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Monday, 18 November 2013

beejakshara mantra Ganesh Vandana And Mantras

सुखकर्ता विघ्नहर्ता भगवान श्री गणपति

Shree Ganesha
भगवान गणपति प्रथम पूज्य देव है और मगल मूर्ति है | तथा विघ्ननिवारण के लिए उनको पूजा जाता रहा है |

पर इतना ही नहीं भगवान गणेश की एक विशेषता भी उनकों सर्वलोकप्रिय बनाती है, वह यह है की भक्तों पर कृपा करने वह स्वयं भक्तों के घर पर जाते है तथा वहाँ पर विराजमान होते है | 

गणपति का पूजन करने वाले भक्तों को चाहिए की वह दूब और पुष्पों से उनका पूजन करे क्योकि दूब गणेश को अत्यंत प्रिय है और गुड के मोदक का नैवेद्य भी उनको अति प्रिय है | भगवान गणेश आदि देवों की श्रेणी में आटे है जिन्होंने हर युग में अवतार लिया है और भक्तों को संकट से उबारा है | 

इनकी शारीरिक रचना भी अति विशिष्ट है और गुढ़ अर्थ की और संकेत करती है | चारों दिशाओं में व्याप्त उनकी चार भुजाये है और वह लम्बोदर के नाम से इसलिए जाने जाते है क्योकि सारी चराचर सृष्टि उनके उदर में विचरण करती है, भगवान गणेश सृष्टि के विघ्न हर्ता है | ऐसे असीम बुद्धि और शक्ति के स्वामी श्री गणेश को मैं बारम्बार प्रणाम करता हूँ |

प्रथम पूजनीय श्री गणेश:- गणेश को देवताओं में ही नहीं बल्कि सृष्टि के हर कार्य में प्रथम पूजा का वरदान है और उनके पूजन के पश्चात कोई भी कार्य करे, उस कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती है ऐसा शास्त्रों में निहित है | इस प्रकार का चलन कई युगों से चला आ रहा है और आजकल ले युग में तो यह एक लोकोक्ति या कहावत बन गई है की किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने को ही श्री गणेश करना कहा जाने लगा है | और विवाह और गृह पवेश जैसे मौकों पर तो श्री गणेशाय नमः लिखने की प्राचीन परम्परा भी है और हम आज भी इस परम्परा का उचित ढंग से पालन करते है | श्री गणेश को मनोकामना पूर्ण करने वाले देवता के रूप में भी जाना जाता है |

गणेश पूजा में तुलसी निषेध:- श्री भगवान गणपति की पूजा में तुलसी को वर्जित किया गया है | श्री गणेश की पूजा में तुलसी नहीं चढाने का प्रावधान है | इसके पीछे एक कथा है की एक बार गंगातट पर गणपति को ताप करता देख तुलसी उनके तरुण रूप पर मोहित हो गई और उसने गणेश जी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा | तब श्री गणेश जी ने कहा कि - माता ! मैं आपके पुत्र समान हूँ, आप मेरे से अपनी आसक्ति हटा ले, तब भगवती तुलसी ने क्रोधित हो गणेश को शाप दे दिया कि अति शीघ्र ही तुम्हारा विवाह हो जाये और तुम्हारे तपस्वी जीवन का अंत हो जाये | तदन्तर श्री गणेश ने कहा कि हे देवि आज से मैंने आपको सर्वदा के लिए त्याग दिया है और आज से आप वृक्ष रूप होकर भगवान विष्णु कि प्रिया बने |
तब से भगवान गणेश कि पूजा अर्चना में तुलसी को निषिद्ध कर दिया गया |

श्री गणेश मंत्र :- श्री गणेशाय नमः |

अत: भगवान गणेश के इस मंत्र का जाप करने से भक्तो के सारे विघ्न और संकटों का नाश होगा और साथ ही बुद्धि और सुख सम्पदा कि वृद्धि होगी | तथा गणेश कि पूजा तथा स्मरण से सभी मनोकानाएं पूर्ण होती है |

गणेश गायत्री मंत्र:- गणेश गायत्री मंत्र का जाप करने से सर्व सिद्धि की प्राप्ति होती है और सभी दुखों का अंत होता है |

Related Mantra:-


(जय गणेशाय नमः)

beejakshara mantra Significance of Ganesh Chaturthi (Ganesh Chaturthi Festival)

भारतीय सभ्यता और संस्कृति में गणेश चतुर्थी का महत्व 

गणेश चतुर्थी:- गणेश चतुर्थी भारतीयों का एक प्रमुख त्योंहार है और यह पूरे भारत में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है | हिंदू पुराणानुसार गणेश चतुर्थी में भी थोड़े मतभेद होने की वजह से यह त्यौहार शिवपुराण के अनुसार भादप्रद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को और गणेश पुराण के अनुसार भादप्रद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवन श्री गणेश का जन्म हुआ बताया जाता है | अत: इस दिन अर्थात गणेश पुराणानुसार शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है | वैसे तो पूरे भारत में इस त्यौहार को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन महाराष्ट्र में इसका विशेष महत्व है | और महाराष्ट्र में भी पुणे में यह त्यौहार विश्व ख्याति प्राप्त है | देश विदेशो में भी इस त्यौहार को बड़ी ही श्रृद्धा भाव से मनाया जाता है और इस दिन भगवन गणेश की पूजा की जाती है |

Shree Ganpati
गणेश जन्म कथा:- भगवान गणपति के जन्म के रूप में इस त्यौहार को मनाया जाता है और श्री गणेश के जन्म की कथा पुरानों में दी गयी है | भारतीय पुराणों के अनुसार एक बार माता पार्वती स्नानघर में स्नान करने हेतु जाने लगाती है पर वहाँ पर कोई आ ना जाये इसलिए अपने मेल से एक बालक की उत्पत्ति करती है, इस बालक को ही हम गणेश नाम से जानते है | बालक को उत्पन्न करने के बाद माता पार्वती उसे आदेश देती है की जब तक मै स्नान से निवृत न हो जाऊँ, किसी को भी अंदर मत आने देना | तत्पश्चात माता की आज्ञा पाकर वह बालक द्वार पर आकार बैठ गया और द्वार पाल बनकर वहाँ खड़ा हो गया | 

कुछ देर पश्चात वहाँ शिव गानों का आगमन हुआ पर उस बालक के आगे उनकी एक ना चली और वे लौट गए और भगवान शिव को जाकर सारा वृतांत सुनाया | तब भगवान शिव शंकर वहाँ आये और उन्होंने उस बालक को हटने के लिए कहा और पूछा की तुम्हे यहाँ खड़े होने की आज्ञा किसने दी | तब उस बालक ने कहा की माँ स्नान कर रही है और उन्हीं ने मुझे आदेश दिया की मै किसी को भी प्रवेश न करने दूँ | फिर भगवान शिव के बहुत समझाने पर भी गणेश जी नहीं माने तो भोलेनाथ क्रुद्ध हो गए और उन्होंने उसे उद्दंड बालक समझकर अपने त्रिशूल से उसका सिर काट दिया |

यह सारा वृतांत जब माता पार्वती को पता चला तो वे क्रुद्ध हो उठी और तुरंत ही उन्होंने माँ भगवती जगदम्बा का रूप ले लिया और पुत्र के पार्थिव शरीर को देखकर माता आग बबूला हो गयी तथा उन्होंने सारी सृष्टि के विनाश की ठान ली |

उस भयंकर तथा आतंकारी माहौल से देवता भयभीत हो गए और त्राहिमाम त्राहिमाम कर याचना कने लगे तब
देवर्षि नारदजी के कहने पर सभी देवों ने भगवती जगदम्बा की स्तुति और आराधना की तथा शिवाजी के कहे अनुसार भगवान विष्णु उतर दिशा में सबसे पहले मिले प्राणी (हाथी का सिर) का सिर काटकर ले आये और महादेव शिव ने उस सिर को उस बालक के धड के साथ जोड़कर मृत्युंजय मंत्र से उसे जीवित कर दिया | तब पुत्र को जीवित पाकर माँ जगदम्बा का क्रोध भी शांत हो गया और उन्होंने गणेश जी को सभी देवताओं में अग्रणी होने का आशीर्वाद दिया |

और तीनों देवाधिदेवों ने भी गणेश को सर्वप्रथम पूजने का वरदान दिया और देवताओं का अध्यक्ष घोषित किया | और भगवान शंकर ने गिरिजानन्दन को सभी गणों का अध्यक्ष बना दिया | तभी से हम इन्हें गणपति, गणनायक और गणेश जैसे नामों से जानने लगे | और भगवान शिव ने कहा की विघ्न नाश में तुम्हारा नाम सबसे पहले आएगा तथा इस तिथि में व्रत करने वाले के सभी विघ्नों का नाश हो जाएगा और उसे सब सिद्धियां प्राप्त होंगी। भादप्रद मास की चतुर्थी की रात्रि में चंद्रोदय के समय गणेश तुम्हारी पूजा करने के पश्चात् व्रती (व्रत कने वाला) चंद्रमा को अ‌र्घ्यदेकर ब्राह्मण को भजन कराये तत्पश्चात स्वयं भी भोजन करे, इससे उसका कल्याण होगा। वर्षपर्यन्तश्रीगणेश चतुर्थी का व्रत करने वाले की सभी मनोकामनायें अवश्य पूर्ण होती है।

गणेश मंत्र:- गणेश चतुर्थी को मनाने के साथ ही साधकों को इस मंत्र का जाप करते रहना चाहिए, इस मंत्र का जाप करने वालों पर गणेश की विशेष कृपा होती है और उसे सुख सम्पति की प्राप्ति होती है |

"ऊँ गं गणपतये नमः"

तथा 

वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ: |
निर्विघ्नं कुरु में देवो, सर्वकार्येषु सर्वदा ||

इन मन्त्रों का जाप करने वाले भक्तो के कभी भी विघ्न या संकट नहीं आता है और जीवन में वैभव और सुख की वृद्धि होती है |

चंद्र दर्शन निषेध:- प्रत्येक शुक्ल पक्ष चतुर्थी को चन्द्रदर्शन के पश्चात्‌ व्रत करने वालों को आहार लेने का निर्देश है,और इसके पूर्व व्रती को आहार का सेवन वर्जित माना गया है । किंतु भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को रात्रि में चन्द्र-दर्शन (चन्द्रमा देखने को) निषिद्ध किया गया है।

जो व्यक्ति इस रात्रि को चन्द्रमा को देखते हैं उन्हें झूठा-कलंक प्राप्त होता है। और झूठे पाप के भागी बनते है,  ऐसा शास्त्रों में वर्णित है। और यह अनुभूत भी है। तथा गणेश चतुर्थी को चन्द्र-दर्शन करने वाले व्यक्तियों को उक्त परिणाम अनुभूत भी हुए है, इसमें संशय नहीं है। अत: यदि जाने-अनजाने में चन्द्रमा दिख भी जाए तो निम्न मंत्र का पाठ अवश्य कर लेना चाहिए तथा भगवान गणेश से क्षमा पार्थना करते हुए इस मंत्र का जाप करना चाहिए:-
दोष निवारण मंत्र 

सिहः प्रसेनम्‌ अवधीत्‌, सिंहो जाम्बवता हतः। 
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्वमन्तकः॥

अत: भगवान गणेश सभी देवों में प्रथम पूजनीय और अति सुख तथा आनंद देने वाले है | तथा इस तिथि के पश्चात प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को व्रत करने से विघ्न हर्ता गणनायक गणेश जी प्रसन्न होते है और सारे दुख और संकटों का निवारण करते है |
इसलिए मेरी यही कामना है की भगवान गणेश के इस जन्म दिन को अति आनंद और सद्भाव तथा भाईचारे के साथ मनाईये और यही कामना करता हूँ की भगवन गणेश आपको सुख और समृद्धि दें |

(श्री गणेशाय नमः)

Tuesday, 12 November 2013

beejakshara mantra Shree Ganesh Vandana (Shree Ganapati Stuti)

!! गणपति वंदना (मंत्र) !!

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय, 
लम्बोदराय सकलाय जगद्विताय |
गजाननाय श्रुतियज्ञविभुषिताय
गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते ||1||

In English :- 

Vighneshvaray Varday Surpriyay 
Lambodar Sakalaay Jagdvitaay |
Gajaanan Shrutiyagyavibhushitaay
Gourisutaay Gannath Namon Namste ||1||

वक्रतुण्ड महाकाय: सूर्यकोटि समप्रभ: |
निर्विघ्नं कुरु मे देवो सर्वकार्येषु सर्वदा ||2||

In English :- 

Vakratund Mahakaay: Suryakoti Samprabh: |
Nirvighna Kuru Me Devo Sarvakaryeshu Sarvada ||2||


Ganesha
भगवन श्रीगणपति की स्तुतियाँ या मंत्र सभी को विघ्न विनाशक की दृष्टि से देखा जाता है और भगवान गणेश भी विघ्नेश, विघ्नविनाशक, गजानन, लम्बोदर आदि नामों से जाना जाता है | इन स्तुतियों या मंत्रो का जाप करने वाले भक्त के सारे विघ्न या संकट का निराकरण हो कटा है इसमें कोई संशय नहीं है |


भगवान श्री गणेश को प्रथम पूजनीय देवता भी मानते है इसलिए जब भी कोई नया कार्य या व्यापार का शुभारंभ करना हो तो भगवन गणेश की पूजा अर्चना दिए गए मंत्र “ वक्रतुंड महाकाय...” से करना चाहिए, और श्री भगवान को स्मरण करते हुए ही नया काम प्रारम्भ करना चाहिए | 

आपने अपने रोजमर्रा के जीवन में कई बार सुना होगा कि “श्रीगणेश करना” जिसका अर्थ होता है कि कोई नया कार्य प्रारम्भ करना और इन मंत्रो को उच्चारित करने या स्मरण करने का विधान होता है, संपूर्ण विधि विधान बिना मंत्र का प्रभाव व्यर्थ रह जाता है | 

इसलिए सभी को चाहिए की आत्म और शरीर शुद्धि बिना मन्त्रों का उच्चारण नहीं करना चाहिए, भगवान गजानन के इन मन्त्रों का रोज ध्यान या जप करने वाले के कभी विपत्ति या पारिवारिक क्लेश नहीं होता है |

(श्रीगणेशाय नमः)

Sunday, 3 November 2013

beejakshara mantra Ganesha Gayatri Mantra

गणेश गायत्री मंत्र

Lord Ganesha
In Hindi:-

ओम् तत्पुरुषाय विद्मिहे वक्रतुण्डाय धीमहि |
तन्नो: दन्ती प्रचोदयात ||


In English:-

Ohm Tatpurushay Tatpurushay Vidmahe Vakratunday Dhimahi |
Tanno: Danti  Prachodayat || 


That's very effective mantra for everyone, try to jaap at least 108 times in a day or as you wish then you will feels the effect if this.  

Click to Watch the Video of "Ganesha Gayatri"

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