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Wednesday, 20 November 2013

beejakshara mantra Shri Vishnu Stuti (Vishnu Vandana)

!! भगवान श्रीविष्णु वंदना(स्तुति) !!

Shree Vishnu
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं

विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभांगम् |
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वंदे विष्णु भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ||


भावार्थ:- शांत आकार वाले, शेषनाग के ऊपर शयन करने वाले, नाभि में कमल धारण करने वाले, देवों के देव, विश्व के आधार, आकाश के समान लगने वाले, बादलों के जैसे रंग वाले, सुन्दर अंगों वाले, लक्ष्मीजी के स्वामी व कमल के सामान सुन्दर नयनों वाले और ज्ञान द्वारा योगियों को प्राप्त होने वाले, संसार के सभी प्रकार के भयों को हरने वाले, तीनों लोकों के स्वामी भगवान श्रीविष्णु को में प्रणाम करता हूँ |

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Tuesday, 19 November 2013

beejakshara mantra Hanuman Vandana (Hanuman Stuti)

  !! हनुमान वंदना !!

Lord Hanuman
मनोजवं मारुततुल्यवेगं, 
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् |
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं, 
श्री रामदूतं शरणं प्रपद्ये ||1||

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं,
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् |
सकलगुणनिधानंवानरणामधीशं, 
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि: ||2||

यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं,
तत्र तत्र कृतमस्तकांजलिम् |
वाष्पवारिपरिपूर्णलोचनं,
मारुतिम् नमत राक्षसान्तकम ||3||


भावार्थ:-मन के समान वेग वाले, मारुत(पवन) के समान गति वाले, जितेन्द्रियं अर्थात जिसने अपनी इन्द्रियों को जीता हुआ हो (इन्द्रियों को वश में कर लिया हो), बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, वायुदेव के पुत्र, वानरों के दलनायक, और श्रीराम के दूत हनुमानजी को मैं प्रणाम करता हूँ | और उनकी शरण में जाता हूँ ||१||

अतुल्य अर्थात अतुलित बल के धनी, हिम की चट्टान के जैसी देह (शरीर) वाले, दानवों को नष्ट करने वाले, ज्ञानियों में अग्रणी, सकल गुणों से युक्त वानरों के शिरोमणि, रघुपति श्री रामचंद्र के प्रिय भक्त श्री हनुमानजी को मैं प्रणाम (नमन) करता हूँ ||२||

जहाँ जहाँ श्रीरघुनाथ (श्री राम) का कीर्तन या कथा होती है वहाँ वहाँ आप का निवास होता है, और राक्षसों का अंत करने वाले भगवन मारुतिनंदन को मै बारम्बार प्रणाम करता हूँ ||३||

Click Here to watch the video of "Hanuman-Vandana" 

Sunday, 17 November 2013

beejakshara mantra Praise, Meditation And Worship Of Gayatri Mantra

गायत्री महामंत्र की स्तुति, ध्यान तथा वंदना

ओम् भूर्भुव: स्वः तत्स वितुर्वरेर्ण्यं !
भर्गो देवस्य धीमहि धियो: योनः प्रचोदयात !!

हमारे वेदों, पुराणों और शास्त्रों में कई तरह के मन्त्र होते है,  और देवताओं की स्तुति के लिए अलग मंत्र होते है तथा ध्यान के लिए अलग तथा वंदना के अलग स्त्रोत्र होते है |

परन्तु जप करने लायक इस गायत्री मन्त्र  के लिए ऐसा विधान नहीं है, गायत्री मंत्र में जप, ध्यान, स्तुति और वंदना करने के लिए एक ही मंत्र का प्रयोग किया जाता है अर्थात गायत्री मन्त्र अपने आप में ही पूर्ण महामंत्र है और इस महामंत्र कि स्तुति, ध्यान और वंदना इस प्रकार है:-

स्तुति:-  "ओम् भूर्भुव: स्वः"

इस मंत्र छंद से उस परमात्मा कि स्तुति की जाती है जो तीनो लोकों में व्याप्त है अर्थात जो अपने प्रकाशमान रूप से इस चराचर जगत में स्थित है और अपने तेज से इन तीनो लोकों को प्रकाशित करते है |

ध्यान:-  "तत्स वितुर्वरेर्ण्यं भर्गो देवस्य धीमहि"


इस छंद में पाप का विनाश करने वाली माँ भगवती का शांत मन से चिंतन एवं ध्यान का वर्णन किया गया है |

प्रार्थना:- "धियो: योनः प्रचोदयात"

इस छंद से मंत्र कि शक्ति के द्वारा बुद्धि एवं विवेक को सही दिशा में ले जाने और मोक्ष प्राप्ति की कामना कि गयी है | इस प्रकार से मानव जीवन को सार्थक एवं सफल बनाने के लिए यह महामंत्र है और इस सिद्ध मंत्र का जाप निश्चित रूप से फलदायी होता है ऐसा मेरा मत है |

(श्री गायत्री नमः)

Tuesday, 12 November 2013

beejakshara mantra Shree Ganesh Vandana (Shree Ganapati Stuti)

!! गणपति वंदना (मंत्र) !!

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय, 
लम्बोदराय सकलाय जगद्विताय |
गजाननाय श्रुतियज्ञविभुषिताय
गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते ||1||

In English :- 

Vighneshvaray Varday Surpriyay 
Lambodar Sakalaay Jagdvitaay |
Gajaanan Shrutiyagyavibhushitaay
Gourisutaay Gannath Namon Namste ||1||

वक्रतुण्ड महाकाय: सूर्यकोटि समप्रभ: |
निर्विघ्नं कुरु मे देवो सर्वकार्येषु सर्वदा ||2||

In English :- 

Vakratund Mahakaay: Suryakoti Samprabh: |
Nirvighna Kuru Me Devo Sarvakaryeshu Sarvada ||2||


Ganesha
भगवन श्रीगणपति की स्तुतियाँ या मंत्र सभी को विघ्न विनाशक की दृष्टि से देखा जाता है और भगवान गणेश भी विघ्नेश, विघ्नविनाशक, गजानन, लम्बोदर आदि नामों से जाना जाता है | इन स्तुतियों या मंत्रो का जाप करने वाले भक्त के सारे विघ्न या संकट का निराकरण हो कटा है इसमें कोई संशय नहीं है |


भगवान श्री गणेश को प्रथम पूजनीय देवता भी मानते है इसलिए जब भी कोई नया कार्य या व्यापार का शुभारंभ करना हो तो भगवन गणेश की पूजा अर्चना दिए गए मंत्र “ वक्रतुंड महाकाय...” से करना चाहिए, और श्री भगवान को स्मरण करते हुए ही नया काम प्रारम्भ करना चाहिए | 

आपने अपने रोजमर्रा के जीवन में कई बार सुना होगा कि “श्रीगणेश करना” जिसका अर्थ होता है कि कोई नया कार्य प्रारम्भ करना और इन मंत्रो को उच्चारित करने या स्मरण करने का विधान होता है, संपूर्ण विधि विधान बिना मंत्र का प्रभाव व्यर्थ रह जाता है | 

इसलिए सभी को चाहिए की आत्म और शरीर शुद्धि बिना मन्त्रों का उच्चारण नहीं करना चाहिए, भगवान गजानन के इन मन्त्रों का रोज ध्यान या जप करने वाले के कभी विपत्ति या पारिवारिक क्लेश नहीं होता है |

(श्रीगणेशाय नमः)

Monday, 11 November 2013

beejakshara mantra Vedant Dashashloki (Nimbark Aaradhana)

सुदर्शनचक्रावतार आद्याचार्य जगदगुरु श्रीभगवन निम्बार्काचार्य प्रणीत


!! वेदान्तदशश्लोकी !!

    COMPOSED BY SHRI SUDARSHAN CHAKRAVATAR SHRI NIMBARKACHARYA

ज्ञानस्वरूपञ्च हरेरधीनं शरीरसंयोगवियोगयोग्यम् |
अणुम् हि जीवं प्रतिदेहभिन्नं ज्ञातृत्ववन्तं यदनन्तमाहु: ||१||

आनादिमायापरियुक्तरूपं त्वेनं विदुर्वै भगवत्प्रसादात् |
मुक्तन्च बद्धं किल बद्धमुक्तं प्रभेदबाहुल्यमथापि बोध्यम् ||२||


अप्राकृतं प्राकृतरुपकञ्चं कालस्वरूपं तदचेतनं मतम् |
मायाप्रधानादिपदप्रवाच्यं शुक्लादिभेदाश्च समे-अपि तत्र ||३||

स्वभावतोअपास्तसमस्तदोष—मशेषकल्याणगुनैकराशिम् |
व्युहाङ्गिनम् ब्रह्म परं वरेण्यं ध्यायेम कृष्णं कमलक्षेणम् हरिम् ||४||

अङ्गे तु वामे वृषभानुजां मुदा विराजमानामनुरूपसौभगाम् |
सखिसहस्त्रै: परिसेवितां सदा स्मरेम देवीं सकलेष्टकामदाम् ||५||

उपासनीयं नितरां जनैः सदा प्रहाण्येअज्ञानतमोअनुवृत्ते: |
सनन्दनाद्यैर्मुनिभिस्तथोक्तं श्रीनारदयाखिलतत्वसाक्षिणे ||६||
   
सर्वं हि विज्ञानमतो यथार्थकंश्रुतिस्मृतिभ्यो निखिलस्य वस्तुनः |
ब्रह्मात्मकत्वादिति वेदविन्मतं त्रिरुपताअपि श्रुतिसुत्रसाधिता ||७||

नान्या गतिः कृष्ण पदारविन्दात संदृश्यते ब्रह्मशिवादिवन्दितात |
भक्तेच्छयोपात्तसुचिन्त्यविग्रहा-चिन्त्यशक्तेरविचिन्त्यसाशयात ||८||

कृपास्य दैन्यदियुजि प्रजायते यया भवेत्प्रेमविशेषलक्षणा |
भक्तिर्हानन्याधिपतेर्महात्मन: सा चोत्तमा साधनरूपिकापरा ||९||

उपास्य रूपं तादुपासकस्य च कृपाफलं भक्तिरसस्ततः परम् |
विरोधिनो रुपमथैतदाप्ते  ज्ञेर्या इमेअर्था अपि पञ्चसाधुभिः ||१०||

beejakshara mantra Saraswati Mantra (Saraswati Vandana)

!! सरस्वती मन्त्र !! 

In Hindi:-
Goddess Sarsawati
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता 
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना |
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता 
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ||

In English:-

Yaa Kundentutusharhardhavala Yaa Shubhravastravruta |
Yaa Veenavardandmanditakara Yaa Shvetpadmasanaa 
Yaa Brahmachyutshankarprabhritibhirdeve: Sada Vandita 
Sa Mam Patu Saraswati Bhagawati Ni:sheshajadyapha ||

अर्थात हे देवी, कुंद पुष्प जैसी, चंद्र जैसी और बर्फ जैसी सफ़ेद बूंदों कि माला वाली, सफ़ेद वस्त्र धारण करने वाली और श्वेत कमल के आसन पर विराजित, जिस देवी का ध्यान ब्रह्मा, विष्णु और महेश आदि जिनकी सदैव स्तुति करते है और जो बुद्धि कि जड़ता को नाश करके परम बुद्धिमान बना देती है, ऐसी सरस्वती माता को में बारंबार प्रणाम करता हूँ | और उनको वंदन करता हूँ |

इस मंत्र का जाप मुख्यत: विद्यार्थियों को करना चाहिए जिससे कि माता सरस्वती कि कृपा उन पर होती रहे व वे अपना प्रत्येक निर्णय विवेक और बुद्धिमता से ले सके |

इस मंत्र का जाप प्रतिदिन करना चाहिए और कम से कम 21 दिनों तक करे या जब तक कि आपका मनोरथ पूर्ण न हो जावे |

Friday, 8 November 2013

beejakshara mantra Shri Ram Vandana And Mantras

!! श्री राम वंदना !!

In Hindi:-

श्रीरामचंद्र रघुपुंगव राजवर्य
राजेंद्र राम रघुनायक राघवेश |
राजाधिराज रघुनन्दन रामचंद्र
दासोऽहमद्य भवतः शरणागतोऽस्मि ||1||


हे रामा पुरषोत्तमा नरहरे नारायण केशवा 
गोविन्दा गरुडध्वजः गुणनिधे दामोदर माधवः |
हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपतेः,
वैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम् ||2||

रामो राजमणि सदा विजयते, रामं रमेशं भजे,
रामेणाभिहता निशाचरचमू, रामाय तस्मै नमः।

रामान्नास्ति परायणं परतरं, रामस्य दासोस्म्यहम्,
रामे चित्तलयो सदा भवतु मे, भोःराम मामुद्धर॥

रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नम: ||
राम रामेति रामेति, रमे रमे मनोरमे |
सहस्त्र नाम ततुल्यम् राम नाम वरानने ||

In English:-

Shri Ramchandra Raghupungav Rajvarya 
Rajendra Ram Raghunayak Raghavesh |
Rajadhiraj Raghunandan Raghvesh 
Dasoahmadya Bhavat: Sharnogatiasmi ||1||

He Rama Purshottma Narhare Narayana Keshva 
Govinda Garudadhvaj: Gunanidhe Damodar Madhav: |
He Krishna Kamlapate Yadupate Sitapate Shripate 
Vaikunthadhipate Characharpate Lakshmipate Pahimam ||2||

Thursday, 7 November 2013

beejakshara mantra Lord Shankar Mantra (Mahadev Mantra)

भगवान् शंकर (महादेव) की वंदना 

Lord Shiva :-  शिव ईश्वर का रूप हैं। हिन्दू धर्म में भगवन शिव को प्रमुख देवताओं में से एक माना जाता है। वेदों, पुराणों और शस्त्रों में शिव के कई नाम है, तथा इनको रुद्र के नाम से भी पहचाना जाता है। भगवन शब्कर को मनुष्य की चेतना तथा मनोवृति का अन्तर्यामी माना गया है |  माता शक्ति इनकी अर्धांगिनी है जो भगवती पार्वती है। भगवान शिव के दो पुत्र कार्तिकेय (स्कन्द) और गणेश है।


भगवान शिव को अधिकांशत: योगनिद्रा और समाधी के परिपेक्ष्य में दिखया जाता है और उनकी पूजा लिंग के रूप में की जाती है। परन्तु वास्तव में भगवन शंकर योगी अवस्था में ही सभी कार्य तथा नियमन संपन्न करते है | भगवान शिव को संहार का देवता कहा जाता है ।भगवान शिव सौम्य आकृति, सरल स्वभाव एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। अन्य देवों से शिव को भिन्न माना गया है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव संहारक देव है। शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं और यह काल महाकाल ही ज्योतिषशास्त्र के आधार है, अर्थात ज्योतिष के जन्मदाता शिव को ही माना गया है |
शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी देव माना गया है, लेकिन भगवान शिव सदैव लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन रखते है।


भगवन शंकर को सबसे भोला देव माना गया है क्योकि इनको सरल स्वभाव तथा दयालु ह्रदय के साथ ही आसानी से क्षमा करने वाला माना जाता है | इसलिए इनको भोलेनाथ भी कहा जाता है | वैसे तो भगवन शिव को कई नामों से जाना जाता है जैसे:- पशुपतिनाथ, अर्धनारीश्वर, रूद्र, त्रिनेत्रधारी, नीलकंठेश्वर, लिंगम, नटराज, महादेव, शंकर तथा आदिनाथ | परन्तु शिव नाम कि महिमा अपरम्पार है |

शंकर:- शंकर शब्द दो शब्दों शम् और कर से बना है, जिसमे शम् का अर्थ है कल्याण तथा कर का तात्पर्य करने वाले से है | अतः शंकर मतलब सबका कल्याण करने वाला | भगवन शंकर आदिदेव है तथा सबका कल्याण करते है | भगवन शिव का मंत्र "ऊँ नमः शिवाय" महा मंत्र है और इस मंत्र का जाप करने से सर्वकार्य संपन्न होते है एवं भगवान शंकर कि कृपा होती है |

शिव आराधना:- भगवान शिव कि आराधना और स्तुति करने हेतु "ऊँ नमः शिवाय" महामंत्र सबसे सटीक और फलदायी मंत्र है | परन्तु शास्त्रों में श्री द्वादश-ज्योतिर्लिंग को भी शिव-पूजा में अत्यधिक महत्वपूर्ण बताया गया  है, तथा हिंदू मान्यतानुसार (शास्त्र और पुराणानुसार) जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिङ्गों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों के पाप इन लिंगों के स्मरण मात्र से मिट जाता है। और सर्वसिद्धि कि प्राप्ति होती है | अतः यह द्वादश-ज्योतिर्लिंग इस प्रकार है:-



अत: अब हम शिव स्तुति मंत्र के बारे में जानते है जो निम्न प्रकार से है:-

In Hindi:-

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् !
        सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानि सहितं नमामि !!

In English:- 

        Karpurgourm Karunavatarm Sansarsarm Bhujgendraharm |
               Sada Vasantam Hridyarvinde Bhavam Bhavani Sahitm Namami ||


भावार्थ:-  जो कपूर के समान गौर वर्ण वाले, करुना के सागर, संसार व जगत के सार अर्थात आधार, जिनके गले में नागों (सापों) का हार हो अर्थात जिन्होंने सापों का हार रूप में धारण कर रखा हो | ऐसे भगवान भोलेनाथ मेरे ह्रदय में सदैव विराजमान रहे | तथा हे भोलेनाथ मैं माता भवानी (पार्वती) सहित नमन (प्रणाम) करता हूँ |  

यह मंत्र भगवान शिव की स्तुति के लिए है | इस मंत्र का प्रयोग करने से पहले साधक को चाहिए की वह काशी की तरफ मुख करे या पूर्वाभिमुखी होकर इस मंत्र का स्मरण करे | इस मंत्र को शिव मंत्र भी कहा जाता है, और यह सुख-समृद्धि तथा सुविचार प्रदान करने वाला परम हितकारी मंत्र गया है |

** ऊँ नमः शिवाय **

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