कुंडली से शोभित मुनियों द्वारा बारम्बार वंदित, वेद नाद से प्रहर्षित वानरकुल स्वामी, समुद्र को एक पैर में लांघने वाले देवता स्वरूप, भक्तों को अभीष्ट फल देने वाले श्री रामभक्त हनुमान जी मेरी रक्षा करें।


इस प्रकार हनुमान जी का ध्यान कर लेने के पश्चात श्री राम दरबार का ध्यान मन में करते हुए पूर्ण श्रृद्धा तथा आस्था रखकर मंत्रो में विश्वास करते हुए श्रृद्धा सहित मंत्र का जाप आरम्भ करना चाहिए | मंत्र इस प्रकार है:-

In Hindi:-

ॐ ह्राँ ह्रीं ह्रैं हनुमते श्री रामदूताय नमो नमः
ॐ नमो भगवते आञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा ||

In English:-

Ohm Hram Hrim Hraim Hanumate Shree Ramdutay Namo Namah: 
Ohm Namo Bhagawate Aanjneyay Mahabalay Swaha ||

इस मंत्र का जाप कम से कम 108 बार अवश्य ही करना चाहिए तथा संभव हो सके तो प्रतिदिन संध्या कल में 21 बार इस मंत्र का जाप करने से मनुष्य कि सारी चिंताओ तथा पीडाओ को हनुमान जी हर लेते है तथा मानसिक तथा शरीरिक शांति प्रदान करते है |

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...