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Thursday, 28 November 2013

beejakshara mantra Krishna Gayatri Mantra

कृष्ण गायत्री मंत्र

गायत्री मन्त्रों का सभी प्रकार के मन्त्रों में अहम स्थान है | इसी तरह २४ गायत्री में से कृष्ण गायत्री मंत्र भी श्री कृष्ण भगवान की स्तुति और आराधना हेतु प्रयुक्त किया जाता है | कृष्ण गायत्री मंत्र का प्रत्येक यज्ञ या शुभ कर्मों पर आहुति देने से सर्वत्र शांति और सुख बना रहता है |



In Hindi:-

ओम् देवकी नन्दनाय विद्मिहे वासुदेवाय धीमहि |
कृष्णं तन्नो: प्रचोदयात ||1||

ओम्  दामोदराय  विद्मिहे रुक्मणि वल्लभाय धीमहि |
 तन्नो: कृष्णं प्रचोदयात ||2||

ओम् क्लीं कृष्णाय नमः  
इति मूल मंत्र |

In English:-

Ohm Devaki Nandanay Vidmahe Vasudevay Dhimahi |
Krishnam Tanno: Prachodayat ||1|| 

Ohm Damodaray Vidmahe Rukmani Vallabhay Dhimahi |
 Tanno:  Krishnam Prachodayat ||2|| 

Ohm Kleem Krishnay namah:
Iti Mul Mantra |

देवकी और वासुदेव के पुत्र और तीनो लोकों में पूज्य भगवान श्री कृष्ण के भक्तों को इस कृष्ण गायत्री मंत्र और भगवान कृष्ण के मूल मंत्र का जाप करना चाहिए |

मूल मंत्र  "ओम् क्लीं कृष्णाय नमः" की जगह भक्तजन नारायणाय नमः , गोपीजनवल्लभाय नमः, और वासुदेवाय नमः  आदि का प्रयोग कर सकते है |

Click To Watch the video of "Karishna Gayatri"

Wednesday, 27 November 2013

beejakshara mantra The Glory of God's Chanting

भगवान का स्मरण और स्मरण रूपी अमृत की महिमा 

भगवतस्मरण रुपी अमृत मानव के लिए कितना जरूरी है, इस विषय की चर्चा करने से पहले मैं यह बताना उचित समझाता हूँ की भगवत स्मरण-अमृत क्या है ?

आप के मन में विचार उठ रहे होंगे की इतनी सर्व साधारण बात को क्यों बताया जाता है, पर जरूरत बताने या समझाने की नहीं है, बल्कि उसको अपनाकर जीवन में उतरने की है | और भगवान का सतत संकीर्तन और नाम जप ही भागवत नाम अमृत कहलाता है | तथा  भगवान नाम के स्मरण व नित्य चिंतन करने से मनुष्य के सभी पापों का सर्वथा नाश हो जाता है | अत: कहा गया है कि:-

हरिर्हरति पापानि दुष्टचित्तेरपिस्मृत: |
अनिच्छयाऽपि संस्पृष्टो दहत्येव ही पावक: ||      

अर्थात:- जिस प्रकार अग्नि बिना इच्छा के स्पर्श करने पर भी जला देती है, उसी प्रकार भगवान नाम भी दुष्टजनों के द्वारा स्मरण करने पर उनके समस्त पापों को हर लेता है |
अत: इसी के सन्दर्भ में भगवन ने देवर्षि नारद को उपदेश देते हुए संकेत किया है-

नाहं वसामि वैकुंठे योगिनां हृदये न च |
मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद ! ||

अर्थात:- हे देवर्षि ! मैं न तो वैकुण्ठ में निवास करता हूँ और न ही योगीजनो के ह्रदय में मेरा निवास होता है | मैं तो उन भक्तों के पास सदैव रहता हूँ जहाँ मेरे भक्त मुझको चित्त से लीं और तन्मय होकर मुझको भजते है | और मेरे मधुर नामों का संकीर्तन करते है |

"स्कन्दपुराण" में इस भगवद वचन से श्री भगवन्नाम कि महिमा और भी स्पष्ट हो जाती है-

यन्नाऽस्ति कर्मजं लोके वाग्जं मानसमेव वा |
यन्न क्षपयते पापं कलौ गोविन्दकीर्तनम् ||

अर्थात:- मन, कर्म, वाणी से होने वाले जितने भी पाप होते है वह सभी पाप श्री गोविन्द नाम संकीर्तन से विलीन हो जाते है |

अत: भगवान श्री कृष्ण कहते है कि जो भक्त मुझको अनन्य भव से भजता है मैं उसके सभी पापों को हर लेता हूँ
और  उसे परम शांति प्रदान करता हूँ | यथा-

कृष्ण कृष्णेति कृष्णेति यो मां स्मृति नित्यशः |
जलं भित्वा यथा पद्यम् नरकादुद्धराम्यहम् ||

अर्थात:- जो भक्तजन मेरे कृष्ण नाम का नित्य संकीर्तन करते है उन भक्तों को मैं नरक से भी उसी तरह बाहर निकल देता हूँ जिस तरह से जल का भेदन कर कमल बाहर निकल आता है |

अत: भगवत प्रेमी भक्तों और श्रृद्धालुओं को चाहिए कि अपने स्वविवेक को समय रहते जाग्रत करे और भगवन्नाम कि महिमा को पहचानकर इस अनमोल अमृत को अपने जीवन में घोलकर इसका आनंद लेने से ही मुक्ति संभव है |

श्री कृष्णाय नमः 

Monday, 25 November 2013

beejakshara mantra Shree Krishna Mantra

!! जगदगुरु श्री कृष्ण की वंदना !!

वेदों और पुराणों में भगवान श्री कृष्ण को जगदगुरु भी कहा जाता है | श्री कृष्ण को प्रसन्न करने हेतु इस मंत्र का जाप किया जाता है |

इस मंत्र के जाप से साधक को सभी प्रकार की विपदाओं और संकट से मुक्ति मिलती है और साथ ही साथ शारीरिक और मानसिक शांति भी प्राप्त होती है |

In Hindi:-

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनं |
 देवकी परमानन्दम कृष्णं वंदे जगदगुरुम ||

In English:-

                                                  Vasudev Sutam Devam Kanschanur Mardanam |
                                                   Devaki Parmanandanam Krishnam Vande Jagadgurum ||
  
 भावार्थ:- वसुदेवजी के पुत्र, राजा कंस और चाणूर मल्ल को मरनेवाले, माता देवकी को परम आनंद देने वाले और जगत के गुरु, ऐसे प्रभु श्री कृष्ण को में वंदन करना हूँ |

श्री कृष्ण भक्तो को इस मंत्र का प्रत्येक दिन कम से कम 108 बार संध्याकाल में जाप अवश्य करना चाहिए | इस प्रकार वंदना करने से भगवान श्री कृष्ण ओने भक्तों को निराश नहीं करते है और उनकी समस्त मनोकामनाये पूर्ण करते है |

Wednesday, 20 November 2013

beejakshara mantra How To Get Job Quickly From Mantra

शीघ्रता से रोजगार प्राप्त करने का मंत्र
                                                                           
श्रीमद्भगवतगीता के दिव्य श्लोकों के अनुष्ठान से अद्भुत लाभ:-

विश्व का कोन ऐसा व्यक्ति है जो श्रीमद्भगवतगीता की अलौकिक दिव्य महिमा से अपरिचित हो | अखिल ब्रह्मांडाधिपिती सर्वनियन्ता सर्वेश्वर भगवान श्री कृष्ण स्वयं जिसका उपदेश करते हों | गीता के दिव्य श्लोको की दिव्य शक्ति उसमे समाहित है | किन्तु जगत के अधिकांश अर्थार्थी भक्तो का आधिक्य है | जो इस लोक में धन ऐश्वर्य प्राप्त करना चाहते है उनको गीता के इस श्लोक की उपासना करनी चाहिए | जिनके करने पर त्रिविध तापों व श्री, ओज, ऐश्वर्य आदि सुलभता से प्राप्त होते है |

In Hindi:-

    अनन्याश्चिन्तयन्तो माँ ये जना: पर्युपासते |
       तेषां नित्याभियुक्तानां योग अक्षेमं वहाम्यह्म ||

In English:-

  Ananyashchintyanto Mam Ye Jana: Paryupasate |
      Tesham Nityabhiyuktanam Yogakshemam Vahamyaham ||

उक्त श्लोक का नित्य (प्रात: सांय ) संध्या समय 21 या 31 बार पाठ करने से सभी मनोरथ पूरे होकर, अभीष्ट की प्राप्ति होती है| पाठ करते समय घी का दीपक जला दे और श्रीकृष्णस्वरूप सामने रखे इससे ध्यान लगाने में सुगमता रहती है |

You will gets a job quickly from this mantra but have to jaap regularly at morning and evening with believe in the god power.

(जय श्रीकृष्ण) 

Sunday, 17 November 2013

beejakshara mantra How to get Peace and Happiness in Life

!! विवेक चतुष्टय !!

नास्ति विद्या सम चाशुर्नास्ती सत्य समं तप: |
नास्ति राग समं दुह्खं नास्ति त्याग समं सुखम ||

इस निखिल विश्व में विद्या के समान दिव्य नेत्र नहीं है ,सत्य के समान किसी प्रकार का तप नही है क्रोध के समान कोई दुःख नही है और नही है त्याग के समान कोई परम सुख |

वस्तुत: विधा की उपलब्धि से मानव ज्ञान पुंज का संचय कर सत्कर्म में अभिरत हो परमात्म सुख की अनुभूति करता है| “ विद्यया अमृतमश्नुते ” यह उपनिषद का महा वाक्य इसी का प्रतिपादन करता है इसी प्रकार सत्य पालन से प्राणी सत्य स्वरूप भगवान श्री सर्वेश्वर के अनिर्वचनीय दर्शन कर अपरिमित आनंद सुधारस का पान कर परम तृप्त होता है | “सत्यं वद” | यह वेद का उद्गोष इसलिय पुनः संसार को सचेत एवं सावधान करता है |

क्रोध प्राणी मात्र का सबसे बड़ा शत्रु है ,इससे सभी विवेकहीन होकर अकरणीय अत्यंत नीच कर्म के करने में भी नही हिचकिचाते |इसी से तो श्रीमद्भगवद्गीता में सर्वनियन्ता भगवान सर्वेश्वर श्री श्यामसुन्दर ने अर्जुन को उपदेश करते हुये आज्ञा दी है |

क्रोधाद्भ्वती संमोह संमोहा त्स्मृति विभ्रम :|
स्मृति भ्रंशाद बुद्धि नाशो बोद्धि नशात्प्रण श्यति ||
(भगवद्गीता श्लोक)

अर्थात क्रोध से मोह की उत्पति और मोह से बुद्धि का हास और बुद्धि के ह्रास से प्राणी विनाश को प्राप्त हो जाता है

अत: मानव के तीन शत्रु दिखते नहीं है, परन्तु बहुत शक्तिशाली होते है, इनको परित्याग करके ही मानव अपना कल्याण करता है |

अहंकारं बलं दर्प कामं क्रोधो परिग्रहम् |
विमुच्य निर्मम शान्तो ब्रह्म भुयाय कल्पते ||
(भगवद्गीता श्लोक)

यह मार्मिक उपदेश कर स्पष्ट ही संकेत किया है कि अहंकार , बल, दर्प, घमंड ,काम, [सांसारिक इच्छाएँ] क्रोध और परिग्रह [संग्रह का त्याग ] करने पर प्राणी अनासक्त शांत होकर परब्रह्म परमात्मा श्री कृष्ण को प्राप्त कर सकता है अतः यह महाभारत का विवेक चतुष्टय परम कल्याणकारी और नितांत आवश्यक है इसका मनन करने से इन आंतरिक शत्रु पर विजय प्राप्त कर संतोष सुख को प्राप्तकरता है, इसी में हित सन्निहित है |

beejakshara mantra Incarnation Of God And Philosophy Of Lord Avatar

भगवान का अवतार (अवतरण) कब और क्यों होता है ?

Avatars of  God
भगवान का अवतार कब और क्यों होता है, इस तथ्य को जानने के लिए सबसे पहले ये जानना अतिआवश्यक है की अवतार क्या है ?


अवतार:- भगवान समय-समय पर पृथ्वी पर अवतरित होते है, और पृथ्वी पर भगवान का मानव रूप में अवतरित होना ही अवतार कहलाता है, हमारे वेदों व शास्त्रों में अवतार होने के कई व्याख्यान देखने को मिलते है, कई बार भगवान को भी विधि का विधान भोगने के लिए पृथ्वी (मृत्युलोक) पर अवतरित होना पडता है, अंतत: भगवान का मृत्युलोक में अवतरण ही अवतार कहलाता है |




अवतार कब व क्यों होता है ?

अब हमारे मन में यह प्रश्न उठता है की भगवान क्यों अवतरित होते है और कब अवतरित होते है, और भगवान के अवतार का इस पृथ्वी लोक से क्या वास्ता है | इसका सीधा सा कारण(उत्तर) यह है की भगवान ने जब सृष्टि की रचना की थी तभी उन्होंने लोकों और कालचक्र का निर्धारण कर दिया था | भगवान ने मनुष्यों, साधकों(साधुओं) और अन्य जीवों को मृत्युलोक अर्थात पृथ्वी लोक, असुरों को पाताल लोक, और इसी तरह देवताओं को स्वर्ग लोक में विभाजित कर दिया | पर असुरों ने अपने तप और बल से बारम्बार पृथ्वी पर रहने वाले जीवों और साधुओं को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया तब भगवन अवतरित होकर उनका विनाश करने लगे | ये कई दृष्टान्त शाश्त्रों में विस्तार से दिए गए है, हम फिर से उसी पश्न पर लौटेंगे की अवतार कब व क्यों होता है |

भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध के समय (श्रीमद्भगवद्गीता में) अर्जुन को दिव्य ज्ञान का उपदेश देते हुए कहा था कि:-

 अजोऽपि सन्नव्ययात्मा भूतानामीश्वरोऽपि सन | 
प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय सम्भवाम्यात्ममायया ||
 (भगवद्गीता चतुर्थोध्याय श्लोक ६ ) 

 अर्थात:- यद्यपि में अजन्मा तथा अविनाशी हूँ, और यद्यपि में समस्त जीवों का स्वामी हूँ, तो भी में प्रत्येक युग में अपने आदि दिव्य रूप में प्रकट होता हूँ |

 यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति: भारत: | 
 अभ्युत्थानम अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम || 
 (भगवद्गीता चतुर्थोध्याय श्लोक ७ )

 अर्थात:- जब जब धर्म का ह्वास या हानि (पतन) होता है, और हे भारतवंशी अधर्म की प्रधानता होने लगती है, अर्थात मनुष्य जाति पीड़ित होकर त्राहि त्राहि करने लग जाती है, तब में धर्मं की रक्षा व उसके पुनरुत्थान के लिए अवतरित होता हूँ | अर्थात अवतार लेता हूँ |

 परित्राणाय च साधुनाम विनाशाय च दुष्कृताम |
 धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे || 
 (भगवद्गीता चतुर्थोध्याय श्लोक ८ ) 

 अर्थात:- भक्तों (साधुओं) का उद्धार करने, और दुष्टों (जो अधर्म के मार्ग पर चलते है) का विनाश करने तथा धर्मं की फिर से स्थापना करने के लिए मैं हर युग में प्रकट होता हूँ |

 अर्थात भगवान अपने प्रिय भक्तों कि पीड़ा को हरने व उनका उद्धार करने के लिए हर युग में अवतरित (अवतार) होते है, और प्रत्येक मनुष्य को उन अविनाशी भगवान का सदैव चिंतन व स्मरण करते रहना चाहिए |

(जय श्रीकृष्ण )

Saturday, 16 November 2013

beejakshara mantra How to Travel Safely (Mantra for Safe Travel)

शुभ यात्रा करने हेतु मंत्र 

Mantra for traveling safe in all the world via this mantra, this is:-

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मन |
प्रनत: क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नम: ||


महामृत्युजंय मंत्र:- चारों तरफ से संकट से घिरने पर इस मंत्र का उपयोग करना चाहिए |

ओम त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम ! 
उर्वारुकमिव बन्धनात मृत्युर्मुक्षीय मामृतात !!

उपयोग:-उपरोक्त दोनों मंत्रो को सुखद और सुरक्षित यात्रा करने के लिए घर से निकलते समय प्रवेश द्वार पर इस मंत्र का तीन बार मानसिक जप करके अपने इष्ट देव का ध्यान करके यात्रा प्रारम्भ करनी चहिये ! 

सिद्धविधि:इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए सोमवार या गुरुवार को सुबह पूर्वाभिमुख बैठकर, घी का दीपक जलाकर एक सौ आठ बार जप करके सिद्ध करना चाहिए, और इसके बाद कही भी यात्रा पर जाने से पहले इस मंत्र का तीन बार जप करने से यह मंत्र फलदायी हो जाता है और सिद्ध कि हुई विधी को साल भर बाद वापस सिद्ध करना चाहिए, इससे मंत्र का प्रभाव बढता है और यह त्वरित फलदायी होता है |                           



Friday, 15 November 2013

beejakshara mantra Shree Madhurashtakam

श्री कृष्णमधुराष्टकम

Shree Krishna
श्री मधुराष्टकम हिंदू भक्ति दार्शनिक कवि और भक्तशिरोमणि श्रीवल्लभाचार्य जी द्वारा रचित सुन्दर तथा अनुपम संस्कृत रचना है | श्री कृष्ण प्रेम में मधुराष्टकम अनूठी छाप छोडता है, भगवान कृष्ण की भक्ति में मधुराष्टकम का राग भक्ति को नया आयाम प्रदान करता है | 

मधुराष्टकम का सीधा सा तर्क यह है कि इसमें प्रभु श्री कृष्ण कि सभी मधुर और आनंदमयी लीलाओं का उल्लेख तो है ही साथ ही साथ इस भजन (अष्टम) में श्रीकृष्ण के मधुर स्वरुप के भी दर्शन होते है | 

मधुराष्टकं को बोलने या पाठ करने में जितने आनंद कि अनुभूति होती है, उतना ही आनंदमय यह श्रवणीय भी है | श्रीकृष्ण के प्रेम और रूप का परिहार्य इस मधुराष्टकम को माना जाता है |





अधरं मधुरं वदनं मधुरं
नयनं मधुरं हसितं मधुरम् |
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ||1||

वचनं मधुरं चरितं मधुरं
वसनं मधुरं वलितं मधुरम् |
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ||2||

वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः
पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ |
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ||3||

गीतं मधुरं पीतं मधुरं
भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम् |
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ||4||
करणं मधुरं तरणं मधुरं
हरणं मधुरं स्मरणं मधुरम् |
वमितं मधुरं शमितं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ||5||

गुञ्जा मधुरा माला मधुरा
यमुना मधुरा वीची मधुरा |
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ||6||

गोपि मधुरा लीला मधुरा
युक्तं मधुरं भुक्तं मधुरम् |
दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ||7||

गोपा मधुरा गावो मधुरा
यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा |
दलितं मधुरं फलितं मधुरं

                                                          मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ||8||

(इति मधुराष्टकं समाप्त)

Click Play to watch the video of Madhurashtakam 

beejakshara mantra Mantra for Getting child

!! सन्तान प्राप्ति हेतु सफल सिद्ध मंत्र !!

Shree Govinday Namah 
In Hindi:- 

देवकी सुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते |
देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं समुपाश्रितः||

In English:-
       
Devaki Suta Govinda Vaasudev Jagatpate |
        Dehi Me Tanayam Krishnam Tvamaham Samupashrit ||


अर्थ :- हे देवकी के आखों के तारे, गो एवं गोवत्स का स्वरूप धारण करने में समर्थ गोविन्द,  वासुदेव के दुलारे, जगत को उत्पन करने में समर्थ मेरी अभिलाषा पूर्ण कीजिये | हे कृष्ण मुझे सन्तान रूपी मन वांछित वरदान दे | मैं पूर्ण रूप से आपके आश्रय हूँ |

जप विधि :- कृष्ण के बालस्वरूप गोपाल की प्रतिमा का पञ्च प्रकार पूजन [स्नान, तिलक, पुष्प, धूप और दीप ] कर उपोरोक्त मंत्र का श्रद्धापूर्वक प्रतिदिन एक सौ आठ (108) बार जप करे | स्वत: संयोग बनेगा, और बाधा का निवारण होगा और पुत्र की प्राप्ति होगी| जप नियम से प्रात: व सायं को करे | जप करते समय दीपक चलता रहे |
(शेष भगवत्कृपा)

Thursday, 14 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Freedom From Phantom Spirits and Peace

गृह शांति और मृत अथवा प्रेत आत्माओं से मुक्ति के लिए 

गृह शांति और प्रेतात्माओं से मुक्ति केवल प्रभु (परमात्मा) कि कृपा से ही संभव है, क्योकि वह परमपिता परमेश्वर है और सब कुछ जो भी घटित हो रहा होता है या होने वाला होता है वह प्रभु कि ही लीला है | अत: इस परेशानी का हल भी प्रभु के पास ही होता है | 


साधारणतया: कलियुग में हनुमान जी को अग्रणी देवता के रूप में पूजा जाता है और इस युग में प्रभु के वे एकमात्र भक्त है जो हमें कलियुग के मायाजाल से बचाते है, इसलिए अगर किसी को प्रेतात्माओं का भय सता रहा हो या प्रेत आत्माओं कि मुक्ति का उपाय करना हो तो हनुमान जी का स्मरण करना चाहिए |

अथवा हनुमान जी कि प्रतिमा को प्रतिष्ठित कर, आसान पर विराजित होकर पूर्वाभिमुख हो इस मंत्र का जाप करना चाहिए :-

Mantra in Hindi:-

भूत प्रेत निकट नहीं आवे | महावीर जब नाम सुनावे ||
संकट कटे मिटे सब पीरा | जो सुमिरे हनुमत बलबीरा ||
संकट ते हनुमान छुडावे | मन क्रम वचन ध्यान जो लावे || 
Mantra in English:-

Bhut Pret Nikat Nahi Aave | Mahaveer Jab Naam Sunave |
Sankat Kate Mite Sab Peera | Jo Sumire Hanumat Balbeera || 
Sankat Te Hanuman Chudave | Man Kram Vachan Dhyan Jo Laave ||

और हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करने वाले भक्त के कभी भी किसी भी प्रकार का संकट नहीं हो सकता है | 

तथा ग्रहशांति और मृतात्माओं से छुटकारा या मुक्ति का उपाय श्रीमद्भगवद्गीता भी है अत: साधकों को गीता का पाठ करना चाहिए जिनसे उनके संकटों का निवारण हो तथा उनका कल्याण हो | और गीता का एक मंत्र भी इस दृष्टि से अति प्रभाकारी माना गया है |  श्री कृष्ण भगवान ने गीता के एक श्लोक में दिया है, इसमें अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से संकट से मुक्ति का उपाय पूछा था तब भगवान ने कहा कि:-

In Hindi:-

कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः
पृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः |
यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे
शिष्येस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम् ||

In English:-

KarpanyaDoshopahat Svabhav:
Prichchhami Tvam DharmaSammoodacheta: |
Yachchhreya: Syannishchitam Bruhi Tanme
Shishyesteaham Shadhi Mam Tvam Prapannam ||

इस प्रकार इस मंत्र का जाप करने से भक्तों के सभी प्रकार के संकट दूर हो जाते है व गीता के पाठ करने के साथ साथ अगर इस मंत्र का जाप किया जाये तो उस मनुष्य का कल्याण हो जाता है |

Wednesday, 13 November 2013

beejakshara mantra Shree Krishna Stuti ( In Sanskrit )


गोपाल कृष्ण मंत्र (श्रीकृष्ण स्तुति)

भगवान श्री कृष्ण की स्तुति और आराधना से सारे पाप धुल जाते है और सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है तथा इस बात को सिद्ध करने हेतु प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है कि प्रभु सबकुछ करने में सक्षम है |

भगवान कृष्ण की इस स्तुति को संध्याकाल में श्रीद्धाभाव से कारण चाहिए और आपने जीवन को आनन्दित बनाना चाहिए |


In Hindi:-

कस्तुरी तिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं
नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले वेणु करे कङ्कणम् |
सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कंठे च मुक्तावली:
गोपस्त्रिपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणि: ||

In English:-                  

                                            Kasturi Tilakam Lalatpatle Vakshsthale Koustubham
                                            Nasagre Varmouktikam Kartale Venu Kare Kankanam |
                                            Sarvange Harichandanam Sulalitam Kanthe Cha Muktavali:
                                             Gopstripariveshtito Vijayate GopalChudamani: ||

भावार्थ:-जिनके सिर पर कस्तूर का तिलक हो, और वक्ष स्थल पर कौस्तुभमणि हो, नाक के अग्र भाग में उत्तम मोती हो, हाथ में मुरली हो व हाथों में कंगन धारण किये हुए हो | सारे शरीर पर सुगंधित चन्दन का लेप करने वाले, और गले में मोतियों कि माला हो, जिन पर गोपियाँ लिपटी हुयी हो, गोपालों में श्रेष्ठ ऐसे श्रीकृष्ण कि सर्वदा विजय हो |

मंत्र उपयोग:-यह मंत्र भगवान श्रीकृष्ण की वंदना या स्तुति करने के लिए प्रयोग में लिया जाता है | इसका स्मरण प्रत्येक दिन सुबह या शाम संध्याकाल में करना फलदायी रहता है | और इस मंत्र के नित्य प्रयोग से घर में शांति बनी रहती है, व पारिवारिक क्लेशो से छुटकारा प्राप्त होता है ऐसा शास्त्रों में विदित है |
                                  (जय श्रीकृष्ण)

Tuesday, 12 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Getting Mental Strength

Mantra To Getting Physical, Mental And Spiritual Strength 

शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने हेतु प्रतिदिन सुबह और शाम को निम्न मंत्र का 21 बार जाप करना चाहिए और भगवान श्री कृष्ण का निरन्तर ध्यान करते रहना चाहिए |

यह षोडाक्षरी मंत्र कहलाता है और इस मंत्र का प्रभाव अद्भुत है | इस मंत्र से भगवान नारायण के दोनों रूपों श्री राम और कृष्ण की स्तुति होती है | इस मंत्र के जाप से साधक को मानसिक शांति मिलती है और क्लेशों से छुटकारा मिलता है |



मंत्र इस प्रकार से है :-

In Hindi:-

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे |
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे ||

In English:-

Hare Ram Hare Ram, Ram Ram Hare Hare |
Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare ||

अत: साधको को प्रतिदिन इस मंत्र का अधिकाधिक जाप कारण चाहिए और कीर्तन करते हुए इस मंत्र को जपते रहना चाहिए | जिससे आप सभी प्रकार की बाधाओं और चिंताओं से छुटकारा पा सकेंगे | इस मंत्र के प्रभाव से आप मानसिक शांति तथा शक्ति का संचार करेंगे |

beejakshara mantra Mantra For Pitra Dosh Nivaran & Pitra Shanti

पितृदोष और पितृशांति के लिए मंत्र :-


पितृदोष क्या है और कैसे होता है:- जब किसी भी व्यक्ति की कुंडली के नवम पर जब सूर्य और राहू की युति हो रही हो तो यह समझा जाता है कि उसके पितृ दोष योग बन रहा है | भारतीय संस्कृति में पुराणों और शास्त्रों के अनुसार सूर्य तथा राहू जिस भी भाव में बैठते है,  उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते है | यह योग व्यक्ति की कुण्डली में एक ऎसा दोष है जो सभी प्रकार के दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है, इस दोष को पितृ दोष के नाम से जाना जाता है |


व्यक्ति की कुन्डली का नवम् भाव अथवा घर धर्म का सूचक है तथा यह पिता का घर भी होता है | इसलिए अगर किसी की कुंडली में नवम् घर में ग्रहों कि स्थिति ठीक नहीं है अर्थात खराब ग्रहों से ग्रसित है तो इसका तात्पर्य है कि जातक के पूर्वजों की इच्छायें अधूरी रह गयीं थी अत: इस प्रकार का जातक हमेशा तनाव में रहता है एवं उसे मानसिक, शारीरिक तथा भौतिक समस्याओं और संकटों का सामना कारण पडता है |
अत: सपष्ट है कि जातक का नवां भाव या नवें भाव का मालिक राहु या केतु से ग्रसित है तो यह सौ प्रतिशत पितृदोष के कारणों में माना जाता है |

मुख्यतया: पितृदोष इस आधुनिक युग में पितरों के प्रति अनदेखी और खून के रिश्ते के होकर भी उन्हें भुलाने जैसे आज के इस स्वार्थवादी सभ्यता कि देन है | आजकल के इस आधुनिकरण के युग में न जाने कितने ही लोग रोज अकाल मृत्यु के शिकार हो जाते है अत: इस प्रकार कल के गाल में समाये हुए परिजनों की इच्छाएं अधूरी रह जाती है और वे मृत्युलोक के बंधन से मुक्त नहीं होकर यही भटकते रहते है और यह आशा करते है कि उनके परिजन उनके लिए श्राद्धकर्म तथा तर्पणादि कर उनको इस बंधन से मुक्त कराएँगे | पर जब उनके परिजनों द्वारा उनका तर्पण व श्राद्ध नहीं किया जाता है और यहाँ तक उन्हें याद करने तक का समय भी उनके पास नहीं होता है तब भटकते हुए परिजनों अर्थात पितरों के साथ खून का रिश्ता होने फलस्वरूप भी उनका तिरस्कार करने का फल उन्हें इस पितृदोष के रूप में प्राप्त होता है |

पितृदोष निवारण पितृशांति के उपाय  :-

पितृदोष और पितृशांति के लिये श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना सबसे उत्तम रहता है तथा पितृदोष और पितृशांति के लिए श्री कृष्ण चरित्र कथा श्रीमद्भागवत महापुराण का पाठ विद्वान ब्राह्मणों से करवाना चाहिए |
और साथ ही पितृ पूजा भी करवानी चाहिए |

पितृदोष और पितृशांति के लिये सबसे पहले श्री कृष्ण की पूजा करनी चाहिए और भगवद्गीता के 12 वें और 13वें अध्याय का पाठ, संकल्प के साथ करना चाहिए और इस पाठ को पितरों को समर्पित करना चाहिए |

इसी तरह ग्रहशांति या  सभी ग्रहों की शांति की लिए निचे लिखे इस मंत्र की 1008 आहुतियाँ देनी चाहिए :-

In Hindi:-

"ओम् नमो भगवते वासुदेवाय"

In English:-

"Ohm Namo Bhagawate Vasudeway"

तथा 
पितृदोष निवारण पितृशांति के उपाय के लिए इस मंत्र को भी पितरों के चित्र के सम्मुख बैठकर श्रृद्धा और भक्ति के साथ हवन करे और इस मंत्र का जाप करे |

In Hindi:-

ऊँ श्री सर्व
पितृ दोष निवारणाय कलेशम् हं हं सुख शांतिम् देहि फट
स्वाहा: |

In English:-

Ohm Shree Sarva 
Pitra Dosh Nivarnaay Kaleshm Han Han Sukh Shantim Dehi Fat 
Svahaa: |

इन दोनों मन्त्रों की यज्ञ या हवन में आहुतियाँ देनी चाहिए व प्रतिदिन संध्याकाल में इस मंत्र का जाप करने से आपको जन्म कुंडली में स्थित अनिष्टकारक ग्रह भी आपका कुछ भी अनिष्ट नहीं करेंगे | 

(जय वासुदेवाय नमः )

Saturday, 9 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Away Disaster & Crisis

विपत्ति निवारण के लिए श्रीकृष्ण मंत्र

KRISHNA-RADHA
सभी प्रकार की आपदाओं और विपत्तियों के तारणहार भगवान श्री कृष्ण के इस संकट नाशक मंत्र के जाप करने से साधक को सभी तरह की परेशानियों से छुटकारा मिलता है और जीवन आनंदमय बन जाता है |



विपत्ति निवारण मंत्र इस प्रकार है :-

In Hindi:-

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने |
प्रनतक्लेशनाशय गोविन्दाय नमो नमः ||

In English:-

Krishnay Vasudevay Haraye Parmatmane |
PranatKleshnashay Govinday Namo Namah: ||

किसी भी तरह की विपत्ति, दुःख या क्लेश के निवारण के लिए 21 बार इस मंत्र का जप करना चाहिए और जप करते समय एकाग्रचित्त होकर श्री कृष्ण का ध्यान करते रहे |

अगर आप ग्रह दोष से परेशान है तो सभी ग्रहों के दोषों के निवारण के लिए भगवान श्री राधामाधव (राधा-कृष्ण) के दर्शन करने चाहिए और श्रीनारायण रूप भगवान शालिग्राम का पूजन करना चाहिए |

beejakshara mantra Significance Of Shri Krishna Janmashtami

पुराणों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महात्म्य 

Yogeshwar Shree Krishna
भगवान श्रीकृष्ण, पापों को हरण करने वाले और मनमोहन छवि वाले श्यामसुन्दर का जन्मदिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मन से मनाया जाता है | इस दिन पुरे विश्व के कृष्ण भक्त वर्त या उपवास रखते है |


भगवान श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता का उपदेश देकर विश्व का कल्याण किया और धर्म की पुनर्स्थापना की थी और योग्र्श्वर भगवान श्रीकृष्ण के गीता में कहे गए वचनामृतः आज भी कई भक्तों की साधना है |

स्कन्द पुराण के मतानुसार जो भी व्यक्ति जानकर भी कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को नहीं करता, वह मनुष्य जंगल में सर्प और व्याघ्र होता है। ब्रह्मपुराण का कथन है कि कलियुग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी में अट्ठाइसवें युग में देवकी के पुत्र श्रीकृष्ण उत्पन्न हुए थे। यदि दिन या रात में कलामात्र भी रोहिणी न हो तो विशेषकर चंद्रमा से मिली हुई रात्रि में इस व्रत को करें। भविष्य पुराण में कहा गया है की श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को जो मनुष्य नहीं करता, वह क्रूर राक्षस होता है। केवल अष्टमी तिथि में ही उपवास करना कहा गया है। यदि वही तिथि रोहिणी नक्षत्र से युक्त हो तो 'जयंती' नाम से संबोधित की जाएगी। 

वह्निपुराण का वचन है कि कृष्णपक्ष की जन्माष्टमी में यदि एक कला भी रोहिणी नक्षत्र हो तो उसको जयंती नाम से ही संबोधित किया जाएगा। अतः उसमें प्रयत्न से उपवास करना चाहिए। विष्णु रहस्यादि में कहा गया है की कृष्णपक्ष की अष्टमी रोहिणी नक्षत्र से युक्त भाद्रपद मास में हो तो वह जयंती नाम वाली ही कही जाएगी।

वसिष्ठ संहिता का मत है- यदि अष्टमी तथा रोहिणी इन दोनों का योग अहोरात्र में असम्पूर्ण भी हो तो मुहूर्त मात्र में भी अहोरात्र के योग में उपवास करना चाहिए। मदन रत्न में स्कन्द पुराण का वचन है कि जो उत्तम पुरुष है। वे निश्चित रूप से जन्माष्टमी व्रत को इस लोक में करते हैं। उनके पास सदैव स्थिर लक्ष्मी होती है। इस व्रत के करने के प्रभाव से उनके समस्त कार्य सिद्ध होते हैं। विष्णु धर्म के अनुसार आधी रात के समय रोहिणी में जब कृष्णाष्टमी हो तो उसमें कृष्ण का अर्चन और पूजन करने से तीन जन्मों के पापों का नाश होता है। भृगु ने कहा है- जन्माष्टमी, रोहिणी और शिवरात्रि ये पूर्वविद्धा ही करनी चाहिए तथा तिथि एवं नक्षत्र के अन्त में पारणा करें। इसमें केवल रोहिणी उपवास भी सिद्ध है। अन्त्य की दोनों में परा ही लें।

इस तरह से कई पुराणों और उपनिषदों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महत्व बताया गया है | और श्रीकृष्ण के जन्म के पावन अवसर को जो प्रेमी भक्तजन पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से मनाते है उनका जीवन खुशियों से भर जाता है, और उसपर विपत्ति और संकट कभी नहीं आते है | शास्त्रों में तो यहाँ तक कहा गया है कि भगवान कि भक्ति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से करने वाले भक्त भवसागर से तर जाते है अर्थात मोक्ष को प्राप्त होते है |

(वासुदेव सर्वम् )

beejakshara mantra Shree Krishna Janmashtami

श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव ( जन्माष्टमी महत्व)

Bal Swaroop Shri Krishna
श्री कृष्णजन्माष्टमी का पर्व इसलिए महत्वपूर्ण है क्योकि इसी दिन द्वापर युग में दुष्टों का विनाश करने और धर्म की पुनर्स्थापना करने के लिए भगवान कृष्ण का पृथ्वीलोक पर अवतरण हुआ था | और इस दिन भाद्रपद माह (कृष्ण पक्ष) की अष्टमी तिथि होने के कारण इस पावन अवसर को हम कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में जानने लगे | 

कृष्णजन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्स्व है। जन्माष्टमी भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय तथा श्रीकृष्ण भक्त भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं।



श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को मथुरा में लिया। और इनकी माता देवकी व वासुदेव कारागृह में थे, इसलिए भगवान कृष्ण का जन्म स्थल भी मथुरा का कारागृह ही है | और उनका जन्म भी मथुरा के रजा और उनके मामा कंस का वादा करने के लिए ही हुआ था | इसीलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्तों की भक्ति से झूम उठती है। और वृन्दावन कि छठा तो देखने लायक होती है, वहाँ पर जगह जगह केवल एक ही आवाज सुनाई देती है "जय श्री कृष्ण " और "नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की" की स्वरों से वृदावन की धरा गूंज उठती है | 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन मौके पर भगवान कान्हा की मोहक छवि देखने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आज के दिन मथुरा पहुंचते हैं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मथुरा कृष्णमय हो जात है। मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है। जन्माष्टमी के दिन स्त्री-पुरुष बारह बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती है और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है। और रासलीला का आयोजन होता है।

जन्माष्टमी व्रत :-

श्रीकृष्णजन्माष्टमीका व्रत सनातन-धर्मावलंबियों और वैष्णव जनों के लिए अनिवार्य माना गया है। इस दिन उपवास रखें तथा अन्न का सेवन न करें। समाज के सभी वर्ग भगवान श्रीकृष्ण के जन्म-महोत्सव को अपनी साम‌र्थ्य के अनुसार उत्साहपूर्वक मनाएं। गौतमीतंत्रमें यह निर्देश है-

उपवास: प्रकर्तव्योन भोक्तव्यंकदाचन।
कृष्णजन्मदिनेयस्तुभुड्क्तेसतुनराधम:।
निवसेन्नरकेघोरेयावदाभूतसम्प्लवम्॥

अर्थात:- अमीर-गरीब सभी लोग यथाशक्ति-यथासंभव (जो उनसे हो सके) विधि से योगेश्वर श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाएं। जब तक उत्सव सम्पन्न न हो जाए अर्थात जब तक कन्हैयालाल का जन्म न हो जाये, तब तक भोजन ना करें। जो वैष्णव कृष्णाष्टमी के दिन भोजन करता है, वह निश्चय ही नराधम है। उसे प्रलय होने तक घोर नरक में रहना पडता है।

धार्मिक गृहस्थों के घर के पूजागृह तथा मंदिरों में श्रीकृष्ण-लीला की झांकियां सजाई जाती हैं। भगवान के श्रीविग्रह का शृंगार करके उसे झूला झुलाया जाता है। श्रद्धालु स्त्री-पुरुष मध्यरात्रि तक पूर्ण उपवास रखते हैं। अर्धरात्रिके समय शंख तथा घंटों के निनाद से श्रीकृष्ण-जन्मोत्सव मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति अथवा शालिग्राम का दूध, दही, शहद, यमुनाजल आदि से अभिषेक होता है। तदोपरांत श्रीविग्रह का षोडशोपचार विधि से पूजन किया जाता है। 

जन्माष्टमी का जागरण :-

धर्मग्रंथों में जन्माष्टमी की रात्रि में जागरण का विधान भी बताया गया है। इस दिन जागरण करने से मनुष्यों के सब पापों और सक्तों का निवारण हो जाता है और सुख व संपत्ति का आगमन होता है | कृष्णाष्टमी की रात में भगवान के नाम का संकीर्तन या उनके मन्त्रों का जाप करे |

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

अथवा

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनं !
         देवकीपरमानन्दम कृष्णं वंदे जगदगुरुम !!
इन मन्त्रों का जाप करे अथवा श्रीकृष्णावतार की कथा का श्रवण करें। श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए रात भर जगने से उनका सामीप्य तथा अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। जन्मोत्सव के पश्चात घी की बत्ती, कपूर आदि से आरती करें तथा भगवान को भोग में निवेदित खाद्य पदार्थो को प्रसाद के रूप में वितरित करके अंत में स्वयं भी उसको ग्रहण करें।

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(जय श्री कृष्ण )

beejakshara mantra Krishna Mantra to Getting Full Success

विजय प्राप्ति के लिए कृष्ण मंत्र (श्लोक)

Krishna With Arjun
अगर आपको किसी भी क्षेत्र में विजय प्राप्त
करनी हो या जीवन में आने वाली विपरीत परिस्थितियों में आगे बढना हो तो श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक का जाप करना चाहिए |

In Hindi:-

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति: भारत: |
अभ्युत्थानम अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम ||
(भगवद्गीता चतुर्थोध्याय श्लोक ७ )


In English:-

Yada Yada Hi Dharmasya Glanirbhavati Bharat: |
Abhyutthanam Adharmasya Tadatmanam Srijyamyaham ||
                                                             (Bhagavatgita Chapter 4, Shlok 7 )

सभी प्रकार की विजय और श्री, संपत्ति आदि प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन नीचे दिए गए मंत्र का कम से कम 108 बार जप करे |

In Hindi:-
यत्र योगेश्वरः श्रीकृष्ण: यत्र पार्थो धनुर्धर: |
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ||

In English:-
Yatra Yogeshvar: Shrikrishna Yatra Partho Dhanurdhar: |
Tatra Shrirvijayo Bhutirbhurva Nitirmatirmam ||

Friday, 8 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Getting Married Soon

शीघ्र विवाह हेतु कृष्ण मंत्र

Shri Krishna
ऐसे पुरुष जिनका विवाह नहीं हो रहा है या किसी बाधा के कारण विवाह में विलम्ब हो रहा है, तो उन्हें श्री कृष्ण के इस मंत्र का नित्य 108 बार जाप (जप) कारण चाहिए, जप करते समय श्री कृष्ण का ध्यान कारण चाहिए साथ ही आसान पर पूर्वाभिमुख होकर जप कारण श्रेष्ठ रहता है |



पुरुषों के लिए विवाह मंत्र :-

In Hindi:-

“ ऊँ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय
    गोपीजनवल्लभाय स्वाहा |”

In English:-
"Ohm Kleem Krishnay Govinday
GopijanVallabhay Swaha"


कन्याओं के लिए विवाह मंत्र :-

In Hindi:-

कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि |
नंदगोपसुतं देवि पतिं में कुरु ते नमः ||

In English:-

Katyayani Mahamaye MahayoginyDhishvari |
Nandagopsutam Devi Patim Me Kuru Te Namah: ||

और जिन कन्याओं का विवाह नहीं हो रहा हो या किसी कारणवश विवाह में विलम्ब हो रहा हो तो उन कन्याओं को श्री कृष्ण जैसे सुन्दर पति की प्राप्ति के लिए माता कात्यायनी के इस मंत्र का प्रतिदिन १०८ बार जप कारण चाहिए और जप वैसे ही श्रद्धा से करें जैसे द्वापर युग में श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए गोपियों ने जाप व साधना की थी |

ऐसी श्रद्धा व भक्ति से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते है व मनोकामना पूर्ण करते है |

Tuesday, 5 November 2013

beejakshara mantra Krishnashtakam in Sanskrit

!! Shree Krishnashtakam !!
!! श्री कृष्णाष्टकं !!

भजे व्रजेकमण्डनं समस्तपापखण्डनं
         स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव नन्दनन्दनम !
सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं
              अनङ्गरङ्गसागरम् नमामि कृष्णनागरम !1!!

मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं
            विधुतगोपशोचनं नमामि पद्यलोचनं !
करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरं
                महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्णवारणं !2!!

कदम्बसूनकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं
             व्रजान्गनैकवल्ल्भं नमामि कृष्णदुर्लभम् !
यशोदया समोदया सगोपया सनन्दया
            युतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकं !3!!

सदैव पादपङ्कजम् मदीयमानसे निजं
          दधानमुत्तमालकं नमामि नन्दबालकं !
समस्तदोषशोषणं समस्तलोकपोषणं
               समस्तगोपमानसं नमामि नन्दलालसम् !4!!

भुवो भरावतारकं भवाब्धिकर्णधारकं
            यशोमतीकिशोरकं नमामि चित्तचोरकम् !
दृगन्तकान्तभंगिनं सदासदालसंगिनं
              दिने दिने नवं नवं नमामि नन्दसंभवं !5!!

गुणाकरं सुखाकरं कृपाकरं कृपापरं
            सुरद्विषन्निकन्दनं नमामि गोपनन्दनं !
नवीनगोपनागरं नवीनकेलिलंपटम्
               नमामि मेघसुन्दरं तदित्प्रभालसत्पटम् !6!!

समस्तगोपनन्दनं हृदम्बुजैकमोदनं
             नमामि कुन्ज्मध्यगं प्रसन्नभानुशोभनम् !
निकामकामदायकं दृगन्तचारुसायकं
            रसालवेणुगायकं नमामि कुञ्जनायकं !7!!

विदग्धगोपिकामनोमनोज्ञतल्पशायिनं
         नमामि कुञ्जकानेन प्रवृद्धवन्हिपयिनं !
  यदा तदा यथा तथा तथैव कृष्णसत्कथा
            मया सदैव गीयतां तथा कृपा विधीयताम् !
  प्रमाणिकाष्टकद्वयं जपत्यधीत्य यः पुमान्
             भवेत्स नन्दनन्दने भवे भवे सुभक्तिमान् !8!!

  Click Play to Listen & Watch "Krishnashtakam"

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