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Sunday, 1 December 2013

beejakshara mantra Shri Ram Gayatri Mantra & Ram Mantra

श्रीराम गायत्री मंत्र 

ओम् दशरथये विद्मिहे सीता वल्लभाय धीमहि |
तन्नो: राम: प्रचोदयात ||

श्रीराम मूल मंत्र 

ओम् ह्रीं ह्रीं रां रामाय नमः  
इति राम मूल मंत्र |

In English:-
Shri Ram Gayatri Mantra

Ohm Dasharathaye dashrathaye Vidmahe Sita Vallabhay Dhimahi |
Tanno: Ram: Prachodayat || 

Shri Ram Mula Mantra

Ohm Hrim Hrim  Ram Ramay Namah
Iti Ram Mul Mantra |

We are telling you the most important mantra for get rid from any problem. This mantra is amazing and jaap  regularly to feel the effects of this mantra.

(Jai Ramchandraye Namah)

Saturday, 23 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Destroying Enemies

Mantra to destroy the enemy


Ram and Laxman Fight With Ravan
This is the mantra of Ramcharitmanas and by using this you can destroying the enemies and it is also used for escape evils sight. 

This is considered as most powerful mantras to destroying enemies. You should be recited 108 times in a day to get effects of this mantra.

While chanting you should keep attention on mind and don't divert your focus.

यह मंत्र रामचरितमानस से उदृत है और महाकवि तुलसीदास जी ने रामचरित-मानस में मर्यादा पुरषोत्तम श्री राम का जो वास्तविक चित्रांगन किया है, उसका उल्लेख कर पाना संभव नहीं है | अर्थात वाल्मीकि चरित रामायण का हिंदी में अनुवाद इतनी स्पष्टता से कर पाना और रामायण के गूढ़ रहस्यों और मंत्रो को शालीनता से स्पष्ट करना, वास्तविकता में एक अद्भुत कार्य था |

रामचरितमानस में श्री राम के यश, शौर्य और प्रताप को बताते हुए तुलसीदास जी कहते है कि "जो श्री राम के चरणों में रहते है अर्थात जिनको श्री राम का आश्रय प्राप्त है और जो भक्त उनकी शरण में रहते है उनसे बैर अर्थात शत्रुता करना करना खुद की विषमता को खोना है" |


कहने का तात्पर्य यह है कि जो भी कोई भी प्रभु श्री राम और उनके भक्तों से शत्रुता करता है वह अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारता है, क्योकि कि प्रभु के प्रताप से वह विषमता खो देता है | शत्रुता नाश करने और संकट के निवारण के लिए नीचे लिखे इस मंत्र का प्रयोग करे:-  

Mantra:-

बयरु न कर कहू सन कोई |
राम प्रताप विषमता खोई ||

Bayru Na Kar Kahu San Koi |
Ram Partap Vishamata Khoi ||


मंत्र जाप विधि:- रामचरितमानस के इस मंत्र का जाप करने के लिए श्री रामदरबार के सामने पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करने के पश्चात श्री राम का ध्यान करते हुए मंत्र जाप आरम्भ करे | प्रत्येक दिन संध्याकाल में मंत्र का जाप करना श्रेष्ठ रहता है, और कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए | ऐसा करने से प्रभु श्री रामचंद्र की कृपा से आपके सभी शत्रुओं का नाश होगा तथा शत्रुओं से छुटकारा मिलता है |

यह मंत्र गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महाग्रंथ रामचरितमानस से लिया गया है | और यह मंत्र अनिष्ट करने या चाहने वाले शत्रुओं का नाश करने के लिए दिया गया है | पर साधारणतया मंत्र का प्रभाव तब तक शुरू नहीं होता जब तक की मंत्र को सिद्ध नहीं कर लिया जावे, इसलिए मंत्र को सिद्ध कर लेना ही श्रेष्ठ रहता है | और जब मंत्र सिद्ध हो जावे तब इस मंत्र का प्रतिदिन कम से कम 21 बार जाप करना चाहिए, जिससे की मंत्र शक्ति बढती है और मंत्र त्वरित फलदायी हो जाता है |

और  यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि जब तक कार्य सफल नहीं होता तब तक मंत्र का जाप करते रहना ही श्रेष्ठ रहता है |

Mantra To Accomplish all Wishes and Destroy Enemy

Friday, 22 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Success in Court Case

मुक़दमा जीतने के लिए


श्री रामभक्त हनुमान जी के लिए इस संसार में कोई भी कार्य दुष्कर नहीं है | भक्तशिरोमणि हनुमान जी की कृपा होने पर उनके भक्तों के भी सभी कार्य उतनी ही सुगमता से हो  जाते हैं जैसे हनुमान जी प्रभु श्री राम के कार्य को करते हैं |


तुलसीदास जी ने हनुमान जी का बड़ा सुन्दर वर्णन किया है :-

विद्यावान गुणी अति चातुर, 
राम काज करिबे को आतुर |

तथा 

दुर्गम काज जगत के जेते,
 सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते |

Hanuman Ji
अतएव जो कोई भी भक्त श्रृद्धा सहित श्री राम और हनुमान जी की वंदना करता है और नीचे दिए गए मंत्र का विधिपूर्वक जप करता है तो सभी प्रकार के मुकदमो और प्रतिष्टा पतन करने वाले जूठे दावों का तुरंत ही निराकरण होता है | 
मंत्र इस प्रकार है:-

In Hindi:-

 पवन तनय बल पवन समाना |
बुधि बिबेक बिग्यान निधाना || 

 In English:-

 Pavan Tanay Bal Pavan Samana |
Budhi Bibek Bigyan Nidhana ||


मंत्र जाप विधि :- इस मंत्र को मंगलवार या शनिवार को पूर्व या उत्तर में मुख करके जाप करना चाहिए या मंत्र सिद्ध कर लेना चाहिए | और भगवान राम में पूर्ण आस्था रखते हुए अगर कोई भक्त इस मंत्र का जाप करता है तो इससे वह सभी प्रकार कि आपदाओं से मुक्त हो जाता है | और सभी प्रकार के मुकदमों में विजयश्री हासिल करता है | तभी तो प्रभु के लिए कहा जाता है :-

कवन सो काज कठिन जग माही, 
जो नहीं होई तात तुम्ह पाई |

Click Play To Watch The Video of This Mantra

beejakshara mantra Significance Of God Worship & Satsang

सत्संग और प्रार्थना की महिमा तथा महत्व 

In Hindi:-
बिनु सत्संग विवेक न होई |
राम कृपा बिनु सुलभ न सोई ||

In English:-
Binu Satsang Vivek Na Hoi |
Rama Kripa Binu Sulabh Na Soi ||

इस मंत्र में श्री राम की महिमा का गुणगान किया गया है, और तुलसीदास जी ने श्री राम प्रभु के सत्संग का चित्रण किया है कि बिना सतसंग किये विवेक अर्थात ज्ञान नहीं होता है और सत्संग नहीं करने से राम कृपा भी नहीं होगी जिससे आप सुलभता अर्थात सरलता से सो नहीं सकते, यहाँ तुलसीदास जी ने सोने का तात्पर्य मोक्ष प्राप्ति से लिया है तथा सुलभ न सोई अर्थात आप सुलभता से नहीं मर सकते और अगर राम का नाम नहीं लिया तो जीवन में बहुत कष्ट उठाने पड़ते है और जीवन मृत्यु के सामान हो जाता है |

अत: प्रत्येक मनुष्य को भगवान का भजन और कीर्तन करना चाहिए जिससे उसका प्रारब्ध सुधरे और जीवन में सुख और शांति बनी रहे |

Tuesday, 19 November 2013

beejakshara mantra Mantras to Get Rid from Trouble and Embarrassment

दुःख और शोक निवारण के लिए 

In Hindi:-
सुनहि बिनय मम बिटप असोका |
सत्य नाम करु हरु मम सोका ||

In English:-
Sunahi Binay Mam Bitap Ashoka |
Satya Nam Karu Haru Mam Soka ||

यह मंत्र (चौपाई) रामचरितमानस मैं सुन्दर कांड से ली गई है | इसमें माता सीता अशोक वाटिका में अशोक के वृक्ष को कहती है कि – हे अशोक (अर्थात जो शोक का नाश करता है) आप मेरी प्रार्थना को सुनकर, मेरे शोक अर्थात दुखों को हर लीजिए और अपने नाम कि महिमा को सत्य करिये |

अत: जिन भक्तों को किसी भी प्रकार का दुख, पीड़ा या संताप हो तो उन्हें इस मन्त्र का प्रतिदिन संध्या समय में कम से कम २१ बार जप करना चाहिए | ऐसा कने से आपके समस्त दुखों का निवारण होगा |

beejakshara mantra The True Fact of Universe

कर्मों के आधार पर परिणाम 

Universe
इस चराचर जगत का अटल सत्य यह है कि यहाँ पर प्राणीमात्र को जो कुछ भी मिलता है, यथा करने, रहने और खाने आदि का बंटवारा कर्मों के आधार पर होता है | प्राणी जैसा कर्म करते है वैसा ही उनको फल प्राप्त हो जाता है, इसमें कोई संदेह नहीं है |

अत: कर्मों का परिणाम कैसे प्राप्त होते है और कर्म किस तरह से प्राणी का हित और अहित कर सकते है, रामचरितमानस में इस सन्दर्भ में एक चौपाई इस प्रकार है :-


In Hindi:-

जहाँ सुमति तहँ संपति नाना |
जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना ||

In English :-

Janhan Sumati Tanha Sanpati Nana |
Janhan Kumati Tahan Bipati Nidana ||

यह मंत्र (चौपाई) रामचरितमानस मैं सुन्दर कांड से उदृत है | इसमें सुमति अर्थात अच्छाई और कुमति अर्थात बुराई से क्या फल मिलता है, यह दर्शाया गया है |

यह प्रसंग सुन्दर कांड में विभीषण द्वारा रावन को समझाने के सन्दर्भ में आता है, कई तरह से समझाने के बाद भी जब रावण नहीं मानता है और उसे मारने के लिए आतुर हो जाता है | तब विभीषण जी माल्यवंत के घर जाकर कहते है कि जो भी होता है, या होने वाला है वह तो विधाता कि लीला है परन्तु – जहाँ सुमति है वहाँ संपत्ति का वास होता है और जहाँ कुमति है वहाँ पर विपत्ति आना निश्चित है |

अर्थात इससे यह स्पष्ट होता है कि जो कुमति अर्थात बुराई के मार्ग पर चलता है उसको इन कर्मों का फल तो भोगना ही पडता है |

beejakshara mantra Mantra to Getting True Devotion of God

भगवान की भक्ति प्राप्त करने हेतु मंत्र

This mantra’s from kishkindha kand of Ramcharitmanas and by chanting this mantra, you will getting success everywhere in life.

In Hindi:-

अब प्रभु कृपा करहूँ एहिं भांती |
सब तजि भजन करहूँ दिन राती ||

In English:-

Ab Prabhu Kripa Karahun Eahin Bhanti |
Sab Taji Bhajan Karahu Din Raati ||

यह मंत्र (चौपाई) गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के किष्किंधाकांड से ली गई है, इसमें भगवान से भक्त ने कहा है कि- हे प्रभु अगर कृपा करनी है तो ऐसी कीजिये कि मैं सब कुछ छोडकर दिन-रात केवल आपका ही भजन (स्मरण) करता रहूँ |

अत: इस मंत्र का जाप करने से आपको प्रभु कि भक्ति प्राप्त होगी और इस मंत्र का प्रतिदिन स्मरण करने से प्रभु श्रीरामचंद्र कि कृपा होती है, तथा सुख व समृद्धि कि वृद्धि होती है |

Sunday, 17 November 2013

beejakshara mantra Shri Ram Raksha Stotra

श्री राम रक्षा स्त्रोत्रम्

Lord Ram
श्रीरामरक्षास्तोत्रम् बुधकौशिक नामक ऋषि द्वारा रचित है और यह भगवान श्रीराम की स्तुति में रचा गया है।

माता सीता और भगवान श्रीराम कि स्तुति हेतु इस स्त्रोत्र का जाप किया जाता है |  तथा श्रीरामचन्द्र जी की प्रसन्नता के लिये रामरक्षास्तोत्र के जप में विनियोग किया जाता है।

इस स्त्रोत्र के बारे में शास्त्रों में यह तक कहा जाता है कि जो कोई भी इस स्त्रोत्र को कंठ में धारण कर लेता है अर्थात कंठस्थ कर लेता है, उसको सभी सिद्धियाँ प्राप्त हो जाती है |

यह स्त्रोत्र किसी भी प्रकार कि बाधाओं और समस्याओं से छुटकारा दिलाने कि अद्भुत क्षमता रखता है | अत: जपकर्ता को पूर्ण श्रृद्धा और समर्पण भाव से इस स्त्रोत्र का जाप करना चाहिए | तथा भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी को मन और चित्त में स्थापित कर इस स्त्रोत्र का ध्यान करने वाले निश्चित ही सभी बाधाओं एवं विपत्तियों से छुटकारा पाते है |


विनियोग

ॐ अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः श्री सीतारामचन्द्रो देवता अनुष्टुप्‌ छन्दः सीता शक्तिः श्रीहनुमान्‌ कीलकम् श्रीरामचन्द्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः।

अथ ध्यानम्‌

ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्‌। वामाङ्कारूढसीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलं रामचन्द्रम्॥

अथ स्तोत्रम्

चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्‌।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्‌॥1॥

ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम्‌।
जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम्‌ ॥2॥

सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम्‌।
स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम्‌ ॥3॥

रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम्‌।
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ॥4॥

कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुती।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः॥5॥

जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः।
स्कंधौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः॥6॥

करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित्‌।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः॥7॥

सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः।
उरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्‌॥8॥

जानुनी सेतुकृत्पातु जङ्घे दशमुखान्तकः।
पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः॥9॥

एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्‌।
स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्‌॥10॥

पातालभूतलव्योमचारिणश्छद्मचारिणः ।
न दृष्टुमति शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ॥11॥

रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्‌।
नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥12॥

जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्‌।
यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥13॥

वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्‌।
अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्‌ ॥14॥

आदिष्टवान्यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः।
तथा लिखितवान्प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः ॥15॥

आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम्‌।
अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान्सनः प्रभुः ॥16॥

तरुणौ रूप सम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ।
पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥17॥

फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ।
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥18॥

शरण्यौ सर्वसत्त्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्‌।
रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ॥19॥

आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशावक्षयाशुगनिषङ्गसङ्गिनौ।
रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम्‌॥20॥

सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा।
गच्छन्मनोरथान्नश्च रामः पातु सलक्ष्मणः ॥21॥

रामो दाशरथिः शूरो लक्ष्मणानुचरो बली।
काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः ॥22॥

वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः।
जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः ॥23॥

इत्येतानि जपन्नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयाऽन्वितः।
अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः ॥24॥

रामं दूवार्दलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम्‌।
स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नराः ॥25॥

रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरं
काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम्‌।
राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथतनयं श्यामलं शान्तमूर्तिं
वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम्‌॥26॥

रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥27॥

श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम,
 श्रीराम राम भरताग्रज राम राम।
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम,
श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥28॥

श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि,
श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि,
श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥29॥

माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः,
 स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु-र्नान्यं
जाने नैव जाने न जाने ॥30॥

दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे तु जनकात्मजा।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम्‌ ॥31॥

लोकाभिरामं रणरङ्धीरं,
राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं,
श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये ॥32॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगं
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्‌।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥33॥

कूजन्तं राम रामेति मधुरं मधुराक्षरम्‌।
आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम्‌ ॥34॥

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्‌।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्‌ ॥35॥

भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम्‌।
तर्जनं यमदूतानां राम रामेति गर्जनम्‌ ॥36॥

रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रामेशं भजे
रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः।
रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहं
रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥37॥

राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥38॥

इति श्रीबुधकौशिकमुनिविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रं सम्पूर्णम्

जपविधि:- जपकर्ता को इस स्त्रोत्र का ध्यान  करने से पूर्व शुद्ध आसन तथा पूर्व या उत्तर दिशा कि ओर  मुंह कर, श्रीराम दरबार के सम्मुख बैठना चाहिए | तत्पश्चात श्री राम का स्मरण कर इस स्त्रोत्र को प्रारंभ करना चाहिए |

इस स्त्रोत्र को विशेषतयः नवरात्र में करने से यह अधिक फलदायी होता है | इस स्त्रोत्र को रक्षा कवच भी कहा जाता है और यह स्त्रोत्र प्रत्येक प्रकार से जपकर्ता की रक्षा करता है | 

Saturday, 16 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Love and Devotion

 प्रेम बढाने के लिये 

Lord Ram With Sita
In Hindi:-
            
सब नर करहिं परस्पर प्रीती। 
चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥


In English:- 

Sab Nar Karahin Paraspar Priti |
Chalahin Svadharma Nirat Shruti Niti ||


उपयोग:- यह मंत्र रामचरितमानस से लिया गया है, प्रभु श्री राम का ध्यान करते हुए कोई याचक  इस मंत्र का नित्य जाप करता है तो यह  बहुत प्रभावकारी सिद्ध होता है |

Friday, 15 November 2013

beejakshara mantra How to Get Success In Life

Success of Human Life

मानव जीवन की सफलता के संदर्भ में महाकवि तुलसीदास जी ने  श्री रामचरितमानस में लिखा है कि:-

चौपाई(1):-
बड़े   भाग्य  मानस  तनु  पावा !
 सुर  दुर्लभ  सद  ग्रन्थन गावा !!

चौपाई(2):-
साधन  धाम  मोक्षकर  द्वारा !
 पायन जो  परलोक संवारा !!
चौपाई(3):-

नर तनु पाय विषय मन देही !
 पलटी सुधा ते नर विष लेही !!

चौपाई(4):- 
                        
जो न तरहि भाव सागर, नर समाज अस पाय !
      सो कृत निंदक मंद मति, आतम हनि गति जाय !!


भावार्थ:- अर्थात जीव को बड़े भाग्य से, कितने ही जन्मों के पुन्यकर्मो के फलस्वरूप मनुष्य जीवन मिलता है! अत: इसको व्यर्थ ही गवाना नही चाहिए,  इस जीवन को प्रभु के चरणों में अर्पित करना चाहिए ! और जो भगवत्कृपा से ऐसे मनुष्य शरीर को पाकर संसार  सागर से  पार होने का प्रयास नहीं करता है, वह घोर निंदक मंदमति आत्म हत्यारों कि गति प्राप्त करता है ! जिसके लिए उपनिषदों में कहा गया है:-

 असूर्या: नामते लोका: अन्धेन तमसा  बृता: !
             तान्स्ते  प्रेत्याभिगच्छन्ति ये के चात्म हनो जना: !!

beejakshara mantra Mantras For Good Wishes & happiness

मंगल कामना हेतु मंत्र

In Hindi:-

मंगल भवन अमंगल हारी | द्रवउँ सो दशरथ अजिर बिहारी ||1||

मंगल भवन अमंगल हारी | उमा सहित जय जपत पुरारी ||2||

In English:-

Mangal bhavan Amangal haari | Dravaun So Dasharath Ajir Bihari ||1||

Mangal bhavan Amangal haari | Uma Sahit Jai Japat Purari ||2||

इन रामचरितमानस की दोनों चौपाईयों का स्मरण किसी भी कार्य को प्रारंभ करने से पहले अवश्य ही करना चाहिए और रामायण के पाठ के दौरान मंगल कामना हेतु इन चौपाईयों का सम्पुट लगाना कल्याणकारी होता है | और रामायण प्रेमी और भक्तों को इन मन्त्रों का जाप सदैव करते रहना चाहिए, जिससे भगवान श्री राम की कृपा से उनका सदैव मंगल होगा |

beejakshara mantra Mantra to Get Again Your Lost Things

खोई हुयी वस्तु पुनः प्राप्त करने के लिए मंत्र

Lord Ram
रामचरितमानस के इस मंत्र से खोई हुयी चीज या प्रिय वस्तु श्री राम प्रभु की कृपा से शीघ्र ही मिल जाती है अत: जिन व्यक्तियों के किसी भी वस्तु या प्रियजनों का पता नहीं लग पा रहा हो उन्हें इस मंत्र का प्रयोग अवश्य कारण चाहिए | तथा श्री राम में श्रृद्धा और भक्तिभाव रखते हुए इस परम सिद्ध मंत्र का कम से कम 108 बार जाप अवश्य करे | जिससे कि श्री राम जी कि कृपा हो तथा आपकी खोई हुयी वस्तु आपको प्राप्त हो | इस मंत्र जाप प्रात: और संध्याकाल में तब तक करे जब तक आपकी खोई हुयी वस्तु मिल नहीं जाती |


मंत्र इस प्रकार से है :-

In Hindi:-

गई बहोर गरीब नेवाजू |
सरल सबल साहिब रघुराजू ||

In English:-

Gai Bahor Garib Nevaju |
Saral Sabal Sahib Raghuraju ||

This mantra’s from the Ramcharitmanas. You can use this mantra when you want to get back your lost things or item, but before it you have to jaap this mantra daily at least 21 times. And jaap this mantra regularly to get peaceful life.

खोई हुयी वस्तु प्राप्त करने का मंत्र (2):-


Raja Kartviryaarjuna
हैहयवंशी राजा कार्तवीर्यार्जुन जो भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्रावतार माने जाते है | किसी भी वस्तु या प्रिय चीज के खो जाने पर, इनकी पूजा करनी चाहिए तथा राजा कार्तवीर्यार्जुन को साधना द्वारा प्रसन्न करना चाहिए जिससे कि इस प्रकार की आपदा का तुरंत ही समाधान होता है | क्योकि वे सुदर्शनावतार होने के कारण उनकी पहुँच सम्पूर्ण लोकों तक है अत: शास्त्रों के अनुसार वह सभी लोकों में जाकर खोई हुयी वस्तु या व्यक्ति सभी को ढूंढकर लाने में समर्थ है |

पूजा विधान:- प्रात: काल और संध्याकाल में स्नानादि से निवृत होकर शुद्ध आसन पर विराजमान होकर पूर्व या उत्तर दिशा में मुंह करके, घी का दीपक जलाकर पूर्ण श्रृद्धा से भगवान विष्णु के सुदर्शनावतार या सुदर्शन चक्र का ध्यान करते हुए निम्नलिखित मंत्र का 108 (एक माला) बार जाप करे | साधक कितनी भी माला का जाप कर सकता है, यह साधक पर निर्भर करता है |

मंत्र इस प्रकार से है :-

In Hindi:-


ऊँ ह्रीं कार्तवीर्यार्जुनोनाम राजा बाहू सहस्त्रवान् |
तस्य नाम स्मरणमात्रेण गतं नष्टं च लभ्यते ||

In English:-


Ohm Hrim Kartviryaarjunonam Raja Bahu Sahastravan |
Tasya Naam Smranmatren Gatam Nashtam Cha Labhyate ||

beejakshara mantra Mantra to Get Rid of All Problems

विविध रोगों तथा बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए

In Hindi:-

दैहिक दैविक भौतिक तापा |
राम राज नहिं काहुहि ब्यापा ||

In English:-

Daihik Daivik Bhoutik Tapa |
Ram Raj Nahi Kahuhi Byaapa ||

यह मंत्र रामचरितमानस से लिया गया है | और इसके जाप से याचक को समस्त व्याधियों और मानसिक तथा शारीरिक रोगों से छुटकारा मिलता है | इस मंत्र को सिद्ध कर लेने से यह त्वरित फलदायी होता है | अथवा याचक को इस मंत्र को रोज कम से कम 108 बार जप करना आवश्यक है |

Thursday, 14 November 2013

beejakshara mantra Mantra to Visitation Of God

भगवान के दर्शन प्राप्त करने के लिए

In Hindi:-

भक्त बछल प्रभु कृपानिधाना |
बिस्वबास प्रकटे भगवाना ||

In English:-

Bhakat Bachhal Prabhu Kripanidhana | 
Bisvabas Prakate Bhagawana ||

यह मंत्र रामचरितमानस से उद्धृत है, रामचरितमानस में कहा गया है कि भगवान भक्त वत्सल है और कृपानिधान है, तथा भगवान अपने भक्तों के प्रेम के सागर में खो जाते है, और जो भक्तजन विश्वास और श्रृद्धा से उनको भजते है, तो भगवन ऐसे भक्त के विश्वास को कभी भी हानि नहीं पहुंचाते है |

इसीलिए भगवद्गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण, अर्जुन से कहते है कि हे पार्थ – जो भक्तजन सभी तरफ मुझ परमात्मा को देखता है, और मुझ में स्थित होकर मेरे परायण होकर मुझ सच्चिदानंदघन सवरूप का ध्यान करता है | ऐसे प्रेमिभक्त मुझे अत्यंत प्रिय है, और वो भक्त मुझ परमेश्वर को प्राप्त होकर मोक्ष प्राप्त करते है | 
                                                                                                                                                 (भगवद्गीता)

इसलिए कहा गया है कि :-
हरि व्यापक सर्वत्र समाना | प्रेम ते प्रकट होई मैं जाना ||
                                                                                          (रामचरितमानस)

Friday, 8 November 2013

beejakshara mantra Shri Ram Vandana And Mantras

!! श्री राम वंदना !!

In Hindi:-

श्रीरामचंद्र रघुपुंगव राजवर्य
राजेंद्र राम रघुनायक राघवेश |
राजाधिराज रघुनन्दन रामचंद्र
दासोऽहमद्य भवतः शरणागतोऽस्मि ||1||


हे रामा पुरषोत्तमा नरहरे नारायण केशवा 
गोविन्दा गरुडध्वजः गुणनिधे दामोदर माधवः |
हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपतेः,
वैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम् ||2||

रामो राजमणि सदा विजयते, रामं रमेशं भजे,
रामेणाभिहता निशाचरचमू, रामाय तस्मै नमः।

रामान्नास्ति परायणं परतरं, रामस्य दासोस्म्यहम्,
रामे चित्तलयो सदा भवतु मे, भोःराम मामुद्धर॥

रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नम: ||
राम रामेति रामेति, रमे रमे मनोरमे |
सहस्त्र नाम ततुल्यम् राम नाम वरानने ||

In English:-

Shri Ramchandra Raghupungav Rajvarya 
Rajendra Ram Raghunayak Raghavesh |
Rajadhiraj Raghunandan Raghvesh 
Dasoahmadya Bhavat: Sharnogatiasmi ||1||

He Rama Purshottma Narhare Narayana Keshva 
Govinda Garudadhvaj: Gunanidhe Damodar Madhav: |
He Krishna Kamlapate Yadupate Sitapate Shripate 
Vaikunthadhipate Characharpate Lakshmipate Pahimam ||2||

Thursday, 7 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Getting Marriage

Powerful Mantra For Marriage
                                   
Mantra:-
Tab Janak Pay Vasishth Aaysu Byah Saj Sanvary Ke |
Mandavi Shrutkirti Urmila Kunary layi hunkari ke ||
                                

तब जनक पाई वसिष्ठ आयसु ब्याह साज सँवारी के |
मांडवी श्रुतकीर्ति उर्मिला कुंअरी लई हंकारी के ||


तथा 

जब  ते  राम  ब्याह  घर  आये  |
नित  नव  मंगल  मोद  बधाये  || 

यह चौपाइयां गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस से अनुग्रहित है और आप विवाह के लिए दिए  गए दोनों मंत्रो में से किसी भी मंत्र का जप करेंगे तो भी फल वही मिलेगा और इन मंत्रों का प्रत्येक रोज कम से कम 21 बार जाप अवश्य करें अर्थात आपकी मनोकामना अवश्य ही पूर्ण होगी |

तथापि आप इसका  निरंतर श्री राम का ध्यान करते हुए जप करते रहे जब तक की आपका मनोरथ सिद्ध न हो जावे | और अगर विवाह होने में कोई बाधा या व्यवधान आता है तो भी इस मंत्र के जाप से उसका समाधान हो जाता है |
 ( शेष प्रभुकृपा ) 

Monday, 4 November 2013

beejakshara mantra How to top in exams ? (Mantra for Getting Top Rank in Exam)

How to top All the Exams

"Questions in every student and the com-petitioner mind that "What will i do for getting top in the Exam and what the strategy applying to top rank in exam". From my point of view many techniques and Rules for using power making strategy for our mind and anything else...."

But we forget something important chronic and depend on the mental power... that is the spirituality..
In the spirituality is the most power full elements in our life and we all are connected throw directed or in directed or we can say we have many Mantra for using its effects in our daily life and its working nicely When you are believe on the power of god....
* Using this Mantra for getting top in your all types of Exams and display your output soon...As per I'm use and my knowledge this is the real power of god or we say the Blessing of god...

* This mantra is written in English and Hindi both.

Mantra:-
 
Guru  Griha Gaye Padhan  Raghurayi |
Alp  Kal  Vidhya  sab  payi ||
                               
 गुरु   गृह  गए  पढ़न  रघुराई  |
अल्प कल  विद्या  सब  आई ||

उपयोग:- इस मंत्र का निरंतर जप करना जरुरी है, और रोज Study करने से पहले इस मंत्र का कम से कम 20 बार अवश्य जप करना चाहिए, जप करते वक्त भगवान् राम का ध्यान करने से यह मंत्र शीघ्र ही असरकारी है ! इस मंत्र से मस्तिष्क शक्तिशाली व् तेजस्वी हो जाता है व स्मरण शक्ति तीव्र हो जाती है |                                                                ( शेष प्रभुकृपा )        

beejakshara mantra How to Make Enemies Friends

Mantra to makes enemies as good friend 

रामचरितमानस में दिए गए इस मंत्र से बड़ा से बड़ा दुश्मन भी दोस्त की तरह व्यव्हार करने लगता है | मंत्र की चर्चा करने से पहले हम मित्र और शत्रु में जो भेद है उस पर चर्चा करेंगे | मित्र और शत्रु में जो असमानताएं होती है वह ये है कि मित्र हमेशा भला चाहता है, जबकि शत्रु यह चाहता है कि उसका शत्रु का नाश हो जाये |

और अधिकतर लोग इसे पढ़ने के बाद यही सोचेंगे की शत्रु को मित्र बनाने का क्या प्रयोजन? या शत्रु  को मित्र बनाने से क्या लाभ होगा? परन्तु मैं आपको बताता हूँ कि इसका क्या प्रयोजन है और यह क्यों आवश्यक है |

Shree Ram
कई बार हमारे जीवन काल में ऐसी परिस्थितियाँ आ जाती है जिससे हमें लगता है कि फलां पुरुष या आदमी मेरा शत्रु है और हमें इसके संपर्क में नहीं रहना चाहिए, पर हो सकता है कि वह आपकी दिमागी धारणाएं हो ! कहने का तात्पर्य यह है कि मनुष्य स्वयं विधाता तो नहीं है, और इसका क्या प्रमाण है कि जो वो सोच रहा हो वह शत प्रतिशत सही हो | अर्थात जो मनुष्य आपको शत्रु नजर आ रहा हो, वास्तव में वह आपका शत्रु न होकर किसी ओर के मायाजाल से प्रकट किया हुआ जाल हो ताकि आप बहकावे में आकार उस सज्जन और भले आदमी का संग छोड़ दे जिससे कि आपका अनर्थ चाहने वाले लोगो को मौके मिल जाये | 

मैं यह नहीं कहता कि आप जो सोचते है वह गलत है या बुद्धिहीनता है और मनुष्य की सोच सही या गलत में पहचान नहीं कर सकती, मेरा यह मत बिलकुल भी नहीं है | पर किसी को आरोपित करने से पहले अपने निर्णय पर गहनता से चिंतन अवश्य करना चाहिए और किसी कि भी बातों मैं आकार अपना निर्णय लेना बुद्धिमानी नहीं है, अत: सर्वदा अपना निर्णय स्वयं लेवें तथा सोच समझकर निर्णय लेने से ही पहचान होती है कि कौन अपना है और कौन पराया |

रामचरितमानस के इस मंत्र का उपयोग शत्रु को मित्र बनाने के लिए किया जाता है | यह मंत्र किसी भी प्रकार के शत्रु को मित्र बनाने का सामर्थ्य रखता है | यहाँ किसी भी प्रकार के शत्रु से तात्पर्य है कि, चाहे समक्ष रहने वाला शत्रु हो या छद्मवेश में रहने वाला शत्रु, सभी शत्रुओं को आपका मित्र बना देता है | यह मंत्र इस प्रकार से है:-

Mantra:-
             
Garal Sudha Ripu Karhi Mitayi |
Gopad Sindhu Anal Sitlayi ||

 गरल  सुधा रिपु करहिं मिताई | 
गौपद  सिन्धु  अनल सितलाई ||

भावार्थ:- यह मंत्र रामचरित मानस में सुन्दरकाण्ड से लिया गया है जिसमे हनुमान जी श्री राम प्रभु का नाम लेकर लंका नगरी में प्रवेश कर रहे है और मन ही मन में प्रभु श्री राम का बारम्बार स्मरण कर रहे है | तथा   इस शुभ अवसर पर भगवान शिव माता पार्वती से कहते है कि श्री राम के नाम से संसार के सारे कार्य सुगम हो जाते है और ऐसा कोई कार्य नहीं है जो प्रभु की कृपा से नहीं हो पावे | और कहते है कि "गरल सुधा रिपु करही मिताई" अर्थात जहर और अमृत आपस में बैरी होने पर भी प्रभु के प्रताप से मित्र बन सकते है, सागर भी गाय के पैर जितना हो सकता है, तथा अग्नि शीतल हो जाती है | यह सब सिर्फ श्री राम जी की कृपा से ही हो सकता है |

मंत्र जाप विधि:- जिन भक्तो को शत्रु सम्बंधित समस्याए है उनको प्रत्येक दिन इस 108 बार मंत्र का जाप करना चाहिए तथा तुलसीदास जी की इस चौपाई (मंत्र ) का निरंतर जप व् ध्यान करने से आपके शत्रु (Enemy) भी आपके मित्र बन जाते है | और रामचरितमानस के अनुसार अगर सच्ची श्रृद्धा व् विश्वास के साथ श्री राम व हनुमान का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जप किया जाये तो आपके जीवन में कभी किसी प्रकार की बाधा नही आ सकती है ! इस मंत्र को रोज कम से कम 15 से 20 बार तो अवश्य ही जपना चाहिए | मंत्र का फल त्वरित प्रभाव से पाने के लिए मंत्र को सिद्ध करना श्रेष्ठ माना गया है, मंत्र को हवन काके सिद्ध करने से मंत्र का प्रभाव शीघ्रता से होता है |

मंत्र को सिद्ध करने का विधान

Friday, 1 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Success in Interview

This mantra is from Ramcharit Manas and this is based on the conversation between lord ram and shri parsuram in the mithila (janakpuri).

In the case of broken bow of lord shiva. Shri parasuram ji was highly angry on lord ram, then lord ram was explained to him about the situation in the simplest behavior. Because of this, it will be very useful for  the interview.

This is a powerful mantras to get success in interviews. You has to be recited 108 times in a day to get effects of this mantra.



साक्षात्कार में सफलता के लिए ज्ञानी होने के साथ-साथ अच्छा वक्ता होना परम आवश्यक है | कई बार ऐसा होता है कि आप एक अच्छे जानकर होते है पर बोलने या उल्लेख (विस्तार से समझाना) करने में विफल रहते है, तो आपको दूसरों से कमतर आँका जाता है | अत: साक्षात्कार में सफलता के लिए यह आवश्यक है कि जो ज्ञान (जानकारी) या जो knowledge आप रखते है या बताते है उसको ऐसा Explain करे कि लोग आके बुद्धिमता कौशल की प्रसंसा करने लगे |

अर्थात कहने का तात्पर्य यह है कि बुद्धिमता के साथ तर्क और वक्तव्य का होना परम आवश्यक है | अच्छा वक्ता वही होता है जो अपने बुद्धिमता कौशल का दायरा परिसीमित रखता हुआ तर्कसंगत बात बोले और विवेकशीलता से उसे प्रकट करने का साहस रखे |


यहाँ हम साक्षात्कार में सफलता के संदर्भ में रामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड के एक मंत्र के चर्चा करेंगे | 

जनकपुरी में माता सीता के स्वयंवर में श्री राम जी के हाथों भगवान शिव का धनुष भंग होना, तथा शिव धनुष के भंग होने पर उसकी घनघोर गर्जना से परसुराम जी का क्रोधवश वहाँ आना तथा धनुष किसने भंग किया ऐसा पूछना आदि के अंतर्गत श्री राम और परसुराम जी के टकरावपूर्ण संवाद में श्री राम द्वारा परसुराम जी को मंत्रमुग्ध करना | इसमें श्री राम और भृगुकुल ऋषि परसुराम जी का वार्तालाप हुआ उसमे परसुराम जी अपने अधिष्ठाता और आराध्य देव भगवान शिव के धनुष भंग पर बड़े क्रोधित होकर श्री राम को मृत्युदंड देने के लिए तैयार थे पर प्रभु श्री राम ने बड़ी  ही शालीनता, तन्मयता और सरल वाणी से परसुराम को अपना दर्शन कराया तथा उनके क्रोध को संत कर दिया |

अत: इस मंत्र का जो कोई भी भक्त श्रृद्धा-पूर्वक जाप करना है और प्रभु श्रीराम को समरण करता है, उसको प्रत्येक प्रकार के साक्षात्कार और शास्त्रार्थ में सफलता प्राप्त होती है | साक्षात्कार में सफलता के लिए मंत्र इस प्रकार है:- 

Mantra:-
Tehi Awasar Suni Shiv Dhanu Bhanga |
Aayau Bhrigukul Kamal Patanga ||

तेहि अवसर सुनि सिव धनु भंगा।

आयउ भृगुकुल कमल पतंगा॥

भावार्थ:- यह चौपाई रामचरितमानस से शिव धनुष भंग होने व राम सीता के विवाह के संदर्भ में कही गयी है, जब भगवान राम के हाथ से शिव धनुष भंग होने पर भृगुकुल ऋषि परसुराम वहाँ अति क्रोध में आ गये व शिव धनुष भंग करने वाले को मृत्युदंड देने की बातें करने लगे तब भगवान राम ने उन्हें अपनी सरल वाणी व स्वाभाव से मुग्ध कर दिया ! इसका तात्पर्य यह है की इस चौपाई का निरंतर ध्यान करने वाले कभी भी किसी से वार्तालाप में हारते नही है और विचलित नही होते है |

इस मंत्र को प्रत्येक रोज 108 बार जप करे या कम से कम 21 बार संध्या समय में जप करने से आपकी मनोकामना पूर्ण होती है |

Thursday, 31 October 2013

beejakshara mantra Lord Rama Gloria and Magnitude of Navaratra

राम भजन सुखदाई

Shree Ram Darbar
आज इस कलियुग के घोर अंधकारमय जीवन में राम नाम ही एकमात्र सहारा है ! इस संसार के सारे लौकिक और अलौकिक फल सहज ही देने की क्षमता जितनी श्रीराम और उनके दो अक्षर के पावन राम” नाम में है, उतनी संभवतया ही किसी अन्य साधन सिद्धि में होगी, यह राम नाम का ही चमत्कार है कि जिसे शास्त्र ज्ञान या पूजा पद्धति कि जानकारी नही हो वह भी राम नाम के जप से बड़ी से बड़ी विपत्तियों से दूर जाकर असीम सुख पा लेता है |


शास्त्र कहते है कि भगवान राम के नाम का महत्व भगवान राम से भी ज्यादा है |
गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में लिखा है कि:-
उल्टा नाम जपत जग जाना ! वाल्मीकि भये ब्रह्म समाना !!"
यानि बिना किसी बड़ी शास्त्रीय समझ और पूजा पथ के बिना भी महर्षि वाल्मीकि ने राम नाम का उल्टा जप शुरू कर दिया और वे ऋषि वाल्मीकि कालांतर में शास्त्र ब्रह्म समान हो गए, किसी भी व्यक्ति की सकाम और निष्काम इच्छाओं की पूर्ति के लिए श्रीराम की प्रसन्नता को शास्त्रों में सर्वोपरि माना गया है |
अनेक मंत्र द्वारा श्री राम से इच्छित वर की प्राप्ति के लिए उपासना पद्धति का वर्णन शास्त्रों में मिलता है | रामायण के पथ विधान में लिखा है कि मंगल और लौकिक लाभ के लिए बालकाण्ड का पाठ करना चाहिए !

Shree Ram
शत्रु संहार या किसी काम में विजय प्राप्त करने के लिए सुन्दरकाण्ड के 68 पाठ 9 दिनों में संस्कृत जानने वाले ब्राहमण विद्धानों से करवाने चाहिए! यह एक सिद्ध प्रयोग है ! और सुन्दरकाण्ड के पाठ से व्यक्ति को कर्जे व शत्रु भय से भी मुक्ति मिलती है !
जिन सकाम भक्तों को शीघ्र लाभ या शारीरिक कष्ट का निवारण चाहिए उन्हें प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर श्रीराम रक्षा स्तोत्र के 11 पाठ करने चाहिए ! इस स्तोत्र कि यह विशेषता है कि यह कंठस्थ हो जाये तो पाठ कने वाले के द्वारा यह सिद्ध मन लिया जाता है ! और विशेषकर नवरात्री में इसका पाठ अति उत्तम माना गया है !
       य: कंठा धारयेत्तस्य करस्था: सर्वसिद्दय: 

                             (JAI SHRI RAM)

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