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Wednesday, 27 November 2013

beejakshara mantra Goddess Tulsi Gayatri Mantra

|| श्री तुलसी गायत्री मंत्र ||

Tulsi



In Hindi:-

ऊँ त्रिपुराय विद्महे तुलसी पत्राय धीमहि | 
तन्नो: तुलसी प्रचोदयात ||

In English:-

Ohm Tripuray Vidmahe Tulsi Patray Dhimahi |
Tanno: Tulsi Prachodayat ||

तुलसी माता के इस गायत्री मंत्र जाप से मन शांत होता है तथा मन में सेवाभाव का संचार होता है | तथा गायत्री मंत्र के साथ इस मंत्र का ध्यान करने से गृह क्लेश आदि बाधाओं से मुक्ति मिलती है |

Sunday, 10 November 2013

beejakshara mantra Tulsi Charnamrit Mantra

तुलसी चरणामृत लेते समय बोले जाने  वाला मंत्र


 अकालमृत्युहरणं सर्वव्याधिविनाशानम् |
 विष्णुपादोदकं पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते ||

अर्थात:- अकालमृत्युहरणं इस पद से तुलसी सेवन करने वालों को दीर्घायु की प्राप्ति होती है, और सर्वव्याधिविनाशानम् इस पद से संपूर्ण रोगों और व्याधियो का नाश हो जाता है, तथा पुनर्जन्म न विद्यते इस पद से मोक्ष की प्राप्ति होती है |

अत: तुलसी आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक तीनों तरह के तापों को मूल रूप से उपशमन कने में तुलसी का विशेष योगदान है | तभी तो हमारे यहाँ प्रतिदिन मंदिरों आदि में तुलसी दल मिश्रित भगवान श्रीहरि का चरणामृत लेते समय इस मंत्र का स्मरण किया जाता है |

Saturday, 9 November 2013

beejakshara mantra Tulsi Pooja & Stuti Mantras ( तुलसी मंत्र )

ब्रह्मवैवर्तपुराण, स्कन्दपुराण आदि पुराणों में तुलसी सभी पापों का नाश करने वाली व भगवान विष्णु की प्रियतमा बताया गया है, और इसके गुणों को देखते हुए ही हमारे पूर्वजो ने इससे पूर्ण सम्बन्ध बनाये रखने के लिए तुलसी का पौधा लगाना, जल चढाना, परिक्रमा लगाना आदि नियम बनाये थे और कुछ दैनिक उपयोग में आने वाले मंत्र भी स्थपित किये गए |

तुलसी नमस्कार मंत्र

 वृन्दायै तुलसीदेव्यै प्रियायै केशवस्य च |
विष्णुभक्तिप्रदे देव्यै सत्यवत्यै नमो नमः ||

तुलसी स्नान मन्त्र

गोविन्दवल्ल्भां देवीं भक्तचैतन्यकारिणीम् |
स्नापयामि जगद्धात्रीं विष्णुभक्तिप्रदायिनीम् ||

तुलसी उतारने का मन्त्र

 तुलस्यमृतजन्मासि सदा त्वं केशवप्रिया |
 केशवार्थं चिनोमि त्वां वरदा भव शोभने ||

ठाकुरजी को तुलसी चढाने का मंत्र

 तुलसीं हेमारूपां च रत्नरूपां च मंजरीम् |
 राधासर्वेश्वरायैतामर्पयामि हरिप्रियाम ||

Thursday, 7 November 2013

beejakshara mantra Tulsi Mahatmya ( How useful The Ocimum tenuiflorum )

तुलसी महात्म्य ( तुलसी महत्व धार्मिक दृष्टि से )

Tulsi
तुलसी भगवान की एक अद्भुद देन है और तुलसी धार्मिक एवं आयुर्वेद दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण है | मंदिरों आदि में तो भगवान श्रीहरि के पूजन की वस्तुओ में तुलसी का विशेष स्थान है, और तो और तुलसी के बिना भगवान अपनी पूजा अर्चना व भोग और नैवेद्य भी स्वीकार नहीं करते |

 शिला ताम्रं तथा तोयं शंखः पुरुषसूक्तकम् | 
गन्धं घंटा तथा तुलसीत्यष्टाङ्गं तीर्थमुच्यते || 

उपर्युक्त हलायुद्ध ग्रन्थ के प्रमाणानुसार देवतीर्थ के आठ पदार्थों में तुलसी का होना परम आवश्यक है | बिना तुलसी के देवतीर्थ भी अपूर्ण है |



वैष्णव व सनातन जनों का यह विश्वास है कि अंतिम समय में जिस व्यक्ति को भगवान का चरणामृत और उनको अर्पण किया हुआ तुलसी दल प्राप्त हो जाता है तो वह जन्म मरण के बंधन से छूट जाता है व मोक्ष को प्राप्त हो जाता है, विष्णु पुराण में तो यहाँ तक कहा गया है कि यदि किसी मनुष्य या प्राणी ने आजीवन पाप व निंदनीय कर्म किये हो व अंत समय में श्रीहरि का स्मरण करते हुए तुलसी दल या चरणामृत का सेवन कर लेता है तो उसे यमदूत छू तक नही सकते और उसे वैकुण्ठ लोक कि प्राप्ति होती है |

जिसने तुलसी कि मंजरी से भगवान विष्णु का पूजन किया हो, उसने अपने जन्म भर के समस्त पापों को नष्ट कर दिया | और अपने मुक्ति के द्वार खोल दिए, ऐसा विष्णुपुराण का मत है |

 तुलसी कि महिमा तो अपरम्पार है, तुलसी का पौधा घर में हो तो उस घर में कभी भी पाप नही हो सकता है तथा स्वयं यम व यम के दूत भी वहाँ नही आ सकते है | ऐसी गुणदायिनी, कृष्णप्रिया, विष्णुप्रिया, सर्वपापहारिणी माता तुलसी को मै प्रणाम करता हूँ |

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