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Thursday, 28 November 2013

beejakshara mantra Aasan Shuddhi Mantra or Purification Of Worship Seat

आसन शुद्धि मंत्र 

किसी भी तरह की पूजा स्तुति और शुभारंभ से पहले जिस आसन पर आप विराजमान होना चाहते है उस पर बैठने से पहले नीचे दिए गए इस मंत्र से आसन को शुद्ध का लेना चाहिए | तथा पूजन करने के लिए आसन का शुद्ध होना अति आवश्यक है |

आसन शुद्धि:- आसन अर्थात वह स्थान जहाँ से आप परमपिता परमेश्वर के आराधना करते है, अतएव आसन का शुद्ध होना अत्यंत आवश्यक है | पूजा करने के आसन को शास्त्रों में उच्च स्थान का दर्जा प्राप्त है क्योकि यही आसन परमेश्वर से मनुष्य के जुडाव का हेतु है | अत: इस सेतु अर्थात आसन की शुद्धि होना अति आवश्यक है |



Kusha Aashan
आसन शुद्धि मंत्र इस प्रकार से है :-

Mantra in Hindi:-

ऊँ पृथ्वीत्वया धृता लोकादेवि त्वं विष्णुना धृता,
 त्वं च धारय मां देवि पवित्र कुरु चासनम् ||

Mantra in English:-

Ohm Prithvitvaya Dhrita Lokadevi Tvam Vishnuna Dhrita, 
Tvam Cha Dharay Maam Devi Pavitra Kuru Chasanam ||

आसन शुद्धि करने हेतु इस मंत्र को बोलते समय जल से आसन पर जल के छीटें देवें | इस प्रकार से आसन कि शुद्धि होती है तथा आसन शुद्धि से ही पूजा तथा जप कि पवित्रता बढती है तथा उच्च विचारों का आवागमन होता है और शांति तथा ध्यान कि प्राप्ति होती है | यह शुद्धि आसन के साथ साथ आपके विचारों तथा मन के विचारणीय वेग को आद्यात्मिकता कि ओर अग्रसर कर जीवन को निर्मल कर देती है |

अत: कभी भी पूजन अथवा स्तुति करते समय बिना शुद्धि किये आसन पर नहीं बैठना चाहिए |

beejakshara mantra Mantra To Sanctification (Pavitrikarana)

पवित्रीकरण (शुद्धि) मंत्र 

पवित्रीकरण का मंत्र सभी प्रकार कि पूजा, नित्य उपासना, संध्याकालीन स्तुति आदि में अति आवश्यक है और अशुद्धि से पूजा करना निषेध माना जाता है |

पवित्रीकरण:- पवित्रीकरण और शुद्धि का अर्थ स्वयं तथा वातावरण कि शुद्धि ही नहीं होता है, अपितु यह धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है | यथा जब आप कभी भी पूजा पाठ अथवा स्तुति करते है तो यह कल्पना करते है कि मंदिर (पूजा स्थान) स्वच्छ है और आप भी स्नानादि से निवृत होकर पाठ पूजन कर रहे और यही पवित्रीकरण है, यह उचित नहीं है |



क्योकि बिना शुद्धि के बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि नहीं हो सकती है अत: शुद्धि सत्संग और स्तुति के लिए परम आवश्यक है |

शास्त्रों और पुराणों में शुद्धि को बड़ा महत्त्व दिया गया है, शुद्धि का अर्थ है आत्मा कि शुद्धि एवं विचारों की स्वच्छता तथा पवित्रीकरण से मन, बुद्धि तथा विचारों को शुद्ध किया जाता है | तथा इस पवित्रीकरण मंत्र से अपने आप तथा स्थान को पवित्र करके ही पूजन और शुभ कार्य आरम्भ करने से सभी तरह के कार्यों में सफलता मिलती है |

पवित्रीकरण का मंत्र इस प्रकार है:-

Mantra In Hindi:-

ऊँ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा |
यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं सः बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ||

Mantra in English:-

Ohm Apvitra: Pavitro Va SarvavasthanGatoapivaa ||
Ya: Smaretpundrikaksham Sa: Bahyabhyantar: Shuchi: ||

इस मंत्र को पूजा स्थल तथा स्वयं पर जल छिडकते हुए बोलना चाहिए, और शुद्धि की कल्पना कर, आसन की शुद्धि करने के पश्चात पूर्व या उत्तर दिशा में मुख कर बैठना चाहिए, तत्पश्चात आचमन करना चाहिए एवं पूजन का संकल्प करना चाहिए | संकल्प करने से ही पूजनकर्ता को उसका फल मिलता है |

पूजन संकल्प विधि इस प्रकार है:- संकल्प विधि 

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