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Sunday, 1 December 2013

beejakshara mantra Shri Ram Gayatri Mantra & Ram Mantra

श्रीराम गायत्री मंत्र 

ओम् दशरथये विद्मिहे सीता वल्लभाय धीमहि |
तन्नो: राम: प्रचोदयात ||

श्रीराम मूल मंत्र 

ओम् ह्रीं ह्रीं रां रामाय नमः  
इति राम मूल मंत्र |

In English:-
Shri Ram Gayatri Mantra

Ohm Dasharathaye dashrathaye Vidmahe Sita Vallabhay Dhimahi |
Tanno: Ram: Prachodayat || 

Shri Ram Mula Mantra

Ohm Hrim Hrim  Ram Ramay Namah
Iti Ram Mul Mantra |

We are telling you the most important mantra for get rid from any problem. This mantra is amazing and jaap  regularly to feel the effects of this mantra.

(Jai Ramchandraye Namah)

Friday, 29 November 2013

beejakshara mantra Gayatri Mantra Japa For Accomplish Purpose

विशेष उद्देश्य तथा प्रयोजन सिद्धि हेतु गायत्री मंत्र का जाप (सम्पुट विधि)
शास्त्रों में प्रत्येक मंत्र को अति प्रभावकारी और फलदायी माना गया है, तथा प्रत्येक मंत्र की कुछ सीमाएं और परिमाप होता है और उनके लिए साधक को पूर्ण सावधानी रखने की आवश्यकता होती है | परन्तु अगर हम विशेष प्रयोजन की बात करे तो मंत्र जाप तभी सार्थक होता है जब किसी विशेष कार्य हेतु सम्पुट लगाकर तथा इच्छित संकल्प के साथ जाप किया जाये | साधको और मंत्र जाप करने वालों के लिए सम्पुट मंत्र कोई नया शब्द नहीं है, और जो नहीं जानते उनको मैं बता देता हूँ की सम्पुट मंत्र वह होता है जो किसी मंत्र के बाद बोला जाता है और हर मंत्र की पुनरावृति के साथ ही इस मंत्र का जाप होता है | इसे सम्पुट मंत्र कहते है |
 
यहाँ हम गायत्री मंत्र के साथ सम्पुट विधि से प्रयोजन सिद्धि के बारे में चर्चा कर रहे थे | गायत्री मंत्र वेदमाता गायत्री का मंत्र है और इस मंत्र को मनवांछित फल देने वाला तथा अति उत्तम माना गया है | 
किसी विशेष उद्देश्य के लिए या अपना प्रयोजन सिद्ध करने हेतु गायत्री मंत्र का जाप इस विधि से करें:- 
  • सर्वप्रथम स्नानादि से निवृत होकर, स्वच्छ आसन लेकर पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके आसन पर बैठिये |
  • अब सबसे पहले गायत्री मन्त्र का आवाह्न करे तथा जाप आरम्भ करे |
  • तत्पश्चात जो भी कार्य आप करना चाहते है उसका संकल्प लेकर पूर्ण श्रृद्धा से माता भगवती गायत्री के चरणों में अर्पित कर देवें |
  • अब जाप आरम्भ करे तथा गायत्री मंत्र के बाद आपने जो भी सम्पुट लिया है उसका पाठ करे और यह क्रम आपको प्रत्येक मंत्र के बाद दोहराना होगा |
इस प्रकार सम्पुट लगाकर आप किसी भी मन्त्र का प्रयोग कर मनवांछित कार्य की सिद्धि प्राप्त सकते है, तथा इसके लिए आपको गायत्री माता में पूर्ण आस्था तथा विश्वास होना परम आवश्यक है | अत: आपको जाप करते  समय पूर्ण एकाग्रभाव से माँ भगवती का ध्यान करते रहना चाहिए |
कुछ विशेष और सर्वविदित सम्पुट जो प्रयोजन सिद्धि है, इस प्रकार है:-  
सुख सम्पति की प्राप्ति के लिए (Mantra To Happiness & prosperity):-सुख सम्पति की प्राप्ति के लिए गायत्री मंत्र जाप के साथ साथ इस मंत्र को सम्पुट लगाकर श्रृद्धा से माता गायत्री का ध्यान करते हुए जप करना चाहिए |

सम्पुट मंत्र:-
!! ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं !!
संतान प्राप्ति के लिए (Mantra To Get Child):- जिन लोगों को संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ है, या जिनको इच्छित संतान की कामना हो उन्हें इस मंत्र का सम्पुट गायत्री मंत्र के साथ प्रयोग करना चाहिए | और यह ध्यान रहे की जाप अर्थात मन्त्रों की संख्या प्रतिदिन समान रहे | सम्पुट मंत्र इस प्रकार है:-

सम्पुट मंत्र:- 
!! ऊँ श्रीं ह्रीं क्लीं !!

विघ्न बाधा निवारण हेतु (Mantra To Get Rid From Disturbance And Interruption):- किसी भी प्रकार की विघ्न बाधा आने पर गायत्री मंत्र के साथ इस सम्पुट का उपयोग करने से माता भगवती की कृपा से सारे विघ्न दूर हो जाते है |

सम्पुट मंत्र:-
!! ऊँ ऐं हीं क्लीं !!

मनोकामना सिद्धि के लिए (Mantra To Fulfillment All Wishes):- मनोकामना सिद्धि प्राप्त करने हेतु गायत्री मंत्र के साथ इस मंत्र के प्रयोग से सारे मनोरथ पूरे हो जाते है | तथा माता गायत्री का श्रृद्धा पूर्वक ध्यान करना चाहिए |

सम्पुट मंत्र:- 
!! ऊँ आं ह्रीं क्लीं !!

विद्या प्राप्ति हेतु मंत्र (Mantra To Getting Lore):- विद्या की प्राप्ति हेतु गायत्री मंत्र के साथ इस सम्पुट मंत्र का श्रृद्धा पूर्वक जाप करना चाहिए | जिससे की माता गायत्री की कृपा से विद्या प्राप्त होती है |

सम्पुट मंत्र:- 
!! ऊँ ऍ ओम् !!

गायत्री मंत्र के सम्पुट जाप के बाद हवन करना परमावश्यक है, क्योकि हवन करने से पुण्यफल में दुगुनी वृद्धि होती है और हवनकर्ता से माता भगवती गायत्री अत्यंत प्रसन्न होती है और साधक पर उनकी अपार कृपा होती है |

गायत्री मंत्र का विधि विधान और बीज गायत्री मंत्र:- गायत्री मंत्र 

Thursday, 28 November 2013

beejakshara mantra Krishna Gayatri Mantra

कृष्ण गायत्री मंत्र

गायत्री मन्त्रों का सभी प्रकार के मन्त्रों में अहम स्थान है | इसी तरह २४ गायत्री में से कृष्ण गायत्री मंत्र भी श्री कृष्ण भगवान की स्तुति और आराधना हेतु प्रयुक्त किया जाता है | कृष्ण गायत्री मंत्र का प्रत्येक यज्ञ या शुभ कर्मों पर आहुति देने से सर्वत्र शांति और सुख बना रहता है |



In Hindi:-

ओम् देवकी नन्दनाय विद्मिहे वासुदेवाय धीमहि |
कृष्णं तन्नो: प्रचोदयात ||1||

ओम्  दामोदराय  विद्मिहे रुक्मणि वल्लभाय धीमहि |
 तन्नो: कृष्णं प्रचोदयात ||2||

ओम् क्लीं कृष्णाय नमः  
इति मूल मंत्र |

In English:-

Ohm Devaki Nandanay Vidmahe Vasudevay Dhimahi |
Krishnam Tanno: Prachodayat ||1|| 

Ohm Damodaray Vidmahe Rukmani Vallabhay Dhimahi |
 Tanno:  Krishnam Prachodayat ||2|| 

Ohm Kleem Krishnay namah:
Iti Mul Mantra |

देवकी और वासुदेव के पुत्र और तीनो लोकों में पूज्य भगवान श्री कृष्ण के भक्तों को इस कृष्ण गायत्री मंत्र और भगवान कृष्ण के मूल मंत्र का जाप करना चाहिए |

मूल मंत्र  "ओम् क्लीं कृष्णाय नमः" की जगह भक्तजन नारायणाय नमः , गोपीजनवल्लभाय नमः, और वासुदेवाय नमः  आदि का प्रयोग कर सकते है |

Click To Watch the video of "Karishna Gayatri"

Wednesday, 27 November 2013

beejakshara mantra Lord Hayagriva Gayatri Mantra

|| श्री हयग्रीवा गायत्री मंत्र ||

भगवान हयग्रीव 



In Hindi:-

ऊँ वाणीश्वराय विद्महे हयग्रीवा धीमहि |
तन्नो: ह्याग्रीवः प्रचोदयात ||

In English:-

Ohm Vanishvaraay Vidmahe Hayagrivay Dhimahi |
Tanno: Hayagriva: Prachodayat ||

हयग्रीव विष्णु के अवतार थे। जैसा कि नाम से स्पष्ट है उनका सिर घोड़े का था और शरीर मनुष्य का। वे बुद्धि के देवता माने जाते हैं। भगवान हयग्रीव के इस गायत्री मंत्र के जाप से सारे भय नष्ट हो जाते है तथा हयग्रीव भगवान की कृपा होती है |

beejakshara mantra Lord Yama Gayatri Mantra

श्री यमराज गायत्री मंत्र  ( Gayatri Mantra For Lord of Death )

मृत्यु के देवता:- यमराज



In Hindi:-

ऊँ सूर्याय पुत्राय विद्महे महाकालाय धीमहि | 
तन्नो: यमः प्रचोदयात ||

In English:-

Ohm Suryay Putray Vidmahe Mahakalay Dhimahi |
Tanno Yama: Prachodayat ||


मृत्यु के देव श्री यमराज के इस गायत्री मंत्र का सदैव जाप करने वाले प्राणियों में मृत्यु का भय नहीं रहता है और इस मंत्र को श्रृद्धा पूर्वक जाप करने से अकाल मृत्यु हमेशा के लिए टल जाती है |

beejakshara mantra Goddess Tulsi Gayatri Mantra

|| श्री तुलसी गायत्री मंत्र ||

Tulsi



In Hindi:-

ऊँ त्रिपुराय विद्महे तुलसी पत्राय धीमहि | 
तन्नो: तुलसी प्रचोदयात ||

In English:-

Ohm Tripuray Vidmahe Tulsi Patray Dhimahi |
Tanno: Tulsi Prachodayat ||

तुलसी माता के इस गायत्री मंत्र जाप से मन शांत होता है तथा मन में सेवाभाव का संचार होता है | तथा गायत्री मंत्र के साथ इस मंत्र का ध्यान करने से गृह क्लेश आदि बाधाओं से मुक्ति मिलती है |

beejakshara mantra Shree Agni Gayatri Mantra

श्री अग्नि गायत्री मंत्र

श्री अग्नि देव को वेदों में आग अर्थात तेज का देवता माना गया है, और सभी यज्ञादि कार्यों को अग्नि देव के सहायतार्थ ही संपन्न किया जाता है | पुरानों में यह भी मान्यता है कि आप यज्ञ और हवं में जो कुछ भी अग्नि में अर्पित करते है वह सभी देवताओं तथा पितरों को प्राप्त हो जाता है |


Agni Dev
पुराणों के अनुसार अग्नि देव के दो सिर है तथा पत्नी का नाम स्वाहा, उनका वाहन मेंढा (भेड़) है, और ऋग्वेद के अनुसार इनको इन्द्रा और वरुण देवता के समतुल्य माना और पूजा जाता है |

अत: अग्नि देव गायत्री मंत्र इस प्रकार है :-

In Hindi:-

ऊँ महाज्वालाय विद्महे अग्नि मध्याय धीमहि |
तन्नो: अग्नि प्रचोदयात ||

In English:-

Ohm Mahajwalay Vidmahe Agni Madhyay Dhimhi |
Tanoo: Agni Prachodayat ||

इस अग्नि गायत्री मंत्र का जप करने से मन और तन में तेजस्विता (तेज) आता है | तथा अग्नि और उष्णता सम्बन्धी कष्टों का निवारण होता है |

Tuesday, 26 November 2013

beejakshara mantra Hanuman Gayatri Mantra

हनुमान गायत्री मंत्र

Bajarang Bali Hanuman
हनुमान गायत्री महिमा

गायत्री मंत्र को जाप करने वाले और सात्विक मन्त्रों में श्रेष्ठ माना गया है | और माता भगवती कि कृपानुसार गायत्री मंत्र को विभिन्न वर्गों में भिभाजित किया गया है तथा यज्ञ और हवन में इन मंत्रो की आहुति को अत्यधिक महत्व दिया जाता है और शुभ माना जाता है | 

किसी भी यज्ञ या हवन के शुरुआत में सभी गायत्री मंत्रो की आहुति को अति उत्तम माना जाता है |

गायत्री के मंत्रो को कई देवताओं के श्रेणी में रखते हुए हर देव का गायत्री मंत्र और मूल मंत्र बनाया गया है जो अति प्रभावशाली है |
नीचे दिया हुआ मंत्र हनुमान गायत्री मंत्र कहलाता है,  इस मंत्र के जाप से हनुमान जी प्रसन्न होते है और भक्तों की उन पर कृपा होती है | मंत्र निम्न प्रकार से है:- 

In Hindi:-


ओम् आंजनेयाय विद्मिहे वायुपुत्राय धीमहि |
तन्नो: हनुमान: प्रचोदयात ||1||

ओम् रामदूताय विद्मिहे कपिराजाय धीमहि |
तन्नो: मारुति: प्रचोदयात ||2||

ओम् अन्जनिसुताय विद्मिहे महाबलाय धीमहि |
तन्नो: मारुति: प्रचोदयात ||3||

ओम् ह्रीं ह्रीं हूँ हौं हृ: 
इति मूल मंत्र |

In English:-


Ohm Aanjeyay Vidmahe Vayuputray Dhimahi |
Tanno: Hanuman: Prachodayat ||1||

Ohm Ramdutay Vidmahe Kapirajay Dhimahi |
Tanno: Maruti: Prachodayat ||2|| 

Ohm Anjanisutay Vidmahe Mahabalaay Dhimahi |
Tanno: Maruti: Prachodayat ||3|| 

Ohm Hrim Hrim  Hum Houm Hri:
Iti Mul Mantra |

हनुमानजी के भक्तों को इस हनुमत गायत्री मंत्र का जाप अवश्य कारण चाहिए तथा साथ में हनुमत मूल मंत्र का जाप भी श्रेष्ठ होता है | इस मंत्र का ध्यान व स्मरण करने मात्र से ही हनुमानजी प्रसन्न होते है व भक्तों के संकट और पीड़ा को हर लेते है |

जाप विधि:- प्रत्येक मंत्र को जपने और स्मरण करने का विधान होता है, और भक्तो को चाहिए कि वे विधि पूर्वक ही प्रत्येक मंत्र का जाप करे | इस हनुमान गायत्री मंत्र को मंगलवार या शनिवार के दिन प्रातकाल शुद्ध होकर आसन पर पूर्वदिशाभिमुख होकर विराजमान होकर मंत्र का जाप आरम्भ करना चहिये | इस प्रकार हनुमान जी का स्मरण करते हुए कम से कम 108 बार मंत्र जाप करे | भक्त चाहे तो मंत्र को हवन या यज्ञ विधि से सिद्ध भी कर सकते है |

Click To Watch the video of "Hanuman Gayatri"

Monday, 25 November 2013

beejakshara mantra Lord Shiva Gayatri Mantra

शिव गायत्री मंत्र

In Hindi:-
ओम् महादेवाय विद्मिहे रुद्रमुर्तये धीमहि |
तन्नो: शिव: प्रचोदयात ||

ओम् सं सं सं ह्रीं ऊँ शिवाय नमः 
इति मूल मंत्र |

In English:-

Ohm Mahadevay Vidmahe Rudramurtaye Dhimahi |
Tanno: Shiva: Prachodayat || 

Ohm San San San Hrim Om Shivay Namah: 
Iti Mul Mantra |

भगवान भोलेनाथ के गायत्री मंत्र का जाप करने से सभी बाधाओं और आपदाओं से मुक्ति मिलती है | और मंत्र जाप करते समय मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए अथवा कशी की तरफ मुख करके जाप करना चाहिए, ऐसा करने से जप सफल व फलदायी होता है |

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Sunday, 24 November 2013

beejakshara mantra Lakshmi Mantra For Become Rich & Wealthy

लक्ष्मी गायत्री मंत्र

Mahalakshmi Mata
In Hindi:-


ओम् महादैव्ये विद्मिहे विष्णुपत्न्ये च धीमहि |
तन्नो: लक्ष्मी: प्रचोदयात ||

In English:-

Ohm Mahadaivye Vidmahe Vishnupatnye Cha Dhimahi |
Tanno: Lakshmi: Prachodayat ||

भारतीय संस्कृति में या हिंदू धर्म के मान्यतानुसार लक्ष्मी माता को धन सम्पदा तथा ऐश्वर्य प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है |

लक्ष्मी मंत्र के नित्य जाप या विधिपूर्वक जाप  करने से माता लक्ष्मी की कृपा होती है, और माता लक्ष्मी का श्रृद्धा पूर्वक ध्यान करते हुए नित्य इस मंत्र का स्मरण करने वालों को धन व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है | और माता गायत्री का भी विशेष स्नेह बना रहता है |

माता लक्ष्मी का सिद्ध बीज मंत्र :- सिद्ध लक्ष्मी बीज मंत्र 

Click to Watch the video of "Lakshmi Gayatri"


Siddha Lakshmi Beej Mantra

Saturday, 23 November 2013

beejakshara mantra Mantra To Top In Exam

सरस्वती गायत्री मंत्र
 
Goddess Saraswati
In Hindi:-

ओम् एं वाग्दैव्ये क विद्मिहे कामराजाय धीमहि |
तन्नो: देवी प्रचोदयात ||


In English:-

Ohm Anm Vagdaivye Ka Vidmahe Kamrajay Dhimahi |
Tanno: Devi Prachodayat || 

इस सरस्वती मंत्र के नित्य जाप या विधिपूर्वक जाप  करने से माता सरस्वती की कृपा होती है, और विद्या और मस्तिष्क सम्बन्धी सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है | और विद्यार्थियों को इस मंत्र के जाप से परीक्षा में मनचाहा परिणाम प्राप्त होता है |
                                                      (जय वीणावादिनी दैवी नमो नमः)

Thursday, 21 November 2013

beejakshara mantra Benefits of Chanting Gayatri Mantra

गायत्री मंत्र के प्रयोग से लाभ तथा प्रभावकारी विधान

Gayatri Mantra
वैसे तो गायत्री मंत्र को महा मंत्र माना गया है, पर इसे बीज मंत्र भी कहा जाता है और इसके जाप और पूजन का एक अलग विधान होता है | गायत्री मंत्र का जाप करने वाले को उसके जीवनकाल में कभी भी विपत्तियों से सामना नहीं करना पडता है और उसकी सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण हो जाती है ऐसा शास्त्र कहते है | पर मैं उन्हीं शास्त्रोंनुसार कुछ फलदायी प्रयोग आपके सम्मुख प्रकट कर रहा हूँ |



"श्री" लक्ष्मी प्राप्ति हेतु प्रयोग (Mantra  for Obtaining Property):- श्री प्राप्ति हेतु बिल्व वृक्ष की लकड़ी (समिधा) से सात दिनों तक गायत्री मंत्र की प्रतिदिन दो सौ आहुतियाँ करने वाला साधक "श्री" अर्थात लक्ष्मी प्राप्त करता है, और सवभाव से अति चंचल और एक जगह स्थिर न रहने वाली माता लक्ष्मी उस साधक के घर निवास करती है |

अपमृत्यु तथा भयनाश हेतु (Mantra for Unnatural death & destroy the fear):- शमी की समिधा अर्थात लकड़ी, अन्न, क्षीर और घी से प्रतिदिन सात दिनों तक गायत्री मंत्र की सौ-सौ आहुतियाँ देने से सभी प्रकार का भय दूर होता है |


मृत्यु भय से मुक्ति हेतु (Mantra to get rid from fear of death):- इसके लिए साधक को केवल दूध पीकर गायत्री मंत्र का श्रृद्धा एवं भक्तिपूर्वक एक सप्ताह तक जाप करने से, मृत्यु भय से मुक्ति मिलती है और साथ ही मंत्र शक्ति से वह कितना भी पापी रहा हो यमलोक में नहीं जाता है अर्थात मंत्र के पुण्य प्रभाव से वह यम पाश से मुक्त हो जाता है |

विजय प्राप्ति हेतु(Mantra to obtaining Victory):- विजय कि प्राप्ति के लिए साधक को मदार कि लकड़ी से गायत्री मंत्र का हवन करना चाहिए, इस प्रकार करने से वह सभी क्षेत्रों में विजय होता है |

दीर्घायु होने के लिए(Mantra for long life):- लंबी आयु अर्थात दीर्घायु होने के लिए पलाश के अग्रभाग वाली लकड़ी से गायत्री मंत्र का हवन करने से साधक को दीर्घायु की प्राप्ति होती है |

मनवांछित पुत्र की प्राप्ति के लिए(Mantra to achieve the best son):- मनचाहा पुत्र प्राप्ति के लिए गायत्री मन्त्रों के साथ खीर का हवन करे तथा इस  खीर को सूर्य देव को अर्पण कर ऋतुस्नाता ब्राहमणी को भोजन करावें | इस प्रकार करने से आपको श्रेष्ठ पुत्र कि प्राप्ति होगी |

सिद्धियाँ प्राप्ति हेतु(Mantra to achieve perfection):- जो मनुष्य तथा साधक लगातार पांच वर्षों तक पूर्ण श्रृद्धा तथा भक्तिभाव से गायत्री मंत्र का जाप करता है, उसे आठों सिद्धियों कि प्राप्ति होना निश्चित है |

ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति(To get rid from brahm Murder):- जिन लोगों को ब्रह्म हत्या का पाप भूलवश या जाने-अनजाने कैसे भी लगा हो, ऐसे मनुष्यों को चाहिए कि वह किसी विद्वान ब्राह्मण को बुलाकर तीन हजार बार गायत्री मंत्र का जाप तथा हवन कराये, इस प्रकार उन्हें ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिलेगी |

गो हत्या के पाप से मुक्ति(To get rid from cow slaughter):- गो-हत्या या गो-वध सबसे बड़ा अधर्म और पाप माना गया है, और इसके लिए कोई भी सजा बहुत तुच्छ होगी, पर शास्त्रानुसार इस पाप से मुक्ति के लिए बारह दिनों तक प्रतिदिन तीन-तीन हजार गायत्री मन्त्रों का जाप तथा हवन करे |

(जय भगवती गायत्री माता)

Wednesday, 20 November 2013

beejakshara mantra Successful Gayatri Mantras for Happiness, Prosperity & Curing Diseases

अनिष्ट (कष्ट- विपत्ति- आपदा) निवारण हेतु गायत्री मंत्र का प्रयोग 

ग्रह शांति हेतु(Mantra for peace of the Planet):- ग्रह शांति के लिए दूध की लकड़ी से एक हजार (1000) गायत्री मंत्रो का जाप करके हवन करने से सभी तरह के ग्रहों कि शांति होती है | तथा दूध की लकड़ी के बजाय शमी कि लकड़ी हो तो उसे अति उत्तम माना गया है, इस प्रकार हवन तथा पाठ करने से आपके सभी प्रकार के भौतिक रोग और व्याधि नष्ट हो जाते है और साथ ही साथ सभी ग्रह भी भगवती गायत्री की कृपा से शांत हो जाते है |
Bhagawati Gayatri 



परम शांति के लिए(Mantra for ultimate peace):- परम शांति के लिए पीपल, पाकड़, गूलर और वट की समिधाओं (लकड़ी) से गायत्री मंत्र का हवन करने के पश्चात हाथ में जल लेकर भगवान सूर्य को तर्पण करना चाहिए, इस प्रकार से आपको परम शांति कि प्राप्ति होती है |

विष का प्रभाव नष्ट करने के लिए(Mantra for destroy the toxin):- गायत्री मन्त्र अक जाप करते हुए कुश का स्पर्श करने से माता गायत्री की कृपा फलस्वरूप विष का प्रभाव कम हो जाता है |

मिर्गी रोग से मुक्ति के लिए(Mantra to cure epilepsy ):- मिर्गी रोग से मुक्ति पाने के लिए अपामार्ग के बीजों से गायत्री माता का एक हजार मन्त्रों से हवन करे |

चेचक रोग से शांति हेतु(Mantra to cure smallpox):- दूध, दही तथा घृत से प्रिटिं गयात्रो मंत्र का एक सौ आठ बार हवन करने से चेचक रोग शांत हो जाता है और पीड़ा नहीं रहती है |

कुष्ठ रोग निवारण हेतु(Mantra for leprosy prevention):- कुष्ठ रोग के लिए सोमलता कि गाँठ को अलग-अलग करके दूध में डाले, और अमावस्या के दिन गायत्री मन्त्र से हवन करने से कुष्ठ रोग में आशातीत लाभ होता है |

सभी व्याधियो के नाश हेतु(Mantra to cure all diseases):- गुरूच को खंड-खंड करके दूध में भिगोने के पश्चात अग्नि में आहुति देवे, तथा भक्तिपूर्वक गायत्री मंत्र का ध्यान करे | इस प्रकार हवन करने से समस्त व्याधियो का नाश होता है |

भगवती माता गायत्री कि कृपा से सभी प्रकार कि आपदा और व्याधियों से छुटकारा मिलता है इसमें कोई संदेह नहीं है, बस आवश्यकता है तो श्रृद्धा, प्रेम और समर्पण की, यदि कोई भक्त पूर्ण श्रृद्धा और प्रेम से माता गायत्री के मन्त्रों का जाप करता है तो वह निश्चय ही परम सुखी और माता की कृपा का पात्र होता है |

Monday, 18 November 2013

beejakshara mantra Navagraha Gayatri Mantras

नवग्रह शांति निमित्त सिद्ध गायत्री मंत्र

Siddh Mantra To Overcome The Effects of Navagraha

Navagraha 
In the hindu methodology all the navagraha have relative movement with respect to the background of fixed stars in the zodiac. This includes the planets: Mars, Mercury, Jupiter, Venus, and Saturn, the Sun, the Moon, as well as positions in the sky, Rahu (north or ascending lunar node) and Ketu (south or descending lunar node).

Traditional Hindu astrologers castes in India are known to be major experts of Navagraha, many people would approach a hindu astrologer when they have problems and ask them on how to overcome them by performing certain rituals which involve worship of Navagraha to overcome ill effects.

So, we have to worship by these Navagrah Gaytri Siddh Mantra to overcome all the unknown bad effects.

प्रत्येक समय या काल में कोई न कोई गृह अनिष्टकारक रहता है | और उसके अनिष्टता के प्रभाव को को करने के लिए याचक को कोई न कोई उपाय कारण पडता है | अत: जो ग्रह अनिष्ट करता हो या जो ग्रह अनिष्टकारी हो उसके निमित्त उसी ग्रह के गायत्री मंत्र की 108 (एक सौ आठ) माला जपे व दशांश हवन करे | ऐसा करने से शांति मिलेगी व वह ग्रह आपको दुष्परिणाम के बजाय सुपरिणाम देगा | और इन मन्त्रों के प्रभाव से ग्रह दोष अगर हो तो उसका भी निवारण होता है |


सूर्य गायत्री मंत्र (Surya Gayatri Mantra)


ओम् भास्कराय विद्मिहे महातेजाय धीमहि |
तन्नो: सूर्य: प्रचोदयात ||


चंद्र गायत्री मंत्र (Chandra Gayatri Mantra)


ओम् क्षीरपुत्राय विद्मिहे मृतात्वाय धीमहि |
तन्नम्चंद्र: प्रचोदयात ||

भौमा गायत्री मंत्र (Mangala Gayatri Mantra)

ओम् अंगारकाय विद्मिहे वाणेशाय धीमहि |
तन्नो: भौम प्रचोदयात ||

बुध गायत्री मंत्र (Budha Gayatri Mantra)

ओम् सौम्यरुपाय विद्मिहे वाणेशाय धीमहि |
तन्नो: बुध: प्रचोदयात ||

बृहस्पति गायत्री मंत्र (Brihaspati Gayatri Mantra)

ओम् गुरुदेवाय विद्मिहे वाणेशाय धीमहि |
तन्नो: गुरु: प्रचोदयात ||

ओम् हूँ सं क्रां सौ: गुरुदेवपरमात्मने नमः इति मूलमंत्र

शुक्र गायत्री मंत्र (Shukra Gayatri Mantra)

ओम् भृगुसुताय विद्मिहे दिव्यदेहाय धीमहि |
तन्नो: शुक्र: प्रचोदयात ||

शनि गायत्री मंत्र (Shani Gayatri Mantra)

ओम् शिरोरुपाय विद्मिहे मृत्युरुपाय धीमहि |
तन्नो: सौरि: प्रचोदयात ||

राहु गायत्री मंत्र (Rahu Gayatri Mantra)

ओम् शिरोरुपाय विद्मिहे अमृतेशाय धीमहि |
तन्नो: राहु: प्रचोदयात ||

केतु गायत्री मंत्र (Ketu Gayatri Mantra)

ओम् गदाहस्ताय विद्मिहे अमृतेशाय धीमहि |
तन्नो: केतु: प्रचोदयात ||

Click Here for Watch the video for Navagraha Gayatri Mantra

Sunday, 17 November 2013

beejakshara mantra Praise, Meditation And Worship Of Gayatri Mantra

गायत्री महामंत्र की स्तुति, ध्यान तथा वंदना

ओम् भूर्भुव: स्वः तत्स वितुर्वरेर्ण्यं !
भर्गो देवस्य धीमहि धियो: योनः प्रचोदयात !!

हमारे वेदों, पुराणों और शास्त्रों में कई तरह के मन्त्र होते है,  और देवताओं की स्तुति के लिए अलग मंत्र होते है तथा ध्यान के लिए अलग तथा वंदना के अलग स्त्रोत्र होते है |

परन्तु जप करने लायक इस गायत्री मन्त्र  के लिए ऐसा विधान नहीं है, गायत्री मंत्र में जप, ध्यान, स्तुति और वंदना करने के लिए एक ही मंत्र का प्रयोग किया जाता है अर्थात गायत्री मन्त्र अपने आप में ही पूर्ण महामंत्र है और इस महामंत्र कि स्तुति, ध्यान और वंदना इस प्रकार है:-

स्तुति:-  "ओम् भूर्भुव: स्वः"

इस मंत्र छंद से उस परमात्मा कि स्तुति की जाती है जो तीनो लोकों में व्याप्त है अर्थात जो अपने प्रकाशमान रूप से इस चराचर जगत में स्थित है और अपने तेज से इन तीनो लोकों को प्रकाशित करते है |

ध्यान:-  "तत्स वितुर्वरेर्ण्यं भर्गो देवस्य धीमहि"


इस छंद में पाप का विनाश करने वाली माँ भगवती का शांत मन से चिंतन एवं ध्यान का वर्णन किया गया है |

प्रार्थना:- "धियो: योनः प्रचोदयात"

इस छंद से मंत्र कि शक्ति के द्वारा बुद्धि एवं विवेक को सही दिशा में ले जाने और मोक्ष प्राप्ति की कामना कि गयी है | इस प्रकार से मानव जीवन को सार्थक एवं सफल बनाने के लिए यह महामंत्र है और इस सिद्ध मंत्र का जाप निश्चित रूप से फलदायी होता है ऐसा मेरा मत है |

(श्री गायत्री नमः)

beejakshara mantra Gayatri Yantra And Mantra For Gayatri Pooja

श्री गायत्री यन्त्र

श्री गायत्री माँ को भगवती गायत्री भी कहा जाता है और उनके पूजन यन्त्र को गायत्री यन्त्र कहा जाता है |

Gayatri Yantra

इस अति पवित्र यन्त्र को ही गायत्री पूजन यन्त्र कहा जाता है | इस मंत्र को स्थापित कर माँ गायत्री कि आराधना करने वाले भक्तों को कभी भी किसी प्रकार की विपत्ति नहीं आती है |

और जो प्राणी भगवती गायत्री को विल्वपत्र पर तीन बार इस मायाबीज मंत्र "ह्रीं" को लिखकर "ऊँ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः " इस मंत्र को स्मरण करते हुए भगवती गायत्री को समर्पित (अर्पण) करता है | ऐसे भक्त माँ भगवती के कृपा के पात्र होते है और उनको सर्व सिद्धि और शांति कि प्राप्ति होती है | और साथ ही सम्मान और प्रशस्ति कि प्राप्ति भी होती है | 

Thursday, 7 November 2013

beejakshara mantra Sita (Janaki) Gayatri Mantra

सीता (जानकी) गायत्री मंत्र

In Hindi:-
ओम् जनकजायै   विद्मिहे रामप्रियायै  धीमहि |
तन्नो: सीता  प्रचोदयात ||


ओम् सीं सीतायै नमः 
इति मूल मंत्र |

In English:-
Ohm Janakjaye Vidmahe Rampriyaye Dhimahi |
Tanno: Sita  Prachodayat || 

Ohm Seem Sitayai Namah:
Iti Mula Mantra |




भावार्थ:- हे जनकनंदिनी ! हे श्री राम प्रियाये, मुझ अनन्य और तुच्छ भक्त को भक्ति प्रधान करें और मुझे इस अंधकारमय जीवन से उजाले की ओर ले जाईये, और हे माता जगतजननी मैं आपको बारम्बार प्रणाम करता हूँ |

रामायण में माता सीता का काफी वर्णन मिलता है , और माता सीता जो कि मर्यादा पुरषोत्तम श्री राम प्रभु की अर्धांगिनी है और धन की देवी लक्ष्मी का अवतार है और भगवान विष्णु उनके पति है |

साधकों को इस मंत्र का जाप कारण चाहिए और यज्ञ या हवन से पहले सभी देवी देवताओं के गायत्री मंत्र की आहुति जरूर लगानी चाहिए |

Wednesday, 6 November 2013

beejakshara mantra Devi (Brahmani) Gayatri Mantra

देवी (ब्रह्माणी) गायत्री मंत्र

In Hindi:-

ओम् ब्रह्मण्ये विद्मिहे महाशक्त्ये धीमहि |
तन्नो: देवी  प्रचोदयात ||

ओम् हीं श्री क्लीं नमः 
इति मूल मंत्र |

In English:-

Ohm Brahmanye Vidmahe Mahashktaye Dhimahi |
Tanno: Devi  Prachodayat || 

Ohm Him Shri Kleem Namah:

Monday, 4 November 2013

beejakshara mantra Goddess Durga Gayatri Mantra

दुर्गा (जगदम्बा) गायत्री मंत्र

In Hindi:-

ओम् कात्यान्ये च विद्मिहे कन्याकुमार्ये धीमहि |
तन्नो: देवी  प्रचोदयात ||1||

ओम् गिरिजायये  विद्मिहे शिवप्रियाये धीमहि |
तन्नो: दुर्गा  प्रचोदयात ||2||


In English:-
Mata Jagadamba

Ohm Kaatyaanye Cha Vidmahe Kanyakumarye Dhimahi |
Tanno: Devi  Prachodayat ||1|| 

Ohm Girijayaye Vidmahe ShivaPriyaye Dhimahi |
Tanno: Durga Prachodayat ||2||

Goddess Durga also known as MahisasurMardini and maa jagadamba. and everyone follow this mantra to get success in life. you can jaap this mantra and feel the unlimited power of mantra. 

Click to Watch the video of "Durga Gayatri"


Sunday, 3 November 2013

beejakshara mantra Ganesha Gayatri Mantra

गणेश गायत्री मंत्र

Lord Ganesha
In Hindi:-

ओम् तत्पुरुषाय विद्मिहे वक्रतुण्डाय धीमहि |
तन्नो: दन्ती प्रचोदयात ||


In English:-

Ohm Tatpurushay Tatpurushay Vidmahe Vakratunday Dhimahi |
Tanno: Danti  Prachodayat || 


That's very effective mantra for everyone, try to jaap at least 108 times in a day or as you wish then you will feels the effect if this.  

Click to Watch the Video of "Ganesha Gayatri"

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