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Saturday, 30 November 2013

beejakshara mantra Lingashtakam In English With Meaning

Lingashtakam:- The Stotra of Lord Shiva

Shiva Lingam
Brahmamurari Surarcit Lingam
Nirmalbhasit Shobhit Lingam |
Janmaj Duhkha Vinashak Lingam
Tat Pranamami Sadashiva Lingam ||1||



Meaning:- I prostration that lingam, which is adored by lord brahma, Lord Vishnu and the other gods, which is holy & devotional, graceful, and well-adorned, and which destroys the sorrows associated with birth. I respect that eternal Shiva lingam.

Devmuni Pravararcita Lingam
Kamadahan Karunakar Lingam |
Ravanadarp Vinashan Lingam
Tat Pranamami Sadashiva Lingam ||2||

Meaning: - I prostration that lingam, which is worshipped by the deity and sages, which burns the desires (kama), which is merciful and gracious. And which destroyed the pride of demon ravana (king of lanka). I respect that eternal Shiva lingam.

Sarvasugandhi Sulepita Lingam
Buddhi Vivardhana Karana Lingam |
Siddha Surasur Vandita Lingam
Tat Pranamami Sadashiva Lingam ||3||

Meaning:-I prostration that lingam, which is coated with various sweet-scented perfume, which is the cause behind the increment the intelligence of brain and peace of mind, and which is praised by the siddhas, devtas and danav. I respect that Eternal Shiva Lingam.

Kanak Mahamani Bhoosit Lingam
Fanipati Weshtit Shobhita Lingam |
Daksha Suyagya Vinashana Lingam
Tat Pranamami Sadashiva Lingam ||4||

Meaning:-I prostration that lingam, which is adorned with gold and precious stones, which is Adorned with the snake Wrapped around it, And which Destroyed the yagya of Daksha (Father of sati). I obeisance that Eternal Shiva Lingam.

Kumkuma Chandan Lepita Lingam
Pankaj Har Sushobhita Lingam |
Sanchita Pap Vinashan Lingam
Tat Pranamami Sadashiva Lingam ||5||

Meaning:-I prostration that lingam, which is coated with kumkuma and chandan, which is beautifully Decorated by garlands of lotuses, and which destroys the accumulated sins. I worship that Eternal Shiva Lingam.

Devaganarcita Sevita Lingam
Bhavairbhaktibhireva Cha Lingam |
Dinakar Koti Prabhakar Lingam
Tat Pranamami Sadashiva Lingam ||6||

Meaning:-I salute that eternal Shiva lingam which is Worshipped and Served by the Group of Devtas with spirit of Emotion, Contemplation and mood with Devotion, and which has the magnitude of Million Suns. I worship that Eternal Shiva Lingam.

Astadalo Pariveshthit Lingam
Sarva Samudbhava Karna Lingam |
Astadaridra Vinashit Lingam
Tat Pranamami Sadashiva Lingam ||7||

Meaning:-I salute that eternal shiva lingam which is surrounded by eight petalled flowers, which is the reason behind of all creation in the world, And which destroys the eight types of poverties. I salute that Eternal Shiva Lingam.

Surguru Survar Poojit Lingam
Survan Pushp Sadarchit Lingam |
Paratparam Paramatmak Lingam
Tat Pranamami Sadashiva Lingam ||8||

Meaning:-I worship that eternal Shiva lingam which is worshipped by the preceptor of gods (guru brihaspati) and all of the gods, which is always worshipped by the Flowers of the angelic park,Which is the superior than the Best and which the Greatest is. I always hold in my heart that Eternal Shiva Lingam.

Lingashtakamidam Punyam Ya: Pathet Shivasannidhau |
Shivalokamvapnoti Shiven Sah Modate ||

Meaning:-Whoever recites this lingastakam near shiva or lingam, Will attain the abode of shiva and enjoy his bliss.

इस लिंगाष्टकम को हिंदी में अर्थसहित जानने हेतु क्लिक करें :- श्री शिव लिंगाष्टकम हिंदी में

तथा शिव पूजा विधान :- श्रावण के माह में शिवपूजा 

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** OM NAMAH SHIVAY **

beejakshara mantra Lingashtakam In Hindi With Meaning

श्री शिव लिंगाष्टकम

श्री शिव लिंग 
लिंगाष्टकम भगवान भोलेनाथ के लिंगस्वरूप की स्तुति कर भोलेनाथ  करने का उत्तम अष्टक है, जो कोई भक्त पूर्ण आस्था तथा श्रृद्धा सहित भोले बाबा के लिंगाष्टकम का पाठ करेगा उसकी सभी मनोकामना तथा इच्छाओं की पूर्ति स्वयं शिव शंकर  करते हैं,  श्री शिव लिंगाष्टकम अर्थ सहित इस प्रकार है:-
   
ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगम्
निर्मलभासित शोभित लिंगम्।
जन्मज दुःख विनाशक लिंगम्
तत् प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥1॥



भावार्थः- जो ब्रह्मा, विष्णु और सभी देवगणों के इष्टदेव हैं, जो परम पवित्र, निर्मल, तथा सभी जीवों की मनोकामना को पूर्ण करने वाले हैं और जो लिंग के रूप में चराचर जगत में स्थापित हुए हैं, जो संसार के संहारक है और जन्म और मृत्यु के दुखो का विनाश करते है ऐसे भगवान आशुतोष को नित्य निरंतर प्रणाम है |

देवमुनि प्रवरार्चित लिंगम्
कामदहन करुणाकर लिंगम्।
रावणदर्प विनाशन लिंगम्
तत् प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥2॥

भावार्थः- भगवान सदाशिव जो मुनियों और देवताओं के परम आराध्य देव हैं, तथा देवो और मुनियों द्वारा पूजे जाते हैं, जो काम (वह कर्म जिसमे विषयासक्ति हो) का विनाश करते हैं, जो दया और करुना के सागर है तथा जिन्होंने लंकापति रावन के अहंकार का विनाश किया था, ऐसे परमपूज्य महादेव के लिंग रूप को मैं कोटि-कोटि प्रणाम करता हूँ |

सर्वसुगन्धि सुलेपित लिंगम्
बुद्धि विवर्धन कारण लिंगम्।
सिद्ध सुरासुर वन्दित लिङ्गम्
 तत् प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥3॥

भावार्थः- लिंगमय स्वरूप जो सभी तरह के सुगन्धित इत्रों से लेपित है, और जो बुद्धि तथा आत्मज्ञान में वृद्धि का कारण है, शिवलिंग जो सिद्ध मुनियों और देवताओं और दानवों सभी के द्वारा पूजा जाता है, ऐसे अविनाशी लिंग स्वरुप को प्रणाम है |

कनक महामणि भूषित लिंगम्
फणिपति वेष्टित शोभित लिंगम् ।
दक्ष सुयज्ञ विनाशन लिंगम्
तत् प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥4॥

भावार्थः- लिंगरुपी आशुतोष जो सोने तथा रत्नजडित आभूषणों से सुसज्जित है, जो चारों ओर से सर्पों से घिरे हुए है, तथा जिन्होंने प्रजापति दक्ष (माता सती के पिता) के यज्ञ का विध्वस किया था, ऐसे लिंगस्वरूप श्रीभोलेनाथ को बारम्बार प्रणाम |

कुंकुम चन्दन लेपित लिंगम् 
पंकज हार सुशोभित लिंगम् । 
सञ्चित पाप विनाशन लिंगम्
तत् प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥5॥

भावार्थः- देवों के देव जिनका लिंगस्वरुप कुंकुम और चन्दन से सुलेपित है और कमल के सुंदर हार से शोभायमान है, तथा जो संचित पापकर्म का लेखा-जोखा मिटने में सक्षम है, ऐसे आदि-अन्नत भगवान शिव के लिंगस्वरूप को मैं नमन करता हूँ |

देवगणार्चित सेवित लिंगम्
भावैर्भक्तिभिरेव च लिंगम्।
दिनकर कोटि प्रभाकर लिंगम् 
तत् प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥6॥

भावार्थः- जो सभी देवताओं तथा देवगणों द्वारा पूर्ण श्रृद्धा एवं भक्ति भाव से परिपूर्ण तथा पूजित है, जो हजारों सूर्य के समान तेजस्वी है, ऐसे लिंगस्वरूप भगवान शिव को प्रणाम है |

अष्टदलो परिवेष्टित लिंगम् 
सर्व समुद्भव कारण लिंगम्।
अष्टदरिद्र विनाशित लिंगम् 
तत् प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥7॥

भावार्थः- जो पुष्प के आठ दलों (कलियाँ) के मध्य में विराजमान है, जो सृष्टि में सभी घटनाओं (उचित-अनुचित) के रचियता हैं, और जो आठों प्रकार की दरिद्रता का हरण करने वाले ऐसे लिंगस्वरूप भगवान शिव को मैं प्रणाम करता हूँ |

सुरगुरु सुरवर पूजित लिंगम् 
सुरवन पुष्प सदार्चित लिंगम्।
परात्परं परमात्मक लिंगम् 
तत् प्रणमामि सदाशिवलिंगम् ॥8॥

भावार्थः- जो देवताओं के गुरुजनों तथा सर्वश्रेष्ठ देवों द्वारा पूजनीय है, और जिनकी पूजा दिव्य-उद्यानों के पुष्पों से कि जाती है, तथा जो परमब्रह्म है जिनका न आदि है और न ही अंत है ऐसे अनंत अविनाशी लिंगस्वरूप भगवान भोलेनाथ को मैं सदैव अपने ह्रदय में स्थित कर प्रणाम करता हूँ |

लिंगाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥

भावार्थः- जो कोई भी इस लिंगाष्टकम को शिव या शिवलिंग के समीप श्रृद्धा सहित पाठ करेगा उसको शिवलोक प्राप्त होता है तथा भगवान भोलेनाथ उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते है |

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भगवान शिव की पूजा श्रावण के महीने में करने से शिव शीघ्र ही प्रसन्न होते है, श्रावण में शिव पूजा के विधान के लिए क्लिक करें :-  Shiva Pooja In Shravan

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# ॐ नमः शिवाय #

Friday, 29 November 2013

beejakshara mantra Mantra to Get Desired Wife

सुयोग्य पत्नी प्राप्ति हेतु मंत्र

भारतीय संस्कृति और शास्त्रों के अनुसार अच्छे वर और वधु प्राप्त करने के लिए प्राय: सभी भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा करते है | इसमें लड़कियाँ सुयोग्य वर के लिए माता पार्वती और भगवान शिव कि उपासना करती है तो लड़के सुलक्षणा वधु हेतु उपासना करते है |

अतएव सुलक्षणा पत्नी की प्राप्ति हेतु भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती को प्रसन्न करने का मंत्र निम्न प्रकार है:-


Shiv Parivar
Mantra In Hindi:-

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृतानु सारिणीम् |
तारिणीम् दुर्ग संसार सागरस्य कुलोद्भवाम ||


Mantra In English:-

Patnim  Manoramam Dehi Manovritanu Sarineem |
Tarineem Durg Sansar Sagarasya Kulodbhavaam ||


मंत्र जप विधि:- मंत्र जप हेतु प्रात: या संध्या काल का समय सर्वश्रेष्ठ माना जाता है | प्रात: या संध्या को शारीरिक रूप से शुद्ध होकर, आसन को शुद्धिकरण (Purification Of Worship Seat) करके पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर आसन पर विराजमान होवें, तदन्तर अपने सम्मुख शिवपरिवार या शिव-पार्वती की तस्वीर रखकर उनको अपने सम्मुख जानकर पूर्ण श्रृद्धा से उनको प्रणाम करें | अब दिए गए मंत्र का जाप आरम्भ करे |

ध्यान रखिये मंत्र के शुभ परिणाम हेतु आपको मंत्र पर पूर्ण श्रृद्धा तथा विश्वास होना आवश्यक है तथा प्रतिदिन इस मंत्र का कम से कम  बार जप अवश्य करें |

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इस मंत्र के जाप से आपकी मनोकामना अवश्य ही पूर्ण होती है, तथा श्रावण के महीने में इस मंत्र का जाप किया जाये तो यह त्वरित फलदायी सिद्ध होता है |

Monday, 25 November 2013

beejakshara mantra Lord Shiva Gayatri Mantra

शिव गायत्री मंत्र

In Hindi:-
ओम् महादेवाय विद्मिहे रुद्रमुर्तये धीमहि |
तन्नो: शिव: प्रचोदयात ||

ओम् सं सं सं ह्रीं ऊँ शिवाय नमः 
इति मूल मंत्र |

In English:-

Ohm Mahadevay Vidmahe Rudramurtaye Dhimahi |
Tanno: Shiva: Prachodayat || 

Ohm San San San Hrim Om Shivay Namah: 
Iti Mul Mantra |

भगवान भोलेनाथ के गायत्री मंत्र का जाप करने से सभी बाधाओं और आपदाओं से मुक्ति मिलती है | और मंत्र जाप करते समय मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए अथवा कशी की तरफ मुख करके जाप करना चाहिए, ऐसा करने से जप सफल व फलदायी होता है |

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Sunday, 24 November 2013

beejakshara mantra Mantra To Prevent and Save form Premature Death

अकालमृत्यु निवारण और वंश वृद्धि के लिए

भगवान भोलेनाथ के सिद्ध मन्त्रों का जाप सर्वदा फलदायी होता है और मन्त्रों को श्रृद्धा व भक्तिपूर्वक जाप करना फलदायी होता है | 


In Hindi:-

मानस्तोके तनयेमानऽआयुषिमानो
गोषुमानोऽअश्वेषुरीरिष: |
ऊँ नमः शिवाय: |

In English:-

Manstoke TanayeMaanaAyushimano
GoshumanoashveshuRirish: |
Ohm Namah Shivaay: |

भगवान शिव के इस मंत्र का जाप, शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हुए करना चाहिए |
इस मंत्र का जाप करने से अकाल मृत्यु का निवारण होता है अर्थात अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और वंश वृद्धि के लिए भी इस मंत्र का जाप करना सर्वोपरि माना गया है |

भगवान शिव के जल चढाने का मंत्र के लिए यहाँ क्लिक करें  :- शिवलिंग पर जल अर्पण करने का मंत्र 

Saturday, 23 November 2013

beejakshara mantra Mantra To Accomplish all Wishes and Destroy Enemy

सर्वमनोकामना सिद्धि तथा शत्रु पर विजय हेतु शिव मंत्र

Lord Shiva Shankar
भगवान शिव जो कि सृष्टि के विनाशकर्ता तथा संहारकर्ता है, और हिंदू मान्यताओं के अनुसार त्रिदेवो में इनका अहम कार्य है वो है संहार करना | अर्थात देवो के देव महादेव संहारक होते हुए भी जगत का आधार है और भक्तो में परम और करुना कि मूर्ति है | मनोकामना प्राप्त करने के लिए अर्थात मनोरथ सिद्ध करने हेतु तथा शत्रु का विनाश करने हेतु इस मंत्र का प्रयोग किया जाता है | 

आदिकाल से ही भगवान शिव को कृपा करने और वर देने के लिए अग्रणी माना जाता रहा है और भगवन महादेव तो इतने भोले है कि कोई भी भक्त पूर्ण श्रृद्धा से और पूर्ण समर्पण से उनको जपता है तथा वे प्रसन्न होने पर यह नहीं देखते कि कौन उनसे क्या वर मांग रहा है, तभी तो इनको भोलेनाथ भी कहा जाता है |

अत: मेरा अभिप्राय यह है कि भगवान भोलेनाथ को भक्त का श्रृद्धा और समर्पण भाव अति प्रिय है और शास्त्रों में कहा भी जाता रहा है कि "भगवान तो प्रेम के भूखे होते है, उन्हें कोई लालच दे तो उसकी उनके सामने क्या बिसात?" अर्थात प्रभु को मानाने के लिए दिखावे और आडम्बर की जरूरत नहीं है, प्रभु को प्रेम और समर्पित भाव से भजने में ही मनुष्य का सच्चा कल्याण है |

भगवान शिव के इस मंत्र को जपने वाले भक्तों के कभी भी विपत्तियां नहीं आती है और उनके सभी कष्टों का निवारण स्वयं भोलेनाथ करते है | सर्वमनोकामना सिद्धि तथा शत्रु पर विजय प्राप्ति का मंत्र इस प्रकार है:-

In Hindi:-
नमस्तेऽआयुधायानातताय धृष्णवे,
ऊँ रुद्राय नमः |

In English:-
Namaste Aayudhayanatataay Drishnave,
Ohm Rudraay Namah: |

जाप विधि:- भगवान शिव के इस मंत्र का जाप करने वाले भक्तो को चाहिए कि वे सोमवार के दिन प्रातकाल स्नानादि से निवृत होकर शुद्ध आसन पर पूर्वाभिमुख होकर विराजमान होवे तदन्तर मंत्रारम्भ करे | और मंत्र जाप करते समय भगवान शिव का निरंतर स्मरण करते रहे | भगवान शिव के इस सर्वमनोकामना और शत्रु विजय मंत्र का फल पाने हेतु कम से कम 108 से 1108 बार जाप करे | इस प्रकार सोमवार से जाप आरम्भ करने पर प्रत्येक दिन 108 बार इस मंत्र का अगले सोमवार तक जाप करे या मनोकामना प्राप्ति तक मंत्र जाप करे | ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते है और भक्त कि मनोकामना कि पूर्ति अवश्य होती है |

इस मंत्र के जाप करने से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है तथा जमीन-जायदाद आदि विवादों का निपटारा होता है, और शत्रु पर विजय पाने के लिए भी इस मंत्र का उपयोग श्रेष्ठ माना गया है |

How to Make Enemies Friends

beejakshara mantra Mantra to Get Good Fiance and Child

योग्य वर और इच्छित संतान प्राप्ति हेतु शिव मंत्र 

In Hindi:-

नमोस्तु नीलग्ग्रीवाय सहस्राक्षाय मीदुषे |
अथोयेअस्यसत्त्वावो हन्तेभ्योकरन्नम: ||

ऊँ नीलकंठाय नमः |

In English:-

Namostu Nilaggrivay Sahstrakshay Meedushe |
AthoyeasyaSattvavo HantebhyoKarnnam: ||

Ohm Neelakanthay Namah: |


भगवान शिव के इस मंत्र का जाप करने से अविवाहित कन्याओं को पसंदीदा जीवन साथी तथा विवाहितों को इच्छित संतान की प्राप्ति होती है |

मंत्र जप का विधान :- भगवान भोलेनाथ के इस मंत्र को भगवान के शिवलिंग पर दूध व बिल्व पत्र चढाते हुए जाप करने से आपकी मनोकामना जल्दी ही पूरी होती है | और इस मंत्र के साथ-साथ आपको बिल्वपत्र चढाने के मंत्र का जाप भी करना चाहिए |

बिल्वपत्र चढाने का मंत्र – बिल्वपत्र मंत्र   

Friday, 22 November 2013

beejakshara mantra Mantra to Make Brain Sharper (Shiva Mantra)

कुशाग्रबुद्धि पाने के लिए शिव मंत्र 

In Hindi:-

याते रुद्रशिवातनूरघोरा पापकाशिनी |
तयानस्तन्नवाशन्त मयागिरी शंताभिचाकशीहि ||



ऊँ नमः शिवाय: |

In English:-

Yate Rudrashivatnoorghora Paapkashini |
TayanastannaVashanta Mayagiri SantabhichakShihi ||

Ohm Namah Shivaay: |


भगवान शिव के इस मंत्र को जप करने के लिए पूर्व दिशा या कशी कि तरफ मुख कर, आसन पर बैठकर जाप करे | इस मंत्र का जाप प्रत्येक दिन 21 बार करने से आपकी बुद्धि कुशाग्र हो जायेगी और साथ ही आपके सभी प्रकार के गृहक्लेशों का निवारण होगा |

मंत्र को जपते समय भगवान शिव का ही ध्यान करते रहना चाहिए और इस मंत्र के जप करने के पश्चात  "ऊँ नमः शिवाय:" इस मंत्र की एक माला अर्थात 108  बार जाप करना सर्वफलदायी होता है |

विद्यार्थियों को इस मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए, जिससे  उनका मष्तिष्क शक्तिशाली होता है और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है | और साथ ही यह मंत्र गृह क्लेशो के निवारण में उपयोगी सिद्ध होता है |

Thursday, 14 November 2013

beejakshara mantra Dwadash Jyotirlinga Strotram (In Hindi)


द्वादशं ज्योतिर्लिङ्गानि (हिंदी में)

Shiv Temple
सोमनाथ सौराष्ट्र में, काशी में विश्वेश |
महाकाल उज्जैन में, शिवालय घुश्मेश ||


भीमशंकर डाकिनी, सेतुबंध रामेश |
त्रयम्बकं गोमती तीर पर, दारुकवन नागेश ||

मल्लिकार्जुन श्रीशैल पर, हिमगिरी पर केदार |
चिता भूमि स्थान में वैद्यनाथ भवहार ||


ओंकार ममलेश्वर में रेवातट दोए नाम |
द्वादशज्योर्लिंग को सदा करूँ प्रणाम ||


श्रद्धा सहित जो ध्यावही निशदिन में दो बार |
सर्वपाप से मुक्त हो, पावे सिद्दी अपार ||

भगवान महादेव के इस द्वादश स्त्रोत्र को जो कोई भी भक्त पूर्ण श्रद्धा से ओर निष्काम भाव से प्रयेक दिन सुबह व शाम को भजता है या स्मरण करता है वह सभी प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है, व शिव भक्तों को चाहिये कि प्रत्येक सोमवार को काशी की तरफ मुख कर इस स्त्रोत्र का जाप करे व इस स्त्रोत्र निरन्तर जाप करने से सर्वसिद्धि की प्राप्ति होती है |

Wednesday, 13 November 2013

beejakshara mantra Shiva Dvadasha Jyotirlinga Stotram (In Sanskrit)

!! द्वादशं ज्योतिर्लिङ्गानि (संस्कृत में) !!

Kedarnath

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम् |
उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम् ||1||


परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम् |
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ||२||

वाराणस्यां तु विश्वेशं त्रयम्बकं गौतमीतटे |
हिमालये तु केदारम् घुश्मेशं च शिवालये ||३||

एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायंप्रातः पठेन्नरः |
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ||4||

Click Here to Listen the Video of 12 Jyotirligas

 
 

भगवान शंकर  के  इस 12 (द्वादश) ज्योतिर्लिंगों  का  स्मरण प्रत्येक दिन जो कोई भी सांय अर्थात संध्या के  समय  व प्रात निष्काम भाव से करता  है,  उसके  सात जन्म तक  किये हुए पापों का का विनाश भी इस स्त्रोत्र का स्मरण करते ही ही हो जाता है । और उस भक्त के सब पाप नष्ट होकर उसको सर्व सिद्धि को प्राप्त होती है ।

beejakshara mantra Mantra for Shiva Puja

!! भगवान शिव की आराधना !!

In Hindi:-

ओम् त्रयम्बकं यजामहे, सुगन्धिम्पुष्टिवर्धनम् |
उर्वारुकमिव बन्धनात, मृत्युर्मुक्षीय मामृतात ||

In English:-

Ohm Trayambakam Yajamahe, SugandhimPushtiVardhanam |
    Urvarukmiva  Bandhanat, MrityurMukshiy Maamritat ||

इस मंत्र को अकाल मृत्यु से से छुटकारा पाने के लिए उपयोग में लिया जाता है और इसी मंत्र को ही हम ""महामृत्युंजय मंत्र" के नाम से जानते है | और दूसरे पहलू  से देखा जाये तो भगवान शिव को सृष्टि संहारक या संहारकर्ता भी कहा जाता है, तो अकालमृत्यु से बचने वाले तो भगवान शिव ही माने जाते है | अत: मनुष्य को चाहिए की भगवान शिव की आराधना करते वक्त इस मंत्र का जाप, काशी की तरफ मुख करके, आसन पर स्थित होकर,  पूर्ण रूप से समर्पित होकर करे | और जाप की कोई निश्चित सीमा निर्धारित नहीं है, कोई भी भक्त    
कितना भी जाप कर सकता है, या 21 बार नित्य स्मरण भी फलदायी माना जाता है | अत: कोई भी साधक इस मंत्र का जाप करके भगवान शिव की आराधना कर सकता है | 

(जय शिव शंकर )

Sunday, 10 November 2013

beejakshara mantra Shree Mahamrityunjay Mantra And Shiva Yantra

महामृत्युंजय मंत्र और शिव यन्त्र 

श्री शिव यन्त्र 

In Hindi:-

ऊँ हौं जूं सः ऊँ भूर्भुवः स्वः ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
उर्वारुकमिव बन्धनात मृत्युर्मुक्षीय मामृतात ऊँ भुवः भूः स्व ऊँ सः जूं हौं ऊँ ||

In English:-

Ohm Hon Joom Sa: Ohm Bhurbhuv: Sva: Ohm Trayambakam Yajamahe Sugandhim Pushtivardhanam |
Urvarukmiv Bandhanat Mrityurmukshiy Mamritat Ohm Bhuv: Bhu: Sva Ohm Sa: Joom Hon Ohm ||

अर्थात:- इस महामृत्युंजय मंत्र को संजीवनी विद्या के नाम से भी जाना जाता है | इस मंत्र के उपयोग से से पहले साधक को महामृत्युंजय यन्त्र की स्थापना करनी चाहिए और इस महामृत्युंजय यन्त्र के सम्मुख पवित्र आसन पर विराजमान होकर भगवान शिव का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जाप करना चाहिए |

इस मंत्र के प्रभाव से अकालमृत्यु का भय समाप्त हो जाता है, और इस मंत्र का पाठ या अनुष्ठान करने से सभी तरह के रोगों और व्याधियों से छुटकारा तो मिलता ही है साथ ही साथ सभी तरह के गृहक्लेशों से मुक्ति भी मिलती है |

Saturday, 9 November 2013

beejakshara mantra Shiva Panchakshara Stotram (Shiva Mahima)

!! शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम् !!


नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय,
  भस्माङ्गरागाय महेश्वराय |
  नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय,  
          तस्मे 'न' काराय नमः शिवाय |1||


    मन्दकिनीसलिलचन्दन्चर्चिताय,
नन्दिश्वरप्रमथनथामहेश्वराय |
मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपुजिताय, 
   तस्मै 'म' काराय नमः शिवाय |2||

शिवाय गोरीवदनाब्जवृन्द,  
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय |
   श्री नीलकण्ठाय वृषध्वजाय , 
           तस्मै 'शि' काराय नमः शिवाय |3||

वशिष्ठकुम्भोद्भव गौत्मार्य ,
मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय |
चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय, 
          तस्मै 'व' काराय नमः शिवाय |4||

य (क्ष) ज्ञस्वरूपाय जटाधराय, 
पिनाकहस्ताय सनातनाय |
दिव्याय देवाय दिगम्बराय, 
        तस्मै 'य' काराय नमः शिवाय |5||

पन्चाक्षरमिदं पुण्यं यः  पठेच्छिवसन्निधौ |
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ||

!! इति !!

Click here to watch the video of "Shiva Panchakshar Stotra"


इस स्तोत्र का सात सोमवार तक  भगवान शिव के सम्मुख घी का दीपक जलाकर, पूर्वाभिमुख होकर या काशी कि तरफ मुख करके पंच बार पाठ करने पर सर्वसिद्धि प्राप्त होती है |

beejakshara mantra Maha Shivaratri Pooja Vidhi (Shiva Mantra Siddhi)

महाशिवरात्रि पूजा विशेष तथा शिवरात्रि की महत्ता 

Shiva As Yogi
महाशिवरात्रि हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है | यह पर्व भगवान शिवशंकर का पूजन कर मनाया जाता है | भगवान शिव को सभी देवों का देव कहा गया है इसलिए इनको महादेव भी कहा जाता है |

महाशिवरात्रि का त्यौहार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान् शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था | तथा प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से भस्म कर देते हैं |

इसीलिए इस दिन को महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया। भगवान भोलेनाथ सदैव माता पार्वती तथा शिव प्रेतों व पिशाचों के साथ रहते है |

शिव का रूप सभी देवो से अलग है | शरीर पर भस्म,  गले में सर्पों का हार,  कंठ में विष,  जटाओं में पतित पावनी गंगा मैया तथा मस्तक पर चंद्र कि छटा विराजित रहती है |

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिवभक्त शिव मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर बिल्वपत्र तथा आक के फूल जो आदिनाथ को अत्यंत प्रिय है उनको अर्पित करते हैं, तथा शिव का पूजन करते है और उपवास करते हुए रात्रि को जागरण करते हैं | इस दिन शिवलिंग पर बिल्वपत्र तथा आक के फूल चढाना और पूजन करना हिंदू पौराणिक संस्कृति कि परम्परा का जीता-जगाता उदाहरण है | तथा भक्तो की आस्था का प्रतीक है |

महाशिवरात्रि पर्व विशेष:-

इस पर्व को उत्साह और श्रृद्धा से मनाने का करना यह भी है कि इस दिन महादेव शिव की शादी हुई थी इसलिए इस दिन रात्रि में शिवजी की बारात निकाली जाती है। वास्तव में शिवरात्रि का परम पर्व स्वयं परमपिता परमात्मा के सृष्टि पर अवतरित होने की याद को मानस पटल पर जीवन्त करता है | परमपिता परमात्मा ही ज्ञान के सागर है जो जीव-मात्र को सत्यज्ञान (सत्) द्वारा अन्धकार (तम) से प्रकाश की ओर अथवा असत्य से सत्य की ओर ले जाते हैं | इस दिन सभी जाति, धर्मों तथा वर्णों के मनुष्यों को इन मापदंडो से ऊपर उठाकर भगवान भोलेनाथ का व्रत करते हुए पूर्ण श्रृद्धा से पूजन करना चाहिए |

पूजन विधान:-

महाशिवरात्रि के दिन मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, ऊपर से बिल्वपत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है तथा उनका पूजन किया जाता है | अगर नजदीक में शिवालय या शिवमंदिर न हो तो घर पर ही शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर उसका विधि पूर्वक पूजन करना उत्तम माना गया है | इस दिन सुबह प्रात:काल में ही नित्य-कर्मों से निवृत होकर भगवान शिव कि आराधना “ऊं नमः शिवाय” मंत्र से सुरु करते हुए पूरे दिन इसी मंत्र का बारम्बार जाप करते रहना चाहिए | इस मंत्र में वह शक्ति है जो किसी अन्य मंत्र में नहीं है अत: श्रृद्धालुओं को चाहिए कि वह शिव पूजन करते समय अधिकाधिक इस मंत्र का जाप करें तथा भगवान भोलेनाथ कि कृपानुभूति प्राप्त करें | तथा इस दिन शिवमहापुराण और रुद्राष्टकम आदि का पाठ अति उत्तम माना जाता है |

महाशिवरात्रि भगवान शंकर का सबसे पवित्र दिन है। इस दिन महाशिव का पूजन तथा स्तुति करने से सब पापों का नाश हो जाता है। तथा मनुष्य के जीवन को नयी दिशा मिल जाती है | ईशान संहिता में महाशिवरात्रि कि महिमा को इस प्रकार बताया गया है:-

शिवरात्रि व्रतं नाम सर्वपापं प्रणाशनम् | आचाण्डाल मनुष्याणं भुक्ति मुक्ति प्रदायकं ||


महाशिवरात्रि विशेष:-

Lord Shiva With Parvati
एक बार माता पार्वती के ने पूछा कि हे प्रभु आपके भक्तो के लिए आपका अति उत्तम और प्रिय दिन कौनसा है तो महादेव ने उत्तर देते हुए कहा कि फाल्गुन माह कि कृष्ण चतुर्दशी मुझे अत्यंत प्रिय है तथा इस दिन जो भी भक्त मुझ में पूर्ण श्रृद्धा रखते हुए मेरा पूजन करेगा वह मुझे अत्यंत प्रिय होगा तथा उसके कभी भी सुख सम्पदा का आभाव नहीं होगा अत: चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव हैं |

अत: ज्योतिष शास्त्रों में इसे परम शुभफलदायी कहा गया है, वैसे तो शिवरात्रि हर महीने में आती है | परंतु फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि कहा गया है |

ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य-देव भी इस दिन तक उत्तरायण में प्रवेश कर चुके होते हैं तथा ऋतु परिवर्तन का यह समय अत्यन्त शुभ कहा गया हैं। शिव का अर्थ है कल्याण। शिव सबका कल्याण करने वाले हैं। तभी तो कहा जाता है कि “सत्यम शिवम सुन्दरम” अर्थात सत्य ही शिव है और शिव ही सुन्दर है |

ज्योतिषीय गणित के अनुसार चतुर्दशी तिथि को चंद्रमा अपनी क्षीणस्थ अवस्था में पहुंच जाते हैं। जिस कारण बलहीन चंद्रमा सृष्टि को ऊर्जा देने में असमर्थ हो जाते हैं। चंद्रमा का सीधा संबंध मन से कहा गया है। मन कमजोर होने पर भौतिक संताप प्राणी को घेर लेते हैं तथा विषाद की स्थिति उत्पन्न होती है। इससे कष्टों का सामना करना पड़ता है।

चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर सुशोभित है | अत: चंद्रदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए भगवान शिव कि शरण में जाना पडता है | और महाशिवरात्रि शिव की प्रिय तिथि है | अत: सभी ज्योतिषी शिवरात्रि को शिव आराधना कर सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति पाने का एकमात्र रास्ता मानते है | शिव आदि-अनादि है भगवान भोले तो अनंत है | सृष्टि के विनाश व पुन:स्थापन के बीच की कड़ी है | प्रलय यानी कष्ट,  पुन:स्थापन यानी सुख | अत: ज्योतिष में शिव को सुखों का आधार मान कर महाशिवरात्रि पर अनेक प्रकार के अनुष्ठान करने की महत्ता कही गई है।



महाशिवरात्रि को करने हेतु विशेष आवाहन और मंत्र

व्यापार में वृद्धि हेतु:-

महाशिवरात्रि के दिन शुभ समय में पारद शिवलिंग को प्राण प्रतिष्ठित करवाकर स्थापित करने से व्यवसाय में वृद्धि व नौकरी में तरक्की मिलती है तथा इस प्रयोग से मानसिक तथा आद्यात्मिक सुखो में वृद्धि होती है |

किसी भी प्रकार कि बाधा नाश हेतु:-

शिवरात्रि के प्रदोष काल में स्फटिक शिवलिंग को शुद्ध गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद व शक्कर से स्नान करवाकर धूप-दीप जलाकर निम्न मंत्र का जाप करने से समस्त बाधाओं का नाश होता है | इस शिव गायत्री मंत्र कि हवन में कम से कम १०८ बार आहुतियाँ अवश्य देवें |

|| ॐ तुत्पुरूषाय विद्महे महादेवाय धीमहि, तन्नो रूद्र: प्रचोदयात् ||

बीमारी से छुटकारा पाने हेतु:-

शिव मंदिर में शिव-लिंग पूजन कर महामृत्युंजय मंत्र के दस हज़ार मंत्रों का जाप करने से प्राण रक्षा होती है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला पर करें।

महामृत्युंजय मंत्र 

शत्रु नाश हेतु:-

शिवरात्रि को रूद्राष्टकम का पाठ २१ बार करने से शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। मुक़दमे में जीत व समस्त सुखों की प्राप्ति होती है।

मोक्ष की प्राप्ति हेतु:-

शिवरात्रि को एक मुखी रूद्राक्ष को गंगाजल से स्नान करवाकर धूप-दीप दिखा कर तख्ते पर स्वच्छ कपड़ा बिछाकर स्थापित करें। शिव रूप रूद्राक्ष के सामने बैठ कर “ॐ नम: शिवाय” के सवा लाख मंत्र जप का संकल्प लेकर जाप आरंभ करें। जप शिवरात्रि के बाद भी जारी रखना चाहिए |

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|| ॐ नम: शिवाय ||

Thursday, 7 November 2013

beejakshara mantra Lord Shiva Sadhana In Shravan Maas (Shiva Pooja In Sawan Month)

श्रावणमास में शिवशंकर (महादेव) की साधना (पूजा-अर्चना)

Shiva Linga Pooja
श्रावण के महीने में शिव पूजा का विशेष महत्व होता है, इस महीने में भगवान शिव की पूजा विधि विधान से करने वाले भक्तों पर भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा होती है | इस महीने में भगवान शिव का दूध व जल से अभिषेक करके, उनको धतुरा, आक के फूल आदि से सुसज्जित कर उनकी पूजा आरम्भ करनी चाहिए |

भगवान शिव की आराधना करने के लिए भक्तों को बिल्व पत्रों से भी पूजा करनी चाहिए | और पञ्च पत्ती वाले विल्वपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, और ऐसा भी कहा जाता है की आजकल तीन पत्तियों वाले बिल्वपत्र को ही प्रभु के अर्पित किया जाता है | भगवान शिव को जल या बिल्वपत्र चढाने के लिए साधकों को चाहिए की वह निम्न मन्त्रों के मंत्रोच्चारण के साथ ही जल, बिल्वपत्र व पुष्पादि अर्पित करे |


 भगवान शिव के जल चढाने का मंत्र

 जल धारेशिवम् अरचेत कैलाश वसतेधुवंम् |
 मुच्यतेसर्व बांधाम्योनात्र कार्य विचारणा || 

 भगवान शंकर के बिल्व पत्र चढाने के मंत्र 

 काशीवासी निवासी च काल भैरव पूजनं |
 प्रयागेमाघ मासेच बिल्वपत्रं शिवार्पणम् ||1|| 

 दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनं पापनाशनम् | 
अघोर पाप संहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम् ||2|| 

 त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं व त्रिधा युद्धं | 
त्रिजन्म पाप संहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम् ||3|| 

 अखण्डे बिल्व पत्रेश्च पुजयेशिव शंकरम् | 
 कोटि कन्या महादानं बिल्वपत्रं शिवार्पणम् ||4|| 

इन मन्त्रों से शिवाभिषेक करने के बाद साधक को चाहिए की वह भगवान शिव का जाप किसी स्त्रोत्र या निम्न “ओम् नमः शिवाय” की धुन से करे, क्योकि भगवान भोलेनाथ को ही ओंकार कहा गया है | 

शिव नाम जाप मन्त्र 

 ओम् नमः शिवाय, ओम् नमः शिवाय |
 हर हर भोले नमः शिवाय || 

 जटाधराय शिव जटाधराय | 
हर हर भोले नमः शिवाय ||

 चंद्राधराय शिव चंद्राधराय |
 हर हर भोले नमः शिवाय ||

 नागेन्द्राय शिव नागेन्द्राय | 
हर हर भोले नमः शिवाय || 

 सोमेश्वराय शिव सोमेश्वराय |
 हर हर भोले नमः शिवाय || 

 गंगाधराय शिव गंगाधराय | 
हर हर भोले नमः शिवाय || 

 नन्दीश्वराय शिव नन्दीश्वराय | 
हर हर भोले नमः शिवाय || 

इस तरह से श्रावण मास के प्रत्येक दिन शिव की पूजा व जाप करना चाहिए, और प्रतिदिन जाप व पूजा का विधान न हो पाए तो कम से कम श्रावण के प्रत्येक सोमवार को तो शिव पूजन व इन मंत्रो का जाप तो अवश्यमेव ही करना चाहिए | श्रावण में शिव पूजा से शिव अत्यधिक प्रसन्न होते है, ऐसा शास्त्रों में विदित है |

 (ओम नमः शिवाय)

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beejakshara mantra Lord Shankar Mantra (Mahadev Mantra)

भगवान् शंकर (महादेव) की वंदना 

Lord Shiva :-  शिव ईश्वर का रूप हैं। हिन्दू धर्म में भगवन शिव को प्रमुख देवताओं में से एक माना जाता है। वेदों, पुराणों और शस्त्रों में शिव के कई नाम है, तथा इनको रुद्र के नाम से भी पहचाना जाता है। भगवन शब्कर को मनुष्य की चेतना तथा मनोवृति का अन्तर्यामी माना गया है |  माता शक्ति इनकी अर्धांगिनी है जो भगवती पार्वती है। भगवान शिव के दो पुत्र कार्तिकेय (स्कन्द) और गणेश है।


भगवान शिव को अधिकांशत: योगनिद्रा और समाधी के परिपेक्ष्य में दिखया जाता है और उनकी पूजा लिंग के रूप में की जाती है। परन्तु वास्तव में भगवन शंकर योगी अवस्था में ही सभी कार्य तथा नियमन संपन्न करते है | भगवान शिव को संहार का देवता कहा जाता है ।भगवान शिव सौम्य आकृति, सरल स्वभाव एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। अन्य देवों से शिव को भिन्न माना गया है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव संहारक देव है। शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं और यह काल महाकाल ही ज्योतिषशास्त्र के आधार है, अर्थात ज्योतिष के जन्मदाता शिव को ही माना गया है |
शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी देव माना गया है, लेकिन भगवान शिव सदैव लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन रखते है।


भगवन शंकर को सबसे भोला देव माना गया है क्योकि इनको सरल स्वभाव तथा दयालु ह्रदय के साथ ही आसानी से क्षमा करने वाला माना जाता है | इसलिए इनको भोलेनाथ भी कहा जाता है | वैसे तो भगवन शिव को कई नामों से जाना जाता है जैसे:- पशुपतिनाथ, अर्धनारीश्वर, रूद्र, त्रिनेत्रधारी, नीलकंठेश्वर, लिंगम, नटराज, महादेव, शंकर तथा आदिनाथ | परन्तु शिव नाम कि महिमा अपरम्पार है |

शंकर:- शंकर शब्द दो शब्दों शम् और कर से बना है, जिसमे शम् का अर्थ है कल्याण तथा कर का तात्पर्य करने वाले से है | अतः शंकर मतलब सबका कल्याण करने वाला | भगवन शंकर आदिदेव है तथा सबका कल्याण करते है | भगवन शिव का मंत्र "ऊँ नमः शिवाय" महा मंत्र है और इस मंत्र का जाप करने से सर्वकार्य संपन्न होते है एवं भगवान शंकर कि कृपा होती है |

शिव आराधना:- भगवान शिव कि आराधना और स्तुति करने हेतु "ऊँ नमः शिवाय" महामंत्र सबसे सटीक और फलदायी मंत्र है | परन्तु शास्त्रों में श्री द्वादश-ज्योतिर्लिंग को भी शिव-पूजा में अत्यधिक महत्वपूर्ण बताया गया  है, तथा हिंदू मान्यतानुसार (शास्त्र और पुराणानुसार) जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिङ्गों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों के पाप इन लिंगों के स्मरण मात्र से मिट जाता है। और सर्वसिद्धि कि प्राप्ति होती है | अतः यह द्वादश-ज्योतिर्लिंग इस प्रकार है:-



अत: अब हम शिव स्तुति मंत्र के बारे में जानते है जो निम्न प्रकार से है:-

In Hindi:-

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् !
        सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानि सहितं नमामि !!

In English:- 

        Karpurgourm Karunavatarm Sansarsarm Bhujgendraharm |
               Sada Vasantam Hridyarvinde Bhavam Bhavani Sahitm Namami ||


भावार्थ:-  जो कपूर के समान गौर वर्ण वाले, करुना के सागर, संसार व जगत के सार अर्थात आधार, जिनके गले में नागों (सापों) का हार हो अर्थात जिन्होंने सापों का हार रूप में धारण कर रखा हो | ऐसे भगवान भोलेनाथ मेरे ह्रदय में सदैव विराजमान रहे | तथा हे भोलेनाथ मैं माता भवानी (पार्वती) सहित नमन (प्रणाम) करता हूँ |  

यह मंत्र भगवान शिव की स्तुति के लिए है | इस मंत्र का प्रयोग करने से पहले साधक को चाहिए की वह काशी की तरफ मुख करे या पूर्वाभिमुखी होकर इस मंत्र का स्मरण करे | इस मंत्र को शिव मंत्र भी कहा जाता है, और यह सुख-समृद्धि तथा सुविचार प्रदान करने वाला परम हितकारी मंत्र गया है |

** ऊँ नमः शिवाय **

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