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Wednesday, 27 November 2013

beejakshara mantra God Agni Beej Mantra

अग्नि देव बीज मंत्र
Agni Dev
अग्नि हिन्दू धर्म में आग के देवता हैं । वो सभी देवताओं के लिये यज्ञ-वस्तु भरण करने का माध्यम माने जाते हैं | इसलिये उनकी उपाधि भारत है । वैदिक काल में अग्नि सबसे ऊँचे देवों में से एक मने जाते है । और जितने भी हिन्दू यज्ञ, हवन और विवाह होते है उसमें अग्नि द्वारा ही देवताओं की पूजा की जाती है ।



In Hindi:-

ॐ अग्नये स्वाहा ।
इदं अग्नये इदं न मम॥

In English:-

Ohm Agnaye Swaha |
Idam Agnaye Idam Na Mam ||

अत: हिंदू धर्म के अनुसार यज्ञ हवं आदि करने से पहले अग्नि देव कि पूजा की जाती है | और इस मंत्र के द्वारा अग्नि देव की पूजा करनी चाहिए |

beejakshara mantra Shree Agni Gayatri Mantra

श्री अग्नि गायत्री मंत्र

श्री अग्नि देव को वेदों में आग अर्थात तेज का देवता माना गया है, और सभी यज्ञादि कार्यों को अग्नि देव के सहायतार्थ ही संपन्न किया जाता है | पुरानों में यह भी मान्यता है कि आप यज्ञ और हवं में जो कुछ भी अग्नि में अर्पित करते है वह सभी देवताओं तथा पितरों को प्राप्त हो जाता है |


Agni Dev
पुराणों के अनुसार अग्नि देव के दो सिर है तथा पत्नी का नाम स्वाहा, उनका वाहन मेंढा (भेड़) है, और ऋग्वेद के अनुसार इनको इन्द्रा और वरुण देवता के समतुल्य माना और पूजा जाता है |

अत: अग्नि देव गायत्री मंत्र इस प्रकार है :-

In Hindi:-

ऊँ महाज्वालाय विद्महे अग्नि मध्याय धीमहि |
तन्नो: अग्नि प्रचोदयात ||

In English:-

Ohm Mahajwalay Vidmahe Agni Madhyay Dhimhi |
Tanoo: Agni Prachodayat ||

इस अग्नि गायत्री मंत्र का जप करने से मन और तन में तेजस्विता (तेज) आता है | तथा अग्नि और उष्णता सम्बन्धी कष्टों का निवारण होता है |

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