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Saturday, 23 November 2013

beejakshara mantra Mantra to Get Good Fiance and Child

योग्य वर और इच्छित संतान प्राप्ति हेतु शिव मंत्र 

In Hindi:-

नमोस्तु नीलग्ग्रीवाय सहस्राक्षाय मीदुषे |
अथोयेअस्यसत्त्वावो हन्तेभ्योकरन्नम: ||

ऊँ नीलकंठाय नमः |

In English:-

Namostu Nilaggrivay Sahstrakshay Meedushe |
AthoyeasyaSattvavo HantebhyoKarnnam: ||

Ohm Neelakanthay Namah: |


भगवान शिव के इस मंत्र का जाप करने से अविवाहित कन्याओं को पसंदीदा जीवन साथी तथा विवाहितों को इच्छित संतान की प्राप्ति होती है |

मंत्र जप का विधान :- भगवान भोलेनाथ के इस मंत्र को भगवान के शिवलिंग पर दूध व बिल्व पत्र चढाते हुए जाप करने से आपकी मनोकामना जल्दी ही पूरी होती है | और इस मंत्र के साथ-साथ आपको बिल्वपत्र चढाने के मंत्र का जाप भी करना चाहिए |

बिल्वपत्र चढाने का मंत्र – बिल्वपत्र मंत्र   

Friday, 22 November 2013

beejakshara mantra Mantra to Fulfill Desires and Wishes

मनोकामना पूर्ण करने हेतु मंत्र

आज इस धर्म और अधर्म के कल्पित संसार में कई लोग अभी भी भगवान को ही सर्वशक्तिमान मानते है और मानना भी चाहिए क्योकि इस बात में किंचितमात्र भी संदेह नहीं है कि भगवान ही सर्वशक्तिमान है | तथा जो यह मानते है और कहते है कि भगवान नहीं है तो ऐसे मूर्ख और नाराधामी लोगों का जीवन पशु सामान है जो देख और महसूस तो कर पा रहे है पर उस शक्ति-स्वरूप परमात्मा का गुणगान नहीं कर पाते है, तथा इस कलियुग के मायाजाल में बुरी तरह से फंसकर अपना यह जीवन तो नष्ट कर ही रहे है साथ ही साथ परलोक को भी कष्टमय बना रहे है |



अत: मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि मानव जीवन कई भागों में विभजित है जहाँ मनुष्य को भोग-योग तथा धर्म-कर्म आदि पर विचारकर ही आगे कदम बढ़ाना चाहिए| यद्यपि हमें इस गृहस्थ जीवन से मोह तो होता ही है, परन्तु गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी निष्टावान और प्रभु उपासक बना जा सकता है |

हमें मनोकामना और वर प्राप्ति तथा मनवांछित फल पाने के लिए परमात्मा से अनुरोध करना चाहिए कि :- हे परमपिता परमेश्वर मुझ तुच्छ भक्त पर कृपा करे तथा मेरी मनोकामनाओं को पूर्ण करे |

रामचरितमानस में इस प्रकार कि भक्ति का बड़ा ही सुन्दर वर्णन देखने को मिलता है, जहाँ पर माता सीता कि भक्ति और समर्पणभाव से माता गौरी और देवर्षि नारद जी प्रसन्न हो जाते है और उनकी मनोकामना कि पूर्ति का आश्वाशन देते है | रामचरितमानस में दिए गए इस मंत्र को सिद्ध मंत्रो की श्रेणी में रखा जाता है | यह मंत्र वर प्राप्ति हेतु भी अग्रणी माना जाता है | रामचरितमानस में दिए दृष्टान्त के अनुसार आतिथ्य सत्कार करने से प्रसन्न हो नारद जी ने सीता माता को इसी प्रकार से आशीवाद दिया था तथा माता सीता द्वारा दुर्गा (माँ गौरी) की पूजा करने पर माता गौरी ने उन्हें इस प्रकार आशीर्वाद दिया |


In Hindi:-
सुनुसिय सत्य असीस हमारी |
पूजहिं मनोकामना तुम्हारी ||

In English:-
Sunu Siya Satya Ashisa Hamari |
Pujahin Mano Kamana Tumhari ||

भावार्थ:- यह मंत्र रामचरितमानस के बालकाण्ड से उदृत है तथा इसमें माता पार्वती जी की पूजा करने पर माँ गौरी अर्थात माता पार्वती प्रसन्न होकर माता सीता से कहती है कि, हे सीता तुम्हारी भक्ति और सेवा निष्काम है तथा तुम्हारे विचार अति उत्तम है अत: हे जनकनंदिनी तुम्हारी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी और जो तुम्हे श्रृद्धा भाव से पूजेगा, उसकी मनोकामना भी निसंदेह पूर्ण होगी |

मंत्र जाप विधि:- यह मंत्र रामचरितमानस के सिद्ध मन्त्रों में से एक है और गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीराम शलाका में भी मनोरथ सिद्धि के लिए इस मंत्र का उल्लेख किया है |
इस मंत्र का जाप करने से पूर्व दस मिनट तक एकाग्रचित्त होकर भगवान श्रीराम और माता सीता का ध्यान करना चाहिए तथा उसके बाद ही इस मंत्र का जप आरंभ करें | मंत्र को प्रतिदिन संध्याकाल में कम से कम 108 बार जपना चाहिए | या हवन कर मंत्र की सिद्धि कर लेनी चाहिए | ऐसा करने से आपकी मनोकामना अवश्य ही सफल होती है |

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Video of Shree Morari Bapu During Ram Katha or Manas Katha

Thursday, 21 November 2013

beejakshara mantra Benefits of Chanting Gayatri Mantra

गायत्री मंत्र के प्रयोग से लाभ तथा प्रभावकारी विधान

Gayatri Mantra
वैसे तो गायत्री मंत्र को महा मंत्र माना गया है, पर इसे बीज मंत्र भी कहा जाता है और इसके जाप और पूजन का एक अलग विधान होता है | गायत्री मंत्र का जाप करने वाले को उसके जीवनकाल में कभी भी विपत्तियों से सामना नहीं करना पडता है और उसकी सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण हो जाती है ऐसा शास्त्र कहते है | पर मैं उन्हीं शास्त्रोंनुसार कुछ फलदायी प्रयोग आपके सम्मुख प्रकट कर रहा हूँ |



"श्री" लक्ष्मी प्राप्ति हेतु प्रयोग (Mantra  for Obtaining Property):- श्री प्राप्ति हेतु बिल्व वृक्ष की लकड़ी (समिधा) से सात दिनों तक गायत्री मंत्र की प्रतिदिन दो सौ आहुतियाँ करने वाला साधक "श्री" अर्थात लक्ष्मी प्राप्त करता है, और सवभाव से अति चंचल और एक जगह स्थिर न रहने वाली माता लक्ष्मी उस साधक के घर निवास करती है |

अपमृत्यु तथा भयनाश हेतु (Mantra for Unnatural death & destroy the fear):- शमी की समिधा अर्थात लकड़ी, अन्न, क्षीर और घी से प्रतिदिन सात दिनों तक गायत्री मंत्र की सौ-सौ आहुतियाँ देने से सभी प्रकार का भय दूर होता है |


मृत्यु भय से मुक्ति हेतु (Mantra to get rid from fear of death):- इसके लिए साधक को केवल दूध पीकर गायत्री मंत्र का श्रृद्धा एवं भक्तिपूर्वक एक सप्ताह तक जाप करने से, मृत्यु भय से मुक्ति मिलती है और साथ ही मंत्र शक्ति से वह कितना भी पापी रहा हो यमलोक में नहीं जाता है अर्थात मंत्र के पुण्य प्रभाव से वह यम पाश से मुक्त हो जाता है |

विजय प्राप्ति हेतु(Mantra to obtaining Victory):- विजय कि प्राप्ति के लिए साधक को मदार कि लकड़ी से गायत्री मंत्र का हवन करना चाहिए, इस प्रकार करने से वह सभी क्षेत्रों में विजय होता है |

दीर्घायु होने के लिए(Mantra for long life):- लंबी आयु अर्थात दीर्घायु होने के लिए पलाश के अग्रभाग वाली लकड़ी से गायत्री मंत्र का हवन करने से साधक को दीर्घायु की प्राप्ति होती है |

मनवांछित पुत्र की प्राप्ति के लिए(Mantra to achieve the best son):- मनचाहा पुत्र प्राप्ति के लिए गायत्री मन्त्रों के साथ खीर का हवन करे तथा इस  खीर को सूर्य देव को अर्पण कर ऋतुस्नाता ब्राहमणी को भोजन करावें | इस प्रकार करने से आपको श्रेष्ठ पुत्र कि प्राप्ति होगी |

सिद्धियाँ प्राप्ति हेतु(Mantra to achieve perfection):- जो मनुष्य तथा साधक लगातार पांच वर्षों तक पूर्ण श्रृद्धा तथा भक्तिभाव से गायत्री मंत्र का जाप करता है, उसे आठों सिद्धियों कि प्राप्ति होना निश्चित है |

ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति(To get rid from brahm Murder):- जिन लोगों को ब्रह्म हत्या का पाप भूलवश या जाने-अनजाने कैसे भी लगा हो, ऐसे मनुष्यों को चाहिए कि वह किसी विद्वान ब्राह्मण को बुलाकर तीन हजार बार गायत्री मंत्र का जाप तथा हवन कराये, इस प्रकार उन्हें ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिलेगी |

गो हत्या के पाप से मुक्ति(To get rid from cow slaughter):- गो-हत्या या गो-वध सबसे बड़ा अधर्म और पाप माना गया है, और इसके लिए कोई भी सजा बहुत तुच्छ होगी, पर शास्त्रानुसार इस पाप से मुक्ति के लिए बारह दिनों तक प्रतिदिन तीन-तीन हजार गायत्री मन्त्रों का जाप तथा हवन करे |

(जय भगवती गायत्री माता)

Friday, 15 November 2013

beejakshara mantra Mantra for Getting child

!! सन्तान प्राप्ति हेतु सफल सिद्ध मंत्र !!

Shree Govinday Namah 
In Hindi:- 

देवकी सुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते |
देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं समुपाश्रितः||

In English:-
       
Devaki Suta Govinda Vaasudev Jagatpate |
        Dehi Me Tanayam Krishnam Tvamaham Samupashrit ||


अर्थ :- हे देवकी के आखों के तारे, गो एवं गोवत्स का स्वरूप धारण करने में समर्थ गोविन्द,  वासुदेव के दुलारे, जगत को उत्पन करने में समर्थ मेरी अभिलाषा पूर्ण कीजिये | हे कृष्ण मुझे सन्तान रूपी मन वांछित वरदान दे | मैं पूर्ण रूप से आपके आश्रय हूँ |

जप विधि :- कृष्ण के बालस्वरूप गोपाल की प्रतिमा का पञ्च प्रकार पूजन [स्नान, तिलक, पुष्प, धूप और दीप ] कर उपोरोक्त मंत्र का श्रद्धापूर्वक प्रतिदिन एक सौ आठ (108) बार जप करे | स्वत: संयोग बनेगा, और बाधा का निवारण होगा और पुत्र की प्राप्ति होगी| जप नियम से प्रात: व सायं को करे | जप करते समय दीपक चलता रहे |
(शेष भगवत्कृपा)

Thursday, 31 October 2013

beejakshara mantra Lord Rama Gloria and Magnitude of Navaratra

राम भजन सुखदाई

Shree Ram Darbar
आज इस कलियुग के घोर अंधकारमय जीवन में राम नाम ही एकमात्र सहारा है ! इस संसार के सारे लौकिक और अलौकिक फल सहज ही देने की क्षमता जितनी श्रीराम और उनके दो अक्षर के पावन राम” नाम में है, उतनी संभवतया ही किसी अन्य साधन सिद्धि में होगी, यह राम नाम का ही चमत्कार है कि जिसे शास्त्र ज्ञान या पूजा पद्धति कि जानकारी नही हो वह भी राम नाम के जप से बड़ी से बड़ी विपत्तियों से दूर जाकर असीम सुख पा लेता है |


शास्त्र कहते है कि भगवान राम के नाम का महत्व भगवान राम से भी ज्यादा है |
गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में लिखा है कि:-
उल्टा नाम जपत जग जाना ! वाल्मीकि भये ब्रह्म समाना !!"
यानि बिना किसी बड़ी शास्त्रीय समझ और पूजा पथ के बिना भी महर्षि वाल्मीकि ने राम नाम का उल्टा जप शुरू कर दिया और वे ऋषि वाल्मीकि कालांतर में शास्त्र ब्रह्म समान हो गए, किसी भी व्यक्ति की सकाम और निष्काम इच्छाओं की पूर्ति के लिए श्रीराम की प्रसन्नता को शास्त्रों में सर्वोपरि माना गया है |
अनेक मंत्र द्वारा श्री राम से इच्छित वर की प्राप्ति के लिए उपासना पद्धति का वर्णन शास्त्रों में मिलता है | रामायण के पथ विधान में लिखा है कि मंगल और लौकिक लाभ के लिए बालकाण्ड का पाठ करना चाहिए !

Shree Ram
शत्रु संहार या किसी काम में विजय प्राप्त करने के लिए सुन्दरकाण्ड के 68 पाठ 9 दिनों में संस्कृत जानने वाले ब्राहमण विद्धानों से करवाने चाहिए! यह एक सिद्ध प्रयोग है ! और सुन्दरकाण्ड के पाठ से व्यक्ति को कर्जे व शत्रु भय से भी मुक्ति मिलती है !
जिन सकाम भक्तों को शीघ्र लाभ या शारीरिक कष्ट का निवारण चाहिए उन्हें प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर श्रीराम रक्षा स्तोत्र के 11 पाठ करने चाहिए ! इस स्तोत्र कि यह विशेषता है कि यह कंठस्थ हो जाये तो पाठ कने वाले के द्वारा यह सिद्ध मन लिया जाता है ! और विशेषकर नवरात्री में इसका पाठ अति उत्तम माना गया है !
       य: कंठा धारयेत्तस्य करस्था: सर्वसिद्दय: 

                             (JAI SHRI RAM)

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