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Friday, 29 November 2013

beejakshara mantra Gayatri Mantra Japa For Accomplish Purpose

विशेष उद्देश्य तथा प्रयोजन सिद्धि हेतु गायत्री मंत्र का जाप (सम्पुट विधि)
शास्त्रों में प्रत्येक मंत्र को अति प्रभावकारी और फलदायी माना गया है, तथा प्रत्येक मंत्र की कुछ सीमाएं और परिमाप होता है और उनके लिए साधक को पूर्ण सावधानी रखने की आवश्यकता होती है | परन्तु अगर हम विशेष प्रयोजन की बात करे तो मंत्र जाप तभी सार्थक होता है जब किसी विशेष कार्य हेतु सम्पुट लगाकर तथा इच्छित संकल्प के साथ जाप किया जाये | साधको और मंत्र जाप करने वालों के लिए सम्पुट मंत्र कोई नया शब्द नहीं है, और जो नहीं जानते उनको मैं बता देता हूँ की सम्पुट मंत्र वह होता है जो किसी मंत्र के बाद बोला जाता है और हर मंत्र की पुनरावृति के साथ ही इस मंत्र का जाप होता है | इसे सम्पुट मंत्र कहते है |
 
यहाँ हम गायत्री मंत्र के साथ सम्पुट विधि से प्रयोजन सिद्धि के बारे में चर्चा कर रहे थे | गायत्री मंत्र वेदमाता गायत्री का मंत्र है और इस मंत्र को मनवांछित फल देने वाला तथा अति उत्तम माना गया है | 
किसी विशेष उद्देश्य के लिए या अपना प्रयोजन सिद्ध करने हेतु गायत्री मंत्र का जाप इस विधि से करें:- 
  • सर्वप्रथम स्नानादि से निवृत होकर, स्वच्छ आसन लेकर पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके आसन पर बैठिये |
  • अब सबसे पहले गायत्री मन्त्र का आवाह्न करे तथा जाप आरम्भ करे |
  • तत्पश्चात जो भी कार्य आप करना चाहते है उसका संकल्प लेकर पूर्ण श्रृद्धा से माता भगवती गायत्री के चरणों में अर्पित कर देवें |
  • अब जाप आरम्भ करे तथा गायत्री मंत्र के बाद आपने जो भी सम्पुट लिया है उसका पाठ करे और यह क्रम आपको प्रत्येक मंत्र के बाद दोहराना होगा |
इस प्रकार सम्पुट लगाकर आप किसी भी मन्त्र का प्रयोग कर मनवांछित कार्य की सिद्धि प्राप्त सकते है, तथा इसके लिए आपको गायत्री माता में पूर्ण आस्था तथा विश्वास होना परम आवश्यक है | अत: आपको जाप करते  समय पूर्ण एकाग्रभाव से माँ भगवती का ध्यान करते रहना चाहिए |
कुछ विशेष और सर्वविदित सम्पुट जो प्रयोजन सिद्धि है, इस प्रकार है:-  
सुख सम्पति की प्राप्ति के लिए (Mantra To Happiness & prosperity):-सुख सम्पति की प्राप्ति के लिए गायत्री मंत्र जाप के साथ साथ इस मंत्र को सम्पुट लगाकर श्रृद्धा से माता गायत्री का ध्यान करते हुए जप करना चाहिए |

सम्पुट मंत्र:-
!! ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं !!
संतान प्राप्ति के लिए (Mantra To Get Child):- जिन लोगों को संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ है, या जिनको इच्छित संतान की कामना हो उन्हें इस मंत्र का सम्पुट गायत्री मंत्र के साथ प्रयोग करना चाहिए | और यह ध्यान रहे की जाप अर्थात मन्त्रों की संख्या प्रतिदिन समान रहे | सम्पुट मंत्र इस प्रकार है:-

सम्पुट मंत्र:- 
!! ऊँ श्रीं ह्रीं क्लीं !!

विघ्न बाधा निवारण हेतु (Mantra To Get Rid From Disturbance And Interruption):- किसी भी प्रकार की विघ्न बाधा आने पर गायत्री मंत्र के साथ इस सम्पुट का उपयोग करने से माता भगवती की कृपा से सारे विघ्न दूर हो जाते है |

सम्पुट मंत्र:-
!! ऊँ ऐं हीं क्लीं !!

मनोकामना सिद्धि के लिए (Mantra To Fulfillment All Wishes):- मनोकामना सिद्धि प्राप्त करने हेतु गायत्री मंत्र के साथ इस मंत्र के प्रयोग से सारे मनोरथ पूरे हो जाते है | तथा माता गायत्री का श्रृद्धा पूर्वक ध्यान करना चाहिए |

सम्पुट मंत्र:- 
!! ऊँ आं ह्रीं क्लीं !!

विद्या प्राप्ति हेतु मंत्र (Mantra To Getting Lore):- विद्या की प्राप्ति हेतु गायत्री मंत्र के साथ इस सम्पुट मंत्र का श्रृद्धा पूर्वक जाप करना चाहिए | जिससे की माता गायत्री की कृपा से विद्या प्राप्त होती है |

सम्पुट मंत्र:- 
!! ऊँ ऍ ओम् !!

गायत्री मंत्र के सम्पुट जाप के बाद हवन करना परमावश्यक है, क्योकि हवन करने से पुण्यफल में दुगुनी वृद्धि होती है और हवनकर्ता से माता भगवती गायत्री अत्यंत प्रसन्न होती है और साधक पर उनकी अपार कृपा होती है |

गायत्री मंत्र का विधि विधान और बीज गायत्री मंत्र:- गायत्री मंत्र 

Thursday, 21 November 2013

beejakshara mantra Benefits of Chanting Gayatri Mantra

गायत्री मंत्र के प्रयोग से लाभ तथा प्रभावकारी विधान

Gayatri Mantra
वैसे तो गायत्री मंत्र को महा मंत्र माना गया है, पर इसे बीज मंत्र भी कहा जाता है और इसके जाप और पूजन का एक अलग विधान होता है | गायत्री मंत्र का जाप करने वाले को उसके जीवनकाल में कभी भी विपत्तियों से सामना नहीं करना पडता है और उसकी सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण हो जाती है ऐसा शास्त्र कहते है | पर मैं उन्हीं शास्त्रोंनुसार कुछ फलदायी प्रयोग आपके सम्मुख प्रकट कर रहा हूँ |



"श्री" लक्ष्मी प्राप्ति हेतु प्रयोग (Mantra  for Obtaining Property):- श्री प्राप्ति हेतु बिल्व वृक्ष की लकड़ी (समिधा) से सात दिनों तक गायत्री मंत्र की प्रतिदिन दो सौ आहुतियाँ करने वाला साधक "श्री" अर्थात लक्ष्मी प्राप्त करता है, और सवभाव से अति चंचल और एक जगह स्थिर न रहने वाली माता लक्ष्मी उस साधक के घर निवास करती है |

अपमृत्यु तथा भयनाश हेतु (Mantra for Unnatural death & destroy the fear):- शमी की समिधा अर्थात लकड़ी, अन्न, क्षीर और घी से प्रतिदिन सात दिनों तक गायत्री मंत्र की सौ-सौ आहुतियाँ देने से सभी प्रकार का भय दूर होता है |


मृत्यु भय से मुक्ति हेतु (Mantra to get rid from fear of death):- इसके लिए साधक को केवल दूध पीकर गायत्री मंत्र का श्रृद्धा एवं भक्तिपूर्वक एक सप्ताह तक जाप करने से, मृत्यु भय से मुक्ति मिलती है और साथ ही मंत्र शक्ति से वह कितना भी पापी रहा हो यमलोक में नहीं जाता है अर्थात मंत्र के पुण्य प्रभाव से वह यम पाश से मुक्त हो जाता है |

विजय प्राप्ति हेतु(Mantra to obtaining Victory):- विजय कि प्राप्ति के लिए साधक को मदार कि लकड़ी से गायत्री मंत्र का हवन करना चाहिए, इस प्रकार करने से वह सभी क्षेत्रों में विजय होता है |

दीर्घायु होने के लिए(Mantra for long life):- लंबी आयु अर्थात दीर्घायु होने के लिए पलाश के अग्रभाग वाली लकड़ी से गायत्री मंत्र का हवन करने से साधक को दीर्घायु की प्राप्ति होती है |

मनवांछित पुत्र की प्राप्ति के लिए(Mantra to achieve the best son):- मनचाहा पुत्र प्राप्ति के लिए गायत्री मन्त्रों के साथ खीर का हवन करे तथा इस  खीर को सूर्य देव को अर्पण कर ऋतुस्नाता ब्राहमणी को भोजन करावें | इस प्रकार करने से आपको श्रेष्ठ पुत्र कि प्राप्ति होगी |

सिद्धियाँ प्राप्ति हेतु(Mantra to achieve perfection):- जो मनुष्य तथा साधक लगातार पांच वर्षों तक पूर्ण श्रृद्धा तथा भक्तिभाव से गायत्री मंत्र का जाप करता है, उसे आठों सिद्धियों कि प्राप्ति होना निश्चित है |

ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति(To get rid from brahm Murder):- जिन लोगों को ब्रह्म हत्या का पाप भूलवश या जाने-अनजाने कैसे भी लगा हो, ऐसे मनुष्यों को चाहिए कि वह किसी विद्वान ब्राह्मण को बुलाकर तीन हजार बार गायत्री मंत्र का जाप तथा हवन कराये, इस प्रकार उन्हें ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिलेगी |

गो हत्या के पाप से मुक्ति(To get rid from cow slaughter):- गो-हत्या या गो-वध सबसे बड़ा अधर्म और पाप माना गया है, और इसके लिए कोई भी सजा बहुत तुच्छ होगी, पर शास्त्रानुसार इस पाप से मुक्ति के लिए बारह दिनों तक प्रतिदिन तीन-तीन हजार गायत्री मन्त्रों का जाप तथा हवन करे |

(जय भगवती गायत्री माता)

Wednesday, 20 November 2013

beejakshara mantra Successful Gayatri Mantras for Happiness, Prosperity & Curing Diseases

अनिष्ट (कष्ट- विपत्ति- आपदा) निवारण हेतु गायत्री मंत्र का प्रयोग 

ग्रह शांति हेतु(Mantra for peace of the Planet):- ग्रह शांति के लिए दूध की लकड़ी से एक हजार (1000) गायत्री मंत्रो का जाप करके हवन करने से सभी तरह के ग्रहों कि शांति होती है | तथा दूध की लकड़ी के बजाय शमी कि लकड़ी हो तो उसे अति उत्तम माना गया है, इस प्रकार हवन तथा पाठ करने से आपके सभी प्रकार के भौतिक रोग और व्याधि नष्ट हो जाते है और साथ ही साथ सभी ग्रह भी भगवती गायत्री की कृपा से शांत हो जाते है |
Bhagawati Gayatri 



परम शांति के लिए(Mantra for ultimate peace):- परम शांति के लिए पीपल, पाकड़, गूलर और वट की समिधाओं (लकड़ी) से गायत्री मंत्र का हवन करने के पश्चात हाथ में जल लेकर भगवान सूर्य को तर्पण करना चाहिए, इस प्रकार से आपको परम शांति कि प्राप्ति होती है |

विष का प्रभाव नष्ट करने के लिए(Mantra for destroy the toxin):- गायत्री मन्त्र अक जाप करते हुए कुश का स्पर्श करने से माता गायत्री की कृपा फलस्वरूप विष का प्रभाव कम हो जाता है |

मिर्गी रोग से मुक्ति के लिए(Mantra to cure epilepsy ):- मिर्गी रोग से मुक्ति पाने के लिए अपामार्ग के बीजों से गायत्री माता का एक हजार मन्त्रों से हवन करे |

चेचक रोग से शांति हेतु(Mantra to cure smallpox):- दूध, दही तथा घृत से प्रिटिं गयात्रो मंत्र का एक सौ आठ बार हवन करने से चेचक रोग शांत हो जाता है और पीड़ा नहीं रहती है |

कुष्ठ रोग निवारण हेतु(Mantra for leprosy prevention):- कुष्ठ रोग के लिए सोमलता कि गाँठ को अलग-अलग करके दूध में डाले, और अमावस्या के दिन गायत्री मन्त्र से हवन करने से कुष्ठ रोग में आशातीत लाभ होता है |

सभी व्याधियो के नाश हेतु(Mantra to cure all diseases):- गुरूच को खंड-खंड करके दूध में भिगोने के पश्चात अग्नि में आहुति देवे, तथा भक्तिपूर्वक गायत्री मंत्र का ध्यान करे | इस प्रकार हवन करने से समस्त व्याधियो का नाश होता है |

भगवती माता गायत्री कि कृपा से सभी प्रकार कि आपदा और व्याधियों से छुटकारा मिलता है इसमें कोई संदेह नहीं है, बस आवश्यकता है तो श्रृद्धा, प्रेम और समर्पण की, यदि कोई भक्त पूर्ण श्रृद्धा और प्रेम से माता गायत्री के मन्त्रों का जाप करता है तो वह निश्चय ही परम सुखी और माता की कृपा का पात्र होता है |

Sunday, 17 November 2013

beejakshara mantra Praise, Meditation And Worship Of Gayatri Mantra

गायत्री महामंत्र की स्तुति, ध्यान तथा वंदना

ओम् भूर्भुव: स्वः तत्स वितुर्वरेर्ण्यं !
भर्गो देवस्य धीमहि धियो: योनः प्रचोदयात !!

हमारे वेदों, पुराणों और शास्त्रों में कई तरह के मन्त्र होते है,  और देवताओं की स्तुति के लिए अलग मंत्र होते है तथा ध्यान के लिए अलग तथा वंदना के अलग स्त्रोत्र होते है |

परन्तु जप करने लायक इस गायत्री मन्त्र  के लिए ऐसा विधान नहीं है, गायत्री मंत्र में जप, ध्यान, स्तुति और वंदना करने के लिए एक ही मंत्र का प्रयोग किया जाता है अर्थात गायत्री मन्त्र अपने आप में ही पूर्ण महामंत्र है और इस महामंत्र कि स्तुति, ध्यान और वंदना इस प्रकार है:-

स्तुति:-  "ओम् भूर्भुव: स्वः"

इस मंत्र छंद से उस परमात्मा कि स्तुति की जाती है जो तीनो लोकों में व्याप्त है अर्थात जो अपने प्रकाशमान रूप से इस चराचर जगत में स्थित है और अपने तेज से इन तीनो लोकों को प्रकाशित करते है |

ध्यान:-  "तत्स वितुर्वरेर्ण्यं भर्गो देवस्य धीमहि"


इस छंद में पाप का विनाश करने वाली माँ भगवती का शांत मन से चिंतन एवं ध्यान का वर्णन किया गया है |

प्रार्थना:- "धियो: योनः प्रचोदयात"

इस छंद से मंत्र कि शक्ति के द्वारा बुद्धि एवं विवेक को सही दिशा में ले जाने और मोक्ष प्राप्ति की कामना कि गयी है | इस प्रकार से मानव जीवन को सार्थक एवं सफल बनाने के लिए यह महामंत्र है और इस सिद्ध मंत्र का जाप निश्चित रूप से फलदायी होता है ऐसा मेरा मत है |

(श्री गायत्री नमः)

beejakshara mantra Gayatri Yantra And Mantra For Gayatri Pooja

श्री गायत्री यन्त्र

श्री गायत्री माँ को भगवती गायत्री भी कहा जाता है और उनके पूजन यन्त्र को गायत्री यन्त्र कहा जाता है |

Gayatri Yantra

इस अति पवित्र यन्त्र को ही गायत्री पूजन यन्त्र कहा जाता है | इस मंत्र को स्थापित कर माँ गायत्री कि आराधना करने वाले भक्तों को कभी भी किसी प्रकार की विपत्ति नहीं आती है |

और जो प्राणी भगवती गायत्री को विल्वपत्र पर तीन बार इस मायाबीज मंत्र "ह्रीं" को लिखकर "ऊँ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः " इस मंत्र को स्मरण करते हुए भगवती गायत्री को समर्पित (अर्पण) करता है | ऐसे भक्त माँ भगवती के कृपा के पात्र होते है और उनको सर्व सिद्धि और शांति कि प्राप्ति होती है | और साथ ही सम्मान और प्रशस्ति कि प्राप्ति भी होती है | 

Sunday, 3 November 2013

beejakshara mantra Gayatri mantra

Gayatri mantra


The Gaayatree Mantra is the most powerful Mantra in the world. Gayatri mantra has the highest power. In fact it is called the mother of all Mantra and to add it as Samput in other Mantra makes those Mantra tremendously powerful. If you read Gayatri Mantra with the correct Rig Ved intonation *at least* 108 times a day, it can do wonders to your spiritual pursuit. Just a couple of points to note are:

  • It is not a Mantra for Gayatri Devi, as commonly thought. Gayatri is the Chhand (meter) and hence Gayatri Devi is a vehicle for the mantra. 

  • The Mantra is for Savitri Devataa - a form of Sun god who permeates the entire universe as the supreme intelligence/consciousness/soul. In other words, it is basically the formless Aatmaa of the universe. You can add the form you prefer to make it more complete. It is basically a Mantra for Aatm Gyaan (knowledge of self). 

  • Sit in a good Aasan, keep your back as straight as possible, don't move, close your eyes and focus your attention on either the sound of the Mantra or a mental image of your Isht Devataa and keep chanting mentally.

Various Gayatri Mantras:


Baglamukhi Gayatri Mantra 

 "Om Hleem Brahmastrayee Vidmahe Stambanbaanayee Dheemahi Tanno Bagla Prachodyat"

बगलामुखि गायत्री मंत्र 

ॐ ह्लीं ब्रह्मास्त्रायै विदमहे स्तम्भणबाणायै धीमहि तन्नौ बगला प्रचोदयात् ॥



Sri Chinnamasta Gayatri Mantra 

"Om Vairochniyee Ch Vidmahe Chhinnmastayee Dheemahi Tanno Devi Prachodyat"

छिन्नमस्ता गायत्री मंत्र

ॐ वैरोचनीयै च विदमहे छिन्नमस्तायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥




Saraswati Gayatri Mantra

"Om Aing Vaagdevayee Ch Vidmahe Kaamraajay Dheemahi Tanno Devi Prachodyat"


सरस्वती गायत्री मंत्र

ॐ ऐं वाग्देव्यै च विदमहे कामराजाय धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥



Dhumavati Gayatri Mantra

"Om Dhumavatyee Ch Vidhmahe Sanharinayee Ch Dheemahi Tanno Dhuma Prachodyat"

धूमावती गायत्री मंत्र

ॐ धूमावत्यै च विदमहे संहारिण्यै च धीमहि तन्नौ धूमा प्रचोदयात् ॥



Kali Gayatri Mantra

"Om Kalikayee Ch Vidhmahe Shamshanvaasinayee Dheemahi Tanno Aghora Prachodyat"


काली गायत्री मंत्र 

ॐ कालिकायै च विदमहे श्मशानवासिन्यै धीमहि तन्नो अघोरा प्रचोदयात् ॥



Narasimha Gayatri Mantra

"Om Ugra-narasimhay Vidhmahe Vajranakhay Dheemahi Tanno Nrisimha Prachodyat"

नृसिंह गायत्री मंत्र 

ॐ उग्रनरसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नृसिंह: प्रचोदयात् ॥

Audio of Narasimha Gayatri Mantra


                               Bhairavi Gayatri Mantra 

"Om tripurayae ch vidhmhe bhaervyae ch dhimhi  tanno devi Prachodyat "

भैरवी गायत्री मंत्र

ॐ त्रिपुरायै च विद्महे भैरव्यै च धीमहि ! तन्नो देवी प्रचोदयात ! 





Friday, 1 November 2013

beejakshara mantra Gayatri Mantra And Gayatri Mahima

गायत्री मंत्र (Gayatri-Mantra)

Gayatri Mata
In Hindi:-

ओम् भूर्भुव: स्वः तत्स वितुर्वरेर्ण्यं !
भर्गो देवस्य धीमहि धियो: योनः प्रचोदयात !!

In English:-
Om Bhurbhuv: Sva: Tatsa Viturvarernyam !
Bhargo Devasya Dhimhi Dhiya: Yonah: Prachodayat !!

भावार्थ:- पृथ्वी अन्तरिक्ष और स्वर्ग पर्यंत जो सविता (सूर्य) श्रुतियों में प्रसिद्द है वह प्रकाशमान परमात्मा हमारी बुद्धि को सत्कार्य में प्रेरित करें | 

इस गायत्री मंत्र का ध्यान करने से तन एवं मन दोनों की शुद्धि होती है, और नित्य जप करने वालों को सुख व यश की प्राप्ति होती है | समस्त वैदिक मंत्रो में गायत्री मंत्र का स्थान विशेष है इसलिए इसे गायत्री महामंत्र भी कहते है | चौबीस अक्षर के इस महामंत्र मे सारे ब्रह्माण्ड का निवास है | यह मंत्र एक तरह से औषधि का काम करता है अर्थात जो कोई भी इस महामंत्र का प्रतिदिन सांय अथवा प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठाकर स्नानादि से निवृत होकर इस मंत्र का विधिपूर्वक जाप करता है तो उसके सभी कष्ट और आपदाएं दूर हो जाती है | और इस महामंत्र के प्रभाव से सुख सम्पति का आगमन होता है | तथा इस लोक में तो प्राणी सुखी रहता ही है साथ ही साथ परलोक में भी भगवती गायत्री की कृपा से उस प्राणी को दिव्य स्थान की प्राप्ति होती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है |

गायत्री मंत्र का प्रयोग अनिष्ट निवारण हेतु, जरा-व्याधियो से निवारण हेतु, ग्रह शांति हेतु तथा गायत्री हवन की विधि:-
Successful Gayatri Mantras

वेदों और पुरानों में गायत्री को वेदमाता का दर्जा प्राप्त है अत: ब्रह्मयज्ञ में ११ बार गायत्री मंत्र का जाप करने से ही वेदाधिकार प्राप्त हो जाता है ऐसा माना जाता है | इसलिए प्रत्येक प्राणी को तन मन से माता भगवती गायत्री का जप करना चाहिए और अपना जीवन सार्थक बनाना चाहिए | 

Click here to watch the video of "Gayatri-Mantra"

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