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Saturday, 30 November 2013

beejakshara mantra How to Make Happy Lord Hanuman

हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए

इस कलियुग के अग्रणी देवों में हनुमान जी का नाम सर्वप्रथम आता है, तथा इन्हें कौन नहीं जानता | श्री रामभक्त के रूप में तीनों लोकों में विख्यात हनुमान जी अद्भुत बुद्धि, शक्ति और दया के धनी है | हनुमान जी के बारे में धारणा यह है कि जहाँ भी उनके प्रभु श्री राम का कीर्तन या नाम का गुणगान होता है, वहाँ ये रामदूत अवश्य उपस्थित होते है | इनको राम नाम अत्यंत प्रिय है | अतएव इनके भक्तों को चाहिए कि वें हनुमान जी को प्रसन्न करने हेतु श्री राम नाम का सहारा लेकर पवनपुत्र कि स्तुति करें |



स्तुति मंत्र इस प्रकार है :-

In Hindi:-
सुमिरि पवनसुत पावन नामू |
 अपने बस करि राखे रामू ||

In English:-
Sumiri Pavansut Pavan Naamu |
 Apne Bas Kari Rakhe Raamu || 

इस चौपाई का ध्यान करते हुए हनुमान जी का स्मरण करना चाहिए, हनुमान जी श्री राम के परम भक्त थे, इसलिए कहा गया है कि हे ! मारुति जो पवनसुत के इस पावन नाम से भी जाने जाते हो, और श्री राम को आपने अपने प्रेम और अगाध भक्ति से अपने वश में कर रखा है,
तथा इस मंत्र को भी स्मरण करें |

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं 
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ||

श्री रामचरितमानस में भगवान राम ने अपने अनुज भरत से यह कहा था कि " भरत भाई, कपि से उऋण हम नाहीं " अर्थात श्री भगवान ने भी हनुमान जी कि स्वामी भक्ति देखकर कहा कि हम हनुमान का ऋण कभी भी नहीं चुका सकते है, और यह दी गई चौपाई भी रामचरितमानस से है, और इसका ध्यान व चिंतन करने से हनुमानजी प्रसन्न होते है |                                                

Saturday, 23 November 2013

beejakshara mantra Mantra To Accomplish all Wishes and Destroy Enemy

सर्वमनोकामना सिद्धि तथा शत्रु पर विजय हेतु शिव मंत्र

Lord Shiva Shankar
भगवान शिव जो कि सृष्टि के विनाशकर्ता तथा संहारकर्ता है, और हिंदू मान्यताओं के अनुसार त्रिदेवो में इनका अहम कार्य है वो है संहार करना | अर्थात देवो के देव महादेव संहारक होते हुए भी जगत का आधार है और भक्तो में परम और करुना कि मूर्ति है | मनोकामना प्राप्त करने के लिए अर्थात मनोरथ सिद्ध करने हेतु तथा शत्रु का विनाश करने हेतु इस मंत्र का प्रयोग किया जाता है | 

आदिकाल से ही भगवान शिव को कृपा करने और वर देने के लिए अग्रणी माना जाता रहा है और भगवन महादेव तो इतने भोले है कि कोई भी भक्त पूर्ण श्रृद्धा से और पूर्ण समर्पण से उनको जपता है तथा वे प्रसन्न होने पर यह नहीं देखते कि कौन उनसे क्या वर मांग रहा है, तभी तो इनको भोलेनाथ भी कहा जाता है |

अत: मेरा अभिप्राय यह है कि भगवान भोलेनाथ को भक्त का श्रृद्धा और समर्पण भाव अति प्रिय है और शास्त्रों में कहा भी जाता रहा है कि "भगवान तो प्रेम के भूखे होते है, उन्हें कोई लालच दे तो उसकी उनके सामने क्या बिसात?" अर्थात प्रभु को मानाने के लिए दिखावे और आडम्बर की जरूरत नहीं है, प्रभु को प्रेम और समर्पित भाव से भजने में ही मनुष्य का सच्चा कल्याण है |

भगवान शिव के इस मंत्र को जपने वाले भक्तों के कभी भी विपत्तियां नहीं आती है और उनके सभी कष्टों का निवारण स्वयं भोलेनाथ करते है | सर्वमनोकामना सिद्धि तथा शत्रु पर विजय प्राप्ति का मंत्र इस प्रकार है:-

In Hindi:-
नमस्तेऽआयुधायानातताय धृष्णवे,
ऊँ रुद्राय नमः |

In English:-
Namaste Aayudhayanatataay Drishnave,
Ohm Rudraay Namah: |

जाप विधि:- भगवान शिव के इस मंत्र का जाप करने वाले भक्तो को चाहिए कि वे सोमवार के दिन प्रातकाल स्नानादि से निवृत होकर शुद्ध आसन पर पूर्वाभिमुख होकर विराजमान होवे तदन्तर मंत्रारम्भ करे | और मंत्र जाप करते समय भगवान शिव का निरंतर स्मरण करते रहे | भगवान शिव के इस सर्वमनोकामना और शत्रु विजय मंत्र का फल पाने हेतु कम से कम 108 से 1108 बार जाप करे | इस प्रकार सोमवार से जाप आरम्भ करने पर प्रत्येक दिन 108 बार इस मंत्र का अगले सोमवार तक जाप करे या मनोकामना प्राप्ति तक मंत्र जाप करे | ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते है और भक्त कि मनोकामना कि पूर्ति अवश्य होती है |

इस मंत्र के जाप करने से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है तथा जमीन-जायदाद आदि विवादों का निपटारा होता है, और शत्रु पर विजय पाने के लिए भी इस मंत्र का उपयोग श्रेष्ठ माना गया है |

How to Make Enemies Friends

Wednesday, 20 November 2013

beejakshara mantra Successful Gayatri Mantras for Happiness, Prosperity & Curing Diseases

अनिष्ट (कष्ट- विपत्ति- आपदा) निवारण हेतु गायत्री मंत्र का प्रयोग 

ग्रह शांति हेतु(Mantra for peace of the Planet):- ग्रह शांति के लिए दूध की लकड़ी से एक हजार (1000) गायत्री मंत्रो का जाप करके हवन करने से सभी तरह के ग्रहों कि शांति होती है | तथा दूध की लकड़ी के बजाय शमी कि लकड़ी हो तो उसे अति उत्तम माना गया है, इस प्रकार हवन तथा पाठ करने से आपके सभी प्रकार के भौतिक रोग और व्याधि नष्ट हो जाते है और साथ ही साथ सभी ग्रह भी भगवती गायत्री की कृपा से शांत हो जाते है |
Bhagawati Gayatri 



परम शांति के लिए(Mantra for ultimate peace):- परम शांति के लिए पीपल, पाकड़, गूलर और वट की समिधाओं (लकड़ी) से गायत्री मंत्र का हवन करने के पश्चात हाथ में जल लेकर भगवान सूर्य को तर्पण करना चाहिए, इस प्रकार से आपको परम शांति कि प्राप्ति होती है |

विष का प्रभाव नष्ट करने के लिए(Mantra for destroy the toxin):- गायत्री मन्त्र अक जाप करते हुए कुश का स्पर्श करने से माता गायत्री की कृपा फलस्वरूप विष का प्रभाव कम हो जाता है |

मिर्गी रोग से मुक्ति के लिए(Mantra to cure epilepsy ):- मिर्गी रोग से मुक्ति पाने के लिए अपामार्ग के बीजों से गायत्री माता का एक हजार मन्त्रों से हवन करे |

चेचक रोग से शांति हेतु(Mantra to cure smallpox):- दूध, दही तथा घृत से प्रिटिं गयात्रो मंत्र का एक सौ आठ बार हवन करने से चेचक रोग शांत हो जाता है और पीड़ा नहीं रहती है |

कुष्ठ रोग निवारण हेतु(Mantra for leprosy prevention):- कुष्ठ रोग के लिए सोमलता कि गाँठ को अलग-अलग करके दूध में डाले, और अमावस्या के दिन गायत्री मन्त्र से हवन करने से कुष्ठ रोग में आशातीत लाभ होता है |

सभी व्याधियो के नाश हेतु(Mantra to cure all diseases):- गुरूच को खंड-खंड करके दूध में भिगोने के पश्चात अग्नि में आहुति देवे, तथा भक्तिपूर्वक गायत्री मंत्र का ध्यान करे | इस प्रकार हवन करने से समस्त व्याधियो का नाश होता है |

भगवती माता गायत्री कि कृपा से सभी प्रकार कि आपदा और व्याधियों से छुटकारा मिलता है इसमें कोई संदेह नहीं है, बस आवश्यकता है तो श्रृद्धा, प्रेम और समर्पण की, यदि कोई भक्त पूर्ण श्रृद्धा और प्रेम से माता गायत्री के मन्त्रों का जाप करता है तो वह निश्चय ही परम सुखी और माता की कृपा का पात्र होता है |

Tuesday, 19 November 2013

beejakshara mantra Mantras to Get Rid from Trouble and Embarrassment

दुःख और शोक निवारण के लिए 

In Hindi:-
सुनहि बिनय मम बिटप असोका |
सत्य नाम करु हरु मम सोका ||

In English:-
Sunahi Binay Mam Bitap Ashoka |
Satya Nam Karu Haru Mam Soka ||

यह मंत्र (चौपाई) रामचरितमानस मैं सुन्दर कांड से ली गई है | इसमें माता सीता अशोक वाटिका में अशोक के वृक्ष को कहती है कि – हे अशोक (अर्थात जो शोक का नाश करता है) आप मेरी प्रार्थना को सुनकर, मेरे शोक अर्थात दुखों को हर लीजिए और अपने नाम कि महिमा को सत्य करिये |

अत: जिन भक्तों को किसी भी प्रकार का दुख, पीड़ा या संताप हो तो उन्हें इस मन्त्र का प्रतिदिन संध्या समय में कम से कम २१ बार जप करना चाहिए | ऐसा कने से आपके समस्त दुखों का निवारण होगा |

Friday, 15 November 2013

beejakshara mantra Mantra To Destroy Crisis & Difficulties

संकट की स्थिति में निवारण हेतु

Lord Hanuman
हनुमान जी को संकट या विपदा में सर्वप्रथम याद किया जाता है, क्योकि इन्हीं कि कृपा से संकट पल भर में दूर हो सकता है, ऐसा तुलसीदास जी ने कहा था कि :-

संकट ते हनुमान छुडावे |
मन क्रम वचन ध्यान जो लावे | |

और 

संकट कटे मिटे सब पीरा |
जो सुमिरे हनुमत बलबीरा ||

अत: संकट के समय हनुमान जी का श्रृद्धा सहित ध्यान कर इन मन्त्रों का जाप करने से सभी प्रकार कि बाधाओं का निराकरण होता है |

मंत्र इस प्रकार से है :-



In Hindi:-

दीन दयाल बिरद संभारी | हरहु नाथ मम संकट भारी ||

In English:-

Deen Dayal Birad Sanbhari | Harhu nath Mam Sankat Bhari ||


अर्थात :- यह मंत्र गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महाग्रंथ रामचरितमानस से उदृत है और यह मंत्र माता सीता से हनुमान भेंट प्रसंग में आता है |

जिस समय हनुमान जी माता सीता से वापस जाने की आज्ञा लेते है तब माता सीता उनसे कहती है कि – हे ! रामदूत हनुमान, आप जाकर अपने प्रभु श्रीराम से कहना कि, हे दीन दुखियों के पीड़ा को हरने वाले, आप तो सारे संसार की पीड़ा को हर कर उनका कल्याण करते हो, तो हे नाथ आज मुझ पर बहुत बड़ा कष्ट आन पड़ा है और मेरी इस पीड़ा को भी हर लो और मेरा भी कल्याण करो |

अत: यह मंत्र संकट की दशा में रामबाण का काम करता है | साधक को चाहिए की इस मंत्र को हनुमान और सीताराम (रामदरबार) की छवि का समरण करते हुए जप करे | ऐसा करने से आपके सभी संकटों का निवारण होगा |

beejakshara mantra Mantras For Good Wishes & happiness

मंगल कामना हेतु मंत्र

In Hindi:-

मंगल भवन अमंगल हारी | द्रवउँ सो दशरथ अजिर बिहारी ||1||

मंगल भवन अमंगल हारी | उमा सहित जय जपत पुरारी ||2||

In English:-

Mangal bhavan Amangal haari | Dravaun So Dasharath Ajir Bihari ||1||

Mangal bhavan Amangal haari | Uma Sahit Jai Japat Purari ||2||

इन रामचरितमानस की दोनों चौपाईयों का स्मरण किसी भी कार्य को प्रारंभ करने से पहले अवश्य ही करना चाहिए और रामायण के पाठ के दौरान मंगल कामना हेतु इन चौपाईयों का सम्पुट लगाना कल्याणकारी होता है | और रामायण प्रेमी और भक्तों को इन मन्त्रों का जाप सदैव करते रहना चाहिए, जिससे भगवान श्री राम की कृपा से उनका सदैव मंगल होगा |

beejakshara mantra Mantra to Get Again Your Lost Things

खोई हुयी वस्तु पुनः प्राप्त करने के लिए मंत्र

Lord Ram
रामचरितमानस के इस मंत्र से खोई हुयी चीज या प्रिय वस्तु श्री राम प्रभु की कृपा से शीघ्र ही मिल जाती है अत: जिन व्यक्तियों के किसी भी वस्तु या प्रियजनों का पता नहीं लग पा रहा हो उन्हें इस मंत्र का प्रयोग अवश्य कारण चाहिए | तथा श्री राम में श्रृद्धा और भक्तिभाव रखते हुए इस परम सिद्ध मंत्र का कम से कम 108 बार जाप अवश्य करे | जिससे कि श्री राम जी कि कृपा हो तथा आपकी खोई हुयी वस्तु आपको प्राप्त हो | इस मंत्र जाप प्रात: और संध्याकाल में तब तक करे जब तक आपकी खोई हुयी वस्तु मिल नहीं जाती |


मंत्र इस प्रकार से है :-

In Hindi:-

गई बहोर गरीब नेवाजू |
सरल सबल साहिब रघुराजू ||

In English:-

Gai Bahor Garib Nevaju |
Saral Sabal Sahib Raghuraju ||

This mantra’s from the Ramcharitmanas. You can use this mantra when you want to get back your lost things or item, but before it you have to jaap this mantra daily at least 21 times. And jaap this mantra regularly to get peaceful life.

खोई हुयी वस्तु प्राप्त करने का मंत्र (2):-


Raja Kartviryaarjuna
हैहयवंशी राजा कार्तवीर्यार्जुन जो भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्रावतार माने जाते है | किसी भी वस्तु या प्रिय चीज के खो जाने पर, इनकी पूजा करनी चाहिए तथा राजा कार्तवीर्यार्जुन को साधना द्वारा प्रसन्न करना चाहिए जिससे कि इस प्रकार की आपदा का तुरंत ही समाधान होता है | क्योकि वे सुदर्शनावतार होने के कारण उनकी पहुँच सम्पूर्ण लोकों तक है अत: शास्त्रों के अनुसार वह सभी लोकों में जाकर खोई हुयी वस्तु या व्यक्ति सभी को ढूंढकर लाने में समर्थ है |

पूजा विधान:- प्रात: काल और संध्याकाल में स्नानादि से निवृत होकर शुद्ध आसन पर विराजमान होकर पूर्व या उत्तर दिशा में मुंह करके, घी का दीपक जलाकर पूर्ण श्रृद्धा से भगवान विष्णु के सुदर्शनावतार या सुदर्शन चक्र का ध्यान करते हुए निम्नलिखित मंत्र का 108 (एक माला) बार जाप करे | साधक कितनी भी माला का जाप कर सकता है, यह साधक पर निर्भर करता है |

मंत्र इस प्रकार से है :-

In Hindi:-


ऊँ ह्रीं कार्तवीर्यार्जुनोनाम राजा बाहू सहस्त्रवान् |
तस्य नाम स्मरणमात्रेण गतं नष्टं च लभ्यते ||

In English:-


Ohm Hrim Kartviryaarjunonam Raja Bahu Sahastravan |
Tasya Naam Smranmatren Gatam Nashtam Cha Labhyate ||

beejakshara mantra Mantra to Get Rid of All Problems

विविध रोगों तथा बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए

In Hindi:-

दैहिक दैविक भौतिक तापा |
राम राज नहिं काहुहि ब्यापा ||

In English:-

Daihik Daivik Bhoutik Tapa |
Ram Raj Nahi Kahuhi Byaapa ||

यह मंत्र रामचरितमानस से लिया गया है | और इसके जाप से याचक को समस्त व्याधियों और मानसिक तथा शारीरिक रोगों से छुटकारा मिलता है | इस मंत्र को सिद्ध कर लेने से यह त्वरित फलदायी होता है | अथवा याचक को इस मंत्र को रोज कम से कम 108 बार जप करना आवश्यक है |

Tuesday, 12 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Getting Mental Strength

Mantra To Getting Physical, Mental And Spiritual Strength 

शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने हेतु प्रतिदिन सुबह और शाम को निम्न मंत्र का 21 बार जाप करना चाहिए और भगवान श्री कृष्ण का निरन्तर ध्यान करते रहना चाहिए |

यह षोडाक्षरी मंत्र कहलाता है और इस मंत्र का प्रभाव अद्भुत है | इस मंत्र से भगवान नारायण के दोनों रूपों श्री राम और कृष्ण की स्तुति होती है | इस मंत्र के जाप से साधक को मानसिक शांति मिलती है और क्लेशों से छुटकारा मिलता है |



मंत्र इस प्रकार से है :-

In Hindi:-

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे |
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे ||

In English:-

Hare Ram Hare Ram, Ram Ram Hare Hare |
Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare ||

अत: साधको को प्रतिदिन इस मंत्र का अधिकाधिक जाप कारण चाहिए और कीर्तन करते हुए इस मंत्र को जपते रहना चाहिए | जिससे आप सभी प्रकार की बाधाओं और चिंताओं से छुटकारा पा सकेंगे | इस मंत्र के प्रभाव से आप मानसिक शांति तथा शक्ति का संचार करेंगे |

Saturday, 9 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Away Disaster & Crisis

विपत्ति निवारण के लिए श्रीकृष्ण मंत्र

KRISHNA-RADHA
सभी प्रकार की आपदाओं और विपत्तियों के तारणहार भगवान श्री कृष्ण के इस संकट नाशक मंत्र के जाप करने से साधक को सभी तरह की परेशानियों से छुटकारा मिलता है और जीवन आनंदमय बन जाता है |



विपत्ति निवारण मंत्र इस प्रकार है :-

In Hindi:-

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने |
प्रनतक्लेशनाशय गोविन्दाय नमो नमः ||

In English:-

Krishnay Vasudevay Haraye Parmatmane |
PranatKleshnashay Govinday Namo Namah: ||

किसी भी तरह की विपत्ति, दुःख या क्लेश के निवारण के लिए 21 बार इस मंत्र का जप करना चाहिए और जप करते समय एकाग्रचित्त होकर श्री कृष्ण का ध्यान करते रहे |

अगर आप ग्रह दोष से परेशान है तो सभी ग्रहों के दोषों के निवारण के लिए भगवान श्री राधामाधव (राधा-कृष्ण) के दर्शन करने चाहिए और श्रीनारायण रूप भगवान शालिग्राम का पूजन करना चाहिए |

Friday, 8 November 2013

beejakshara mantra Mantras for Happiness (What's Happiness?)

सुख की अनुभूति और सुख का अनुभव

आज मैं जिस शब्द या जिस प्रसंग पर चर्चा कर रहा हूँ वह आज की परम आवश्यकता है, क्योकि आजकल के इस द्रुतगामी युग में प्रत्येक प्राणी सुख की भिन्न-भिन्न परिभाषाओं में अपना जीवन जी रहे है | और आश्चर्य की बात यह है कि किसी को भी असली सुख की अनुभूति ही नहीं होती है | क्यों ?

इस क्यों का उत्तर यह है कि किसी को यह ज्ञान नहीं है कि असली सुख क्या है, कोई पैसों को सुखा समझता है तो कोई परिवार को, और कई लोगों ने तो सुख कि परिभाषा ही बदल दी | मनुष्यों ने धन-दौलत, गाडी-बंगला, और सांसारिक भोगों को भोगना ही सुख मान लिया | परन्तु इन सब के बावजूद भी प्राणी सुखी नहीं है क्यों ?
क्योकि मनुष्य को सुख का अर्थ ही समझ में नहीं आता है |


सुख :- यथार्थ में सुख का अर्थ है शांति, और जहाँ शांति है वहाँ सुख है | शांति का वास मन कि प्रसन्नता में है और मन तभी प्रसन्न होता है जब मन शांत हो जाये अर्थात उसमे कामनाओं का त्याग हो जाये | प्रत्येक प्राणी के सुख के पीछे इन्द्रियों का अनुभव छुपा होता है अर्थात मनुष्य इन्द्रियों द्वारा सुख कि अनुभूति करता है, परन्तु असली सुख तो शांति ही है |
और भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि:-
अशान्तस्य कुतः सुखम् 

अर्थात जहाँ अशांति है वहाँ सुख नहीं हो सकता है, आज का मनुष्य इस संसार की चमक में चकाचौंध होकर सुख की चाह मैं भौतिक संसाधनों को जुटाने में लगा रहता है और मन में परिकल्पनाओं का अम्बार लगता रहता है और अशांत रहता है और दिखावे के लिए खुश रहता है, पर वास्तव में वह खुश नहीं रहता क्योकि वह अपने मन को वश में तो कर नहीं सकता और कितना भी परिश्रम कर ले पर मन और आकांक्षाओं का कभी भी अंत नहीं होता और वह कभी भी सुखी नहीं होता है |

मनुष्य का मन और मस्तिष्क भी उसके शत्रु हो सकते है अगर इनको आपने अपने नियंत्रण में नहीं रखा है | क्योकि मनुष्य का मन प्रत्येक क्षण कुछ न कुछ कल्पना करता रहता है और मनुष्य का मस्तिषक कल्पना करता है की मैं फलां वस्तु प्राप्त कर तृप्त हो जाऊंगा तो उसके यह विचार मिथ्या है क्योकि मनुष्य कभी भी अपने मस्तिष्क और मन की कल्पनाओं की पूर्ति नहीं कर सकता है |

आपको अगर सही मायनों में सुख की खोज है तो आपको सही रास्ता खोजकर उसे अपनाकर ही सही खुशी  जीवन की अनुभूति प्राप्त कर सकते है | उस सन्मार्ग का संकेत करते हुए भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते है कि:-

विहाय कामान्य: सर्वान्पुमांश्चरति नि:स्पृह: |
निर्ममो निरहंकारः स शान्तिमधिगच्छति ||
                                                            (गीता-श्लोक)
                                        
अर्थात:- यदि कोई प्राणी सुख और शांति चाहता है तो उसे अपनी इच्छाओं और कामनाओं कि पूर्ति का प्रयत्न करना चाहिए | और मन में उठने वाले विचारों और संकल्पों का वध करना होगा, अपनी इन्द्रियों पर कठोरता से संयम रखना होगा इस प्रकार करने से मनुष्य सुखी हो सकता है | तथा भगवान ने गीता में कहा है कि:-

आपुर्यमाणमचलप्रतिष्ठं 
समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्धत |
तद्धत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे
 स शांतिमाप्नोति न कामकामी ||
                                        (गीता-श्लोक)

अर्थात:- वह मनुष्य जिसकी कामनाएं कभी शांत नहीं होती वह कदापि सुखी नहीं होता है अर्थात कामना करने वाला कभी सुखी नहीं हो सकता है | जो मनुष्य उत्त्पन्न होने वाली कामनाओं को शांत करना जानता है वही सुख प्राप्त कर सकता है, जैसे सैकडों नदियों के जल मिलने पर भी समुद्र क्षुब्ध नहीं होता वैसे ही कामनाओं के प्रवाह में मनुष्य को क्षुब्ध नहीं होना चाहिए, और जैसे गरम लोहे पर पानी की बूंदे लुप्त हो जाती है वैसे ही संयम से इच्छाओं और कामनाओं को वश में किया जा सकता है |

आज के इस भौतिक युग में प्रत्येक मनुष्य अपने खुशी और कामनाओं की पूर्ति के लिए दूसरों के सुखों का दमन करता है और दूसरों पर अत्याचार करके अपने सुख और आवश्यकताओं की पूर्ति करता है पर वह यह नहीं जनता की यह सुख और कामनाये तो क्षणिक है पर जब इस क्षणिक शरीर का भी त्याग होगा तब यह सुख संसाधन यही छूट जाते है और उन पापों और अत्याचारों का हिसाब होगा तब उनके पास पछताने से भी कुछ नहीं होगा | इसलिए समय रहते उस भौतिकवादी सुखो से निकलकर अपने आप को आध्यात्मिक और आध्यात्म की और बढ़ो तब आपको अहसास होगा की असली और यथार्थ सुख क्या है | और आपका मन कभी भी अशांत नहीं रहेगा और आप कभी भी दुखी नहीं रहेंगे | 

(जय श्री कृष्ण)

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