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Saturday, 23 November 2013

beejakshara mantra Mantra To Accomplish all Wishes and Destroy Enemy

सर्वमनोकामना सिद्धि तथा शत्रु पर विजय हेतु शिव मंत्र

Lord Shiva Shankar
भगवान शिव जो कि सृष्टि के विनाशकर्ता तथा संहारकर्ता है, और हिंदू मान्यताओं के अनुसार त्रिदेवो में इनका अहम कार्य है वो है संहार करना | अर्थात देवो के देव महादेव संहारक होते हुए भी जगत का आधार है और भक्तो में परम और करुना कि मूर्ति है | मनोकामना प्राप्त करने के लिए अर्थात मनोरथ सिद्ध करने हेतु तथा शत्रु का विनाश करने हेतु इस मंत्र का प्रयोग किया जाता है | 

आदिकाल से ही भगवान शिव को कृपा करने और वर देने के लिए अग्रणी माना जाता रहा है और भगवन महादेव तो इतने भोले है कि कोई भी भक्त पूर्ण श्रृद्धा से और पूर्ण समर्पण से उनको जपता है तथा वे प्रसन्न होने पर यह नहीं देखते कि कौन उनसे क्या वर मांग रहा है, तभी तो इनको भोलेनाथ भी कहा जाता है |

अत: मेरा अभिप्राय यह है कि भगवान भोलेनाथ को भक्त का श्रृद्धा और समर्पण भाव अति प्रिय है और शास्त्रों में कहा भी जाता रहा है कि "भगवान तो प्रेम के भूखे होते है, उन्हें कोई लालच दे तो उसकी उनके सामने क्या बिसात?" अर्थात प्रभु को मानाने के लिए दिखावे और आडम्बर की जरूरत नहीं है, प्रभु को प्रेम और समर्पित भाव से भजने में ही मनुष्य का सच्चा कल्याण है |

भगवान शिव के इस मंत्र को जपने वाले भक्तों के कभी भी विपत्तियां नहीं आती है और उनके सभी कष्टों का निवारण स्वयं भोलेनाथ करते है | सर्वमनोकामना सिद्धि तथा शत्रु पर विजय प्राप्ति का मंत्र इस प्रकार है:-

In Hindi:-
नमस्तेऽआयुधायानातताय धृष्णवे,
ऊँ रुद्राय नमः |

In English:-
Namaste Aayudhayanatataay Drishnave,
Ohm Rudraay Namah: |

जाप विधि:- भगवान शिव के इस मंत्र का जाप करने वाले भक्तो को चाहिए कि वे सोमवार के दिन प्रातकाल स्नानादि से निवृत होकर शुद्ध आसन पर पूर्वाभिमुख होकर विराजमान होवे तदन्तर मंत्रारम्भ करे | और मंत्र जाप करते समय भगवान शिव का निरंतर स्मरण करते रहे | भगवान शिव के इस सर्वमनोकामना और शत्रु विजय मंत्र का फल पाने हेतु कम से कम 108 से 1108 बार जाप करे | इस प्रकार सोमवार से जाप आरम्भ करने पर प्रत्येक दिन 108 बार इस मंत्र का अगले सोमवार तक जाप करे या मनोकामना प्राप्ति तक मंत्र जाप करे | ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते है और भक्त कि मनोकामना कि पूर्ति अवश्य होती है |

इस मंत्र के जाप करने से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है तथा जमीन-जायदाद आदि विवादों का निपटारा होता है, और शत्रु पर विजय पाने के लिए भी इस मंत्र का उपयोग श्रेष्ठ माना गया है |

How to Make Enemies Friends

beejakshara mantra Mantra for Destroying Enemies

Mantra to destroy the enemy


Ram and Laxman Fight With Ravan
This is the mantra of Ramcharitmanas and by using this you can destroying the enemies and it is also used for escape evils sight. 

This is considered as most powerful mantras to destroying enemies. You should be recited 108 times in a day to get effects of this mantra.

While chanting you should keep attention on mind and don't divert your focus.

यह मंत्र रामचरितमानस से उदृत है और महाकवि तुलसीदास जी ने रामचरित-मानस में मर्यादा पुरषोत्तम श्री राम का जो वास्तविक चित्रांगन किया है, उसका उल्लेख कर पाना संभव नहीं है | अर्थात वाल्मीकि चरित रामायण का हिंदी में अनुवाद इतनी स्पष्टता से कर पाना और रामायण के गूढ़ रहस्यों और मंत्रो को शालीनता से स्पष्ट करना, वास्तविकता में एक अद्भुत कार्य था |

रामचरितमानस में श्री राम के यश, शौर्य और प्रताप को बताते हुए तुलसीदास जी कहते है कि "जो श्री राम के चरणों में रहते है अर्थात जिनको श्री राम का आश्रय प्राप्त है और जो भक्त उनकी शरण में रहते है उनसे बैर अर्थात शत्रुता करना करना खुद की विषमता को खोना है" |


कहने का तात्पर्य यह है कि जो भी कोई भी प्रभु श्री राम और उनके भक्तों से शत्रुता करता है वह अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारता है, क्योकि कि प्रभु के प्रताप से वह विषमता खो देता है | शत्रुता नाश करने और संकट के निवारण के लिए नीचे लिखे इस मंत्र का प्रयोग करे:-  

Mantra:-

बयरु न कर कहू सन कोई |
राम प्रताप विषमता खोई ||

Bayru Na Kar Kahu San Koi |
Ram Partap Vishamata Khoi ||


मंत्र जाप विधि:- रामचरितमानस के इस मंत्र का जाप करने के लिए श्री रामदरबार के सामने पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करने के पश्चात श्री राम का ध्यान करते हुए मंत्र जाप आरम्भ करे | प्रत्येक दिन संध्याकाल में मंत्र का जाप करना श्रेष्ठ रहता है, और कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए | ऐसा करने से प्रभु श्री रामचंद्र की कृपा से आपके सभी शत्रुओं का नाश होगा तथा शत्रुओं से छुटकारा मिलता है |

यह मंत्र गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महाग्रंथ रामचरितमानस से लिया गया है | और यह मंत्र अनिष्ट करने या चाहने वाले शत्रुओं का नाश करने के लिए दिया गया है | पर साधारणतया मंत्र का प्रभाव तब तक शुरू नहीं होता जब तक की मंत्र को सिद्ध नहीं कर लिया जावे, इसलिए मंत्र को सिद्ध कर लेना ही श्रेष्ठ रहता है | और जब मंत्र सिद्ध हो जावे तब इस मंत्र का प्रतिदिन कम से कम 21 बार जाप करना चाहिए, जिससे की मंत्र शक्ति बढती है और मंत्र त्वरित फलदायी हो जाता है |

और  यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि जब तक कार्य सफल नहीं होता तब तक मंत्र का जाप करते रहना ही श्रेष्ठ रहता है |

Mantra To Accomplish all Wishes and Destroy Enemy

Monday, 4 November 2013

beejakshara mantra How to Make Enemies Friends

Mantra to makes enemies as good friend 

रामचरितमानस में दिए गए इस मंत्र से बड़ा से बड़ा दुश्मन भी दोस्त की तरह व्यव्हार करने लगता है | मंत्र की चर्चा करने से पहले हम मित्र और शत्रु में जो भेद है उस पर चर्चा करेंगे | मित्र और शत्रु में जो असमानताएं होती है वह ये है कि मित्र हमेशा भला चाहता है, जबकि शत्रु यह चाहता है कि उसका शत्रु का नाश हो जाये |

और अधिकतर लोग इसे पढ़ने के बाद यही सोचेंगे की शत्रु को मित्र बनाने का क्या प्रयोजन? या शत्रु  को मित्र बनाने से क्या लाभ होगा? परन्तु मैं आपको बताता हूँ कि इसका क्या प्रयोजन है और यह क्यों आवश्यक है |

Shree Ram
कई बार हमारे जीवन काल में ऐसी परिस्थितियाँ आ जाती है जिससे हमें लगता है कि फलां पुरुष या आदमी मेरा शत्रु है और हमें इसके संपर्क में नहीं रहना चाहिए, पर हो सकता है कि वह आपकी दिमागी धारणाएं हो ! कहने का तात्पर्य यह है कि मनुष्य स्वयं विधाता तो नहीं है, और इसका क्या प्रमाण है कि जो वो सोच रहा हो वह शत प्रतिशत सही हो | अर्थात जो मनुष्य आपको शत्रु नजर आ रहा हो, वास्तव में वह आपका शत्रु न होकर किसी ओर के मायाजाल से प्रकट किया हुआ जाल हो ताकि आप बहकावे में आकार उस सज्जन और भले आदमी का संग छोड़ दे जिससे कि आपका अनर्थ चाहने वाले लोगो को मौके मिल जाये | 

मैं यह नहीं कहता कि आप जो सोचते है वह गलत है या बुद्धिहीनता है और मनुष्य की सोच सही या गलत में पहचान नहीं कर सकती, मेरा यह मत बिलकुल भी नहीं है | पर किसी को आरोपित करने से पहले अपने निर्णय पर गहनता से चिंतन अवश्य करना चाहिए और किसी कि भी बातों मैं आकार अपना निर्णय लेना बुद्धिमानी नहीं है, अत: सर्वदा अपना निर्णय स्वयं लेवें तथा सोच समझकर निर्णय लेने से ही पहचान होती है कि कौन अपना है और कौन पराया |

रामचरितमानस के इस मंत्र का उपयोग शत्रु को मित्र बनाने के लिए किया जाता है | यह मंत्र किसी भी प्रकार के शत्रु को मित्र बनाने का सामर्थ्य रखता है | यहाँ किसी भी प्रकार के शत्रु से तात्पर्य है कि, चाहे समक्ष रहने वाला शत्रु हो या छद्मवेश में रहने वाला शत्रु, सभी शत्रुओं को आपका मित्र बना देता है | यह मंत्र इस प्रकार से है:-

Mantra:-
             
Garal Sudha Ripu Karhi Mitayi |
Gopad Sindhu Anal Sitlayi ||

 गरल  सुधा रिपु करहिं मिताई | 
गौपद  सिन्धु  अनल सितलाई ||

भावार्थ:- यह मंत्र रामचरित मानस में सुन्दरकाण्ड से लिया गया है जिसमे हनुमान जी श्री राम प्रभु का नाम लेकर लंका नगरी में प्रवेश कर रहे है और मन ही मन में प्रभु श्री राम का बारम्बार स्मरण कर रहे है | तथा   इस शुभ अवसर पर भगवान शिव माता पार्वती से कहते है कि श्री राम के नाम से संसार के सारे कार्य सुगम हो जाते है और ऐसा कोई कार्य नहीं है जो प्रभु की कृपा से नहीं हो पावे | और कहते है कि "गरल सुधा रिपु करही मिताई" अर्थात जहर और अमृत आपस में बैरी होने पर भी प्रभु के प्रताप से मित्र बन सकते है, सागर भी गाय के पैर जितना हो सकता है, तथा अग्नि शीतल हो जाती है | यह सब सिर्फ श्री राम जी की कृपा से ही हो सकता है |

मंत्र जाप विधि:- जिन भक्तो को शत्रु सम्बंधित समस्याए है उनको प्रत्येक दिन इस 108 बार मंत्र का जाप करना चाहिए तथा तुलसीदास जी की इस चौपाई (मंत्र ) का निरंतर जप व् ध्यान करने से आपके शत्रु (Enemy) भी आपके मित्र बन जाते है | और रामचरितमानस के अनुसार अगर सच्ची श्रृद्धा व् विश्वास के साथ श्री राम व हनुमान का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जप किया जाये तो आपके जीवन में कभी किसी प्रकार की बाधा नही आ सकती है ! इस मंत्र को रोज कम से कम 15 से 20 बार तो अवश्य ही जपना चाहिए | मंत्र का फल त्वरित प्रभाव से पाने के लिए मंत्र को सिद्ध करना श्रेष्ठ माना गया है, मंत्र को हवन काके सिद्ध करने से मंत्र का प्रभाव शीघ्रता से होता है |

मंत्र को सिद्ध करने का विधान

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